Owaisi Love Jihad Statement
Owaisi Love Jihad Statement असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर BJP और RSS पर हमला बोला — “लव जिहाद की असली परिभाषा बताओ और आंकड़े संसद में पेश करो।” जानिए पूरा मामला विस्तार से।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के ‘लव जिहाद’ वाले बयान पर तीखा प्रहार करते हुए BJP-RSS को चुनौती दी है कि वे संसद में इसके आधिकारिक आंकड़े पेश करें। ओवैसी ने कहा कि युवाओं को रोजगार चाहिए, न कि विभाजनकारी प्रोपेगेंडा। यह बयान राजनीतिक बहस को नई ऊंचाई दे रहा है, जहां सामाजिक सद्भाव बनाम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सवाल उठ खड़ा हुआ है।
Owaisi Love Jihad Statement: विवाद की शुरुआत भागवत का बयान
RSS चीफ मोहन भागवत ने 3 जनवरी 2026 को भोपाल के ‘स्त्री शक्ति संवाद’ में कहा कि ‘लव जिहाद’ रोकने के प्रयास परिवारों से शुरू होने चाहिए। उन्होंने परिवार संरचना मजबूत करने पर जोर दिया और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों का जिक्र किया। RSS का तर्क है कि संगठित तरीके से हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण हो रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। यह बयान BJP शासित राज्यों में लव जिहाद विरोधी कानूनों के संदर्भ में आया, जहां कई मामले दर्ज हो चुके हैं।
ओवैसी की चुनौती: आंकड़े और परिभाषा दो!
- अमरावती में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने कहा,
- “लव जिहाद क्या है, इसकी कानूनी परिभाषा बताओ।
- अगर हो रहा है तो सभी BJP राज्यों के रिकॉर्ड संसद में पेश करो।
- ” उन्होंने 11 साल की मोदी सरकार से पूछा कि रिपोर्टेड केस कितने हैं?
- ओवैसी बोले, “वयस्कों का अपना फैसला है,
- इसमें हमारी पसंद-नापसंद नहीं।
- युवाओं को नौकरी दो, भटकाव मत फैलाओ।
- ” AIMIM सांसद ने इसे मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने की साजिश बताया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
BJP-RSS पक्ष: BJP नेताओं ने ओवैसी के बयान को खारिज करते हुए कहा कि लव जिहाद वास्तविक समस्या है, और कानून इसका जवाब हैं। अमित मालवीय जैसे IT सेल प्रमुख ने पुराने केस शेयर कर ओवैसी को जवाब दिया। RSS ने स्पष्ट किया कि भागवत परिवार मूल्यों की रक्षा की बात कर रहे थे।
- विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया: SP सांसद रामजी लाल सुमन ने RSS को मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला कहा।
- कांग्रेस और अन्य ने सद्भाव की अपील की,
- लेकिन ओवैसी के बयान का समर्थन किया।
- असम LoP देबब्रत सैकिया ने BJP-RSS पर अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
लव जिहाद: बहस का केंद्र
- लव जिहाद शब्द 2000 के दशक से चर्चा में है,
- जहां आरोप है कि मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों से शादी कर धर्मांतरण कराते हैं।
- यूपी, एमपी, गुजरात जैसे राज्यों में सख्त कानून बने,
- लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतर-धर्म विवाह संविधानिक अधिकार है।
- NCRB डेटा में ‘लव जिहाद’ अलग से कैटेगरी नहीं,
- लेकिन जबरन धर्मांतरण के 500+ केस सालाना दर्ज होते हैं।
- आलोचक इसे प्रोपेगेंडा मानते हैं, जबकि समर्थक सामाजिक खतरे की संज्ञा देते हैं।
सामाजिक प्रभाव और भविष्य
यह विवाद ध्रुवीकरण बढ़ा रहा है, खासकर चुनावी साल में। ओवैसी का सवाल वैध लगता है—बिना डेटा के आरोप खोखले क्यों? BJP यदि आंकड़े पेश करती है तो बहस मजबूत होगी, वरना प्रचार का आरोप लगेगा। समाज को चाहिए एकता, न कि संदेह। युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, ऐसे में ये बहस भटकाव ही है। राजनीति से ऊपर उठकर तथ्यों पर बहस होनी चाहिए।
