रुचि तिवारी हमला
रुचि तिवारी हमला दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में UGC इक्विटी रेगुलेशंस के समर्थन में प्रोटेस्ट के दौरान महिला यूट्यूबर रुचि तिवारी पर भीड़ ने जाति आधारित हमला किया। गला घोंटने, कपड़े फाड़ने और रेप थ्रेट की कोशिश हुई, घटना ने विवाद खड़ा कर दिया।

13 फरवरी 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के नॉर्थ कैंपस में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की 2026 की इक्विटी रेगुलेशंस (Promotion of Equity in Higher Educational Institutions Regulations) के समर्थन में छात्रों का प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान महिला यूट्यूबर और स्वतंत्र पत्रकार रुचि तिवारी पर भीड़ ने क्रूर हमला किया। आरोप है कि हमला उनकी जाति (ब्राह्मण) के आधार पर किया गया। गला घोंटने की कोशिश, कपड़े फाड़ने और नंगी परेड निकालने की धमकी जैसी घटनाएं सामने आईं। यह घटना न केवल कैंपस हिंसा का उदाहरण है, बल्कि जातिवाद की गहरी जड़ों को भी उजागर करती है।
घटना का पृष्ठभूमि: UGC रेगुलेशंस क्या हैं?
UGC ने 2026 में नई गाइडलाइंस जारी कीं, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना और इक्विटी (समानता) को बढ़ावा देना था। इन नियमों में जाति आधारित उत्पीड़न की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई, संवेदनशीलता ट्रेनिंग और अनुशासनात्मक प्रक्रियाएं शामिल थीं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी, क्योंकि इन्हें अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताया गया।
इस फैसले के बाद कैंपस में दो ध्रुव बन गए। एक तरफ एसएफआई (Students’ Federation of India), आइसा (All India Students’ Association) जैसे वामपंथी छात्र संगठन इन नियमों के समर्थन में “समता उत्सव” और प्रदर्शन कर रहे थे। दूसरी तरफ कुछ संगठन इन्हें ब्राह्मण-विरोधी और आरक्षण विरोधी मानते हुए विरोध कर रहे थे। इसी प्रदर्शन के दौरान रुचि तिवारी कवरेज के लिए पहुंचीं।
रुचि तिवारी हमला: क्या हुआ DU आर्ट्स फैकल्टी में?
- रुचि तिवारी, जो एक स्वतंत्र यूट्यूबर हैं और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं,
- प्रदर्शन की कवरेज करने गईं।
- वीडियो और गवाहों के अनुसार, भीड़ ने पहले उनकी जाति पूछी।
- “तिवारी” सुनते ही कुछ लोगों ने उन्हें ब्राह्मण बताकर निशाना बनाया।
- भीड़ ने उन्हें घेर लिया, धक्का-मुक्की की,
- गला घोंटने की कोशिश की और कपड़े फाड़ने की कोशिश की।
- रुचि ने बाद में अपना बयान दिया:
- “उन्होंने मुझे पकड़ा, मेरा गला दबाया, कपड़े उतारने की कोशिश की।
- कुछ लड़कियों ने मेरे कान में फुसफुसाकर कहा – ‘आज तू चल, तेरा नंगा परेड निकलेगा’।
- मेरी रक्षा करने वाले मेरे पुरुष साथी को भी घेर लिया गया।
- लगभग 500 लोगों की भीड़ थी।”
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। घटनास्थल पर भारी बवाल मचा रहा।
पीड़िता रुचि तिवारी: कौन हैं वे?
रुचि तिवारी एक स्वतंत्र पत्रकार और यूट्यूबर हैं, जो राष्ट्रवादी और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखती हैं। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और अक्सर वर्तमान घटनाओं पर वीडियो बनाती हैं। इस घटना के बाद उन्होंने खुद को ब्राह्मण बताते हुए कहा कि हमला उनकी जाति के कारण हुआ। उनकी गवाही ने सोशल मीडिया पर #JusticeForRuchiTiwari ट्रेंड करवा दिया। कई लोगों ने इसे जाति आधारित हिंसा का मामला बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक उकसावा करार दिया।
प्रतिक्रियाएं और विवाद
- राजनीतिक प्रतिक्रिया: भाजपा नेता अश्विनी चौबे ने इसकी निंदा की और ब्राह्मण समाज पर हमले को शर्मनाक बताया।
- कई हिंदुत्व समर्थक संगठनों ने इसे “ब्राह्मण विरोधी हिंसा” कहा।
- वामपंथी संगठन: आइसा और एसएफआई ने आरोपों को खारिज किया।
- उनका कहना है कि रुचि ने खुद उकसाया और कोई जाति आधारित हमला नहीं हुआ। उन्होंने थाने घेरने का भी आरोप लगाया।
- सोशल मीडिया: #BrahminismZindabad जैसे हैशटैग ट्रेंड हुए।
- कुछ छात्रों ने मोरिस नगर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया।
यह घटना दोनों पक्षों के बीच गहरे विभाजन को दिखाती है।
निष्कर्ष: जातिवाद और कैंपस हिंसा का खतरा
- यह घटना बताती है कि UGC जैसे नियम कितने संवेदनशील हैं।
- जाति के नाम पर हिंसा किसी भी रूप में अस्वीकार्य है।
- चाहे वह ऊपरी जाति हो या पिछड़ी, महिला हो या पुरुष –
- हिंसा कभी जायज नहीं।
- दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में ऐसी घटनाएं शिक्षा के माहौल को खराब करती हैं।
पुलिस को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। साथ ही, समाज को जातिवाद की जड़ों पर विचार करना होगा। क्या हम वाकई समानता चाहते हैं या सिर्फ नारे लगाते हैं? रुचि तिवारी की घटना एक चेतावनी है – जब तक जाति आधारित नफरत रहेगी, ऐसे हमले होते रहेंगे।
