विकसित भारत शिक्षा : भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार आने वाला है। संसद के शीतकालीन सत्र 2025 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 पेश किया। अगले दिन 16 दिसंबर को लोकसभा ने इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को परीक्षण के लिए भेज दिया। यह विधेयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुरूप है और उच्च शिक्षा के नियामक ढांचे को पूरी तरह ओवरहॉल करने का प्रस्ताव करता है।
विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
वर्तमान में उच्च शिक्षा में कई नियामक संस्थाएं हैं जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई)। इनके बीच समन्वय की कमी और गैर-समन्वित नियमों से संस्थानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 इन सभी को समाप्त कर एक एकल छत्र संस्था की स्थापना का प्रस्ताव करता है।

इसका मुख्य लक्ष्य:
- उच्च शिक्षा संस्थानों को शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और उत्कृष्टता में सशक्त बनाना।
- भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाना।
- बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा देना।
- भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषाओं को उच्च शिक्षा में शामिल करना।
नई संरचना: विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA)
विधेयक के अनुसार, #विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान एक एपेक्स बॉडी होगी, जिसमें चेयरपर्सन सहित 12-13 सदस्य होंगे। ये सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाएंगे। यह आयोग तीन स्वतंत्र परिषदों का समन्वय करेगा:
- #विकसित भारत शिक्षा विनियम परिषद – नियामक भूमिका (रेगुलेशन)।
- विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद – मान्यता और गुणवत्ता निर्धारण (एक्रीडिटेशन)।
- विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद – शैक्षणिक मानकों का निर्धारण (स्टैंडर्ड सेटिंग)।
- यह आयोग केंद्रीय विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम, आईआईएससी
- जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों पर लागू होगा। फंडिंग केंद्र सरकार द्वारा होगी
- लेकिन रेगुलेटरी काउंसिल को अनुदान देने की शक्ति नहीं होगी।
- फीस नियमन भी इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
संसद में क्या हुआ?
15 दिसंबर को विधेयक पेश होने पर विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया। उनका कहना था कि विधेयक की कॉपी देर से मिली, जिससे अध्ययन का समय नहीं मिला। कुछ सदस्यों ने इसे केंद्र सरकार की अधिक शक्ति देने वाला बताया। फिर भी, 16 दिसंबर को शिक्षा मंत्री ने प्रस्ताव रखा और लोकसभा ने वॉयस वोट से इसे जेपीसी को भेज दिया।
जेपीसी में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। समिति को अपनी रिपोर्ट 2026 बजट सत्र के पहले भाग के अंतिम दिन तक (लगभग फरवरी 2026) जमा करनी है।
उच्च शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह विधेयक पास होने पर:
- नियामक प्रक्रियाएं सरल और एकीकृत होंगी।
- संस्थानों को ग्रेडेड ऑटोनॉमी मिलेगी।
- गुणवत्ता और मानकों में सुधार होगा।
- अनावश्यक ब्यूरोक्रेसी कम होगी।
- भारत विकसित राष्ट्र के लक्ष्य की ओर शिक्षा क्षेत्र मजबूत होगा।
हालांकि, कुछ आलोचक इसे केंद्र की अधिक शक्ति देने वाला मानते हैं, जो राज्यों की भूमिका कम कर सकता है। पहले के एचईसीआई बिल (2018) को भी इसी वजह से विरोध का सामना करना पड़ा था।
निष्कर्ष: विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 उच्च शिक्षा को आधुनिक, पारदर्शी और वैश्विक स्तर का बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। जेपीसी की रिपोर्ट के बाद यह विधेयक और मजबूत होकर पास होगा, तो लाखों छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों को फायदा मिलेगा। एनईपी 2020 के सपने को साकार करने में यह विधेयक अहम भूमिका निभाएगा।
