Karti Chidambaram Fake Currency
Karti Chidambaram Fake Currency रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर में फेक करेंसी स्कैम सीन पर चर्चा तेज। 2008 के लंदन डील का इशारा P. Chidambaram की ओर? Karti Chidambaram से कनेक्शन के दावे वायरल, लेकिन फैक्ट्स vs फिक्शन में उलझन। प्रोपगैंडा या सच्चाई?

बॉलीवुड की दुनिया में जब कोई फिल्म रिलीज होती है, तो वो सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह जाती। वो बहस का केंद्र बन जाती है, खासकर जब वो ‘सच्ची घटनाओं पर आधारित’ का टैग लगाकर आती है। आदित्य धर की फिल्म धुरंधर (2025) भी ऐसी ही एक फिल्म है, जिसमें रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर माधवन और यामी गौतम जैसे सितारे हैं। लेकिन फिल्म की सबसे चर्चित सीन वो नहीं है जहां पाकिस्तानी ISI के खनानी ब्रदर्स नकली नोट छापते नजर आते हैं, बल्कि वो सीन है जो भारत के अंदरूनी गद्दारों की ओर इशारा करता है।
जी हां, फेक करेंसी का वो प्लेट वाला सीन – जहां एक भारतीय मंत्री और उनका बेटा पाकिस्तान को करेंसी प्रिंटिंग प्लेट्स और सिक्योरिटी फीचर्स सौंपते हैं। सोशल मीडिया पर इस सीन को लेकर तूफान मच गया है, और सबकी नजरें टिक गई हैं पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम पर। क्या ये इशारा सच में उनके तरफ था? क्या कार्ति का ‘कैमियो’ सिर्फ मजाक था या कुछ और? आज इस ब्लॉग में हम इस पूरे कनेक्शन को खोलकर रख देंगे – फैक्ट्स, फिक्शन, राजनीति और वो सब जो फिल्म ने छोड़ दिया।
फिल्म धुरंधर: सच्ची घटनाओं का मसाला मिक्स
- सबसे पहले फिल्म का बैकग्राउंड समझते हैं।
- धुरंधर पाकिस्तान में ISI द्वारा चलाए जा रहे नकली भारतीय करेंसी के रैकेट पर आधारित है।
- फिल्म में दिखाया गया है कि कराची के लयारी इलाके में खनानी ब्रदर्स
- (जावेद अल्ताफ खनानी और उनके भाई) ISI की मदद से हाई-क्वालिटी
- फेक ₹500 और ₹1000 के नोट छापते हैं।
- ये नोट इतने परफेक्ट होते हैं कि RBI की सिक्योरिटी फीचर्स को चकमा दे देते हैं।
- फिल्म का हीरो, रणवीर सिंह का किरदार हमजा, इस रैकेट को उजागर करता है।
- लेकिन ट्विस्ट आता है जब IB डायरेक्टर अजय सान्याल
- (आर माधवन, जो असल में अजित डोवल का रील वर्जन लगते हैं) बताते हैं
- कि ये फेक नोट्स सिर्फ पाकिस्तान से नहीं आए – भारत के अंदर से मदद मिली।
वो क्रिटिकल सीन: एक भारतीय मंत्री (जिसका नाम नहीं लिया गया) 2008 में लंदन में एक डील साइन करता है। उसके बाद वो अपने बेटे के साथ दुबई जाता है, जहां ISI के मिडलमैन को करेंसी प्रिंटिंग प्लेट्स और सिक्योरिटी थ्रेड्स की ब्लूप्रिंट सौंप देता है। बदले में भारी भरकम रिश्वत। ये प्लेट्स पाकिस्तान पहुंचते हैं, और नोट्स भारत में घुसपैठ कर जाते हैं। फिल्म कहती है कि यही वजह थी कि 2016 की नोटबंदी जरूरी हो गई – ताकि पुराने फेक नोट्स बेकार हो जाएं।
सोशल मीडिया पर ये सीन वायरल हो गया। यूजर्स ने तुरंत जोड़ दिया – ये तो पी. चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम का रेफरेंस है! क्यों? चलिए डिटेल में देखते हैं।
Karti Chidambaram Fake Currency: चिदंबरम परिवार का ‘कनेक्शन’: फैक्ट्स जो फिल्म से मैच करते हैं
पी. चिदंबरम UPA सरकार में वित्त मंत्री थे – 2004-2008 और फिर 2012-2014 तक। उनके कार्यकाल में भारतीय करेंसी की सिक्योरिटी से जुड़ी कई डील्स हुईं। फिल्म में जो ‘लंदन डील’ का जिक्र है, वो असल में De La Rue नाम की ब्रिटिश कंपनी से जुड़ा है। De La Rue दुनिया की सबसे बड़ी करेंसी पेपर सप्लायर है, लेकिन पाकिस्तान की करेंसी भी छापती रही है।
2004 का मॉनोपॉली डील:
- चिदंबरम के आने के बाद De La Rue को भारतीय रुपए के लिए एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट मिला।
- इससे पहले कई कंपनियां थीं,
- लेकिन एक कंपनी को मॉनोपॉली दे दी गई।
2013 का एक्सटेंशन:
- 2012 में चिदंबरम फिर वित्त मंत्री बने।
- Arvind Mayaram (तब वित्त सचिव) ने De La Rue को ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद एक्सटेंशन दे दिया।
