सऊदी विजन 2030 संकट
सऊदी विजन 2030 संकट सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का विजन 2030 संकट में, बजट घाटा और तेल निर्भरता से हिचकोले। नई रणनीति और प्रोजेक्ट्स में बदलाव की तैयारी, MBS अब क्या करेंगे?

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने 2016 में Vision 2030 लॉन्च किया था। यह एक भव्य योजना थी, जिसका मुख्य उद्देश्य तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था को विविधीकृत करना, निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना, पर्यटन, मनोरंजन और तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना था। लाखों नौकरियां पैदा करने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब बनने का सपना देखा गया। लेकिन 2026 में स्थिति बदल चुकी है। कमजोर तेल कीमतें, मेगा-प्रोजेक्ट्स में देरी, लागत में भारी वृद्धि और बढ़ता कर्ज इस सपने को चुनौती दे रहा है। क्या यह योजना अब डूबने की कगार पर है? आइए विस्तार से समझते हैं।
Vision 2030 की शुरुआत और शुरुआती सफलताएं
Vision 2030 तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है – एक जीवंत समाज, एक मजबूत अर्थव्यवस्था और एक महत्वाकांक्षी राष्ट्र। शुरुआत में कई क्षेत्रों में प्रगति हुई। पर्यटन और मनोरंजन में निवेश बढ़ा, महिलाओं के लिए ड्राइविंग और काम करने के नियम ढीले हुए, बेरोजगारी दर 7% तक कम हुई (2024 में लक्ष्य से पहले हासिल), और गैर-तेल राजस्व में 113% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। NEOM, Red Sea Project, Qiddiya जैसे गिगा-प्रोजेक्ट्स ने दुनिया का ध्यान खींचा। PIF (Public Investment Fund) की संपत्ति 900 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई। लेकिन ये शुरुआती सफलताएं अब चुनौतियों के सामने फीकी पड़ रही हैं।
मेगा-प्रोजेक्ट्स में भारी देरी और लागत वृद्धि
Vision 2030 का सबसे बड़ा हिस्सा गिगा-प्रोजेक्ट्स हैं, खासकर NEOM। यह 500 अरब डॉलर से ज्यादा का प्रोजेक्ट था, जिसमें 170 किमी लंबा “The Line” शहर शामिल था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। 2030 तक 1.5 मिलियन लोगों के बसने का लक्ष्य घटाकर 3 लाख से कम कर दिया गया। लागत 8.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की रिपोर्ट्स आईं (हालांकि सऊदी अधिकारियों ने इसे गलत बताया)। निर्माण में देरी, इंजीनियरिंग समस्याएं और बजट ओवररन के कारण प्रोजेक्ट को स्केल बैक किया जा रहा है। Qiddiya, Red Sea और Trojena जैसे अन्य प्रोजेक्ट्स भी सालों पीछे हैं। Bloomberg और Reuters की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में ही इन प्रोजेक्ट्स पर 8 अरब डॉलर का कट लगाया गया। MBS ने खुद Shura Council में कहा कि अगर जनहित में जरूरी हुआ तो प्रोग्राम्स कैंसल या बदल दिए जाएंगे।
कर्ज का बढ़ता बोझ: आंकड़े क्या कहते हैं?
तेल की कीमतें 2025 में औसतन 63 डॉलर/बैरल तक गिर गईं, जबकि सऊदी का फिस्कल ब्रेकईवन 94-111 डॉलर है। इससे बजट घाटा बढ़ा। 2025 में घाटा 245 अरब रियाल (लगभग 65 अरब डॉलर) तक पहुंचा, जबकि 2026 के लिए 165 अरब रियाल (44 अरब डॉलर) का अनुमान है – यानी GDP का 3.3%। पब्लिक डेब्ट 2025 के अंत तक 1.457 ट्रिलियन रियाल (GDP का 31.7%) और 2026 में 1.622 ट्रिलियन रियाल (32.7%) तक पहुंचने की उम्मीद है। 2015 से डेब्ट-टू-GDP रेशियो 6 गुना बढ़ चुका है। PIF पर दबाव बढ़ा है, जिसके कारण अमीर परिवारों से घरेलू निवेश मांगा जा रहा है। IMF और Bloomberg की रिपोर्ट्स में कहा गया कि फंडिंग स्क्वीज हो रही है, और मेगा-प्रोजेक्ट्स PIF के लिए बोझ बन रहे हैं।
चुनौतियां: क्षेत्रीय अस्थिरता और FDI की कमी
क्षेत्रीय संघर्ष (रेड सी में हमले, इजराइल-ईरान तनाव) निवेशकों का भरोसा तोड़ रहे हैं। FDI 2025 में तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा। गैर-तेल निर्यात लक्ष्य से कम हैं, और पर्यावरणीय प्रदर्शन में गिरावट आई है। PIF की कुछ निवेश (जैसे EV स्टार्टअप, क्रूज लाइन) घाटे में चल रही हैं। इससे Vision 2030 की फंडिंग प्रभावित हो रही है।
सऊदी विजन 2030 संकट: अब क्या होगा? संभावित भविष्य
- सऊदी सरकार इसे “डूबना” नहीं मान रही।
- 2026 बजट में थर्ड फेज की शुरुआत बताई गई है –
- अब फोकस लॉजिस्टिक्स, AI, मिनरल्स और रिलीजियस टूरिज्म पर शिफ्ट हो रहा है।
- बड़े मेगा-प्रोजेक्ट्स की स्पीड कम की जा रही है।
- IMF ने खर्च में रीकैलिब्रेशन की सराहना की है।
- डेब्ट लेवल अभी भी ग्लोबल स्टैंडर्ड से कम है (G20 में सबसे कम),
- और बॉन्ड मार्केट में अच्छी मांग है।
- अगर तेल कीमतें सुधरती हैं या FDI बढ़ता है,
- तो योजना बच सकती है।
- लेकिन अगर कर्ज 40-50% GDP तक पहुंचा,
- तो कटौती और सुधार जरूरी होंगे।
- MBS की महत्वाकांक्षा बरकरार है, लेकिन रियलिटी चेक हो चुका है।
निष्कर्ष
Vision 2030 पूरी तरह फेल नहीं हुआ, लेकिन यह अपनी मूल गति खो चुका है। कर्ज का बोझ, देरी और तेल पर निर्भरता इसे हिचकोले खिला रही है। MBS अब ज्यादा व्यावहारिक रास्ता चुन रहे हैं – बड़े प्रोजेक्ट्स को स्केल बैक कर छोटे, हाई-रिटर्न क्षेत्रों पर फोकस। सऊदी अर्थव्यवस्था अभी मजबूत है, लेकिन अगले कुछ साल निर्णायक होंगे। क्या यह सपना डूबेगा या नया रूप लेगा? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल यह कगार पर जरूर है।