- CBI ने 2023 में Mayaram पर FIR दर्ज की –
- क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी, चीटिंग और अनड्यू फेवर का आरोप।
फेक नोट्स का बढ़ना:
- UPA दौर में फेक करेंसी जब्ती केस बढ़े।
- 2008 के मुंबई अटैक्स (26/11) के आसपास पाकिस्तान से फेक नोट्स का फ्लड आया।
- इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स कहती हैं कि हाई-क्वालिटी फेक नोट्स के लिए भारत की सिक्योरिटी फीचर्स की जानकारी लीक हुई।
Karti Chidambaram Fake Currency: अब बेटे का रोल: कार्ति चिदंबरम। कार्ति पर कई आरोप लगे – INX Media केस (मनी लॉन्ड्रिंग), Aircel-Maxis डील, और विदेशी फंडिंग। 2017 में CBI ने उन्हें गिरफ्तार किया, चिदंबरम को भी। फिल्म में ‘सन’ का जिक्र दुबई ट्रिप का है, जहां पिता-पुत्र ने प्लेट्स हैंड ओवर किए। कार्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं, जो दुबई जैसे टैक्स हेवन्स से जुड़े।
रेडिट, X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर पोस्ट्स भरे पड़े हैं: “धुरंधर ने कांग्रेस को एक्सपोज कर दिया!” “खनानी ब्रदर्स रियल हैं, चिदंबरम फैमिली भी!” एक यूट्यूब वीडियो में कहा गया – “Dhurandhar में Javed Kanani का जिक्र, जो पाकिस्तान में फेक नोट्स प्रिंट करता था।”
कार्ति चिदंबरम का रिएक्शन: कैमियो या डिफेंस?
- फिल्म रिलीज के बाद कार्ति चिदंबरम ने ANI पॉडकास्ट में बात की।
- स्मिता प्रकाश ने पूछा – “धुरंधर देखी?” कार्ति हंसकर बोले, “नहीं देखी,
- लेकिन मुझे बताया गया कि उसमें मेरा छोटा सा कैमियो है!”
- फिर गंभीर होकर कहा – “ये फैक्ट, फिक्शन और व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स का मिक्स है।
- अगर सच होता, तो सरकार के पास रिकॉर्ड होता।”
उन्होंने आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहा कि सब झूठे हैं। लेकिन ये जवाब ही विवादास्पद हो गया। लोग बोले – “कैमियो का मजाक? यही तो कन्फर्मेशन है!” कांग्रेस ने इसे BJP की साजिश बताया, लेकिन फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर ने कुछ नहीं कहा।
असली कहानी: De La Rue, CBI और नोटबंदी
फिल्म ने सिर्फ आधा सच दिखाया। असली कहानी CBI फाइल्स में छिपी है:
De La Rue का पाकिस्तान कनेक्शन:
- कंपनी पाकिस्तान की करेंसी भी प्रिंट करती है।
- 2013 में Mayaram के साइन से एक्सटेंशन मिला, जबकि कंपनी ब्लैकलिस्टेड थी।
फेक करेंसी का इकोसिस्टम:
- 2008-2014 तक फेक नोट्स की जब्ती ₹1000 करोड़ से ऊपर।
- ISI ने खनानी ब्रदर्स के जरिए भारत में घुसपैठ की।
नोटबंदी का लिंक:
- मोदी सरकार ने 2016 में नोटबंदी की, ताकि फेक नोट्स बेकार हो जाएं।
- फिल्म में ये दिखाया गया कि अंदरूनी मदद के बिना इतने परफेक्ट नोट्स नहीं बन सकते।
एक लेखक शुभ्रांशु रॉय ने लिखा – “धुरंधर ने करेंसी स्कैम का फाइन प्रिंट मिस कर दिया।” बिजनेस वर्ल्ड में पलक शाह ने कहा – “चिदंबरम-मयराम वो विलेन हैं जिन्हें फिल्म ने छोड़ दिया।”
राजनीतिक मायने: कांग्रेस पर हमला?
ये सीन सिर्फ फिल्म नहीं, राजनीतिक वार है। BJP समर्थक कहते हैं – “UPA ने राष्ट्र की सुरक्षा बेच दी।” कांग्रेस कहती है – “प्रोपगैंडा!” लेकिन फैक्ट्स चीखते हैं:
- UPA में फेक नोट्स बढ़े।
- De La Rue को फेवर।
- कार्ति के केस अभी भी कोर्ट में।
फिल्म ने नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ है। इससे पहले भी Bollywood ने राजनीति पर फिल्में बनाईं – Article 370 की तरह। लेकिन धुरंधर ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
निष्कर्ष: सिनेमा, सच्चाई और सवाल
धुरंधर ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। लेकिन वो सीन जो सबसे याद रहेगा, वो फेक करेंसी वाला। क्या कार्ति चिदंबरम का कनेक्शन सिर्फ संयोग था? या फिल्म ने वो कहानी बताई जो CBI फाइल्स में दबी पड़ी है?
भारत जैसे देश में जहां नकली नोट्स आतंकवाद को फंड करते हैं, ऐसे स्कैंडल्स को इग्नोर नहीं किया जा सकता। फिल्म ने एक सवाल छोड़ दिया – अंदर का दुश्मन बाहर के दुश्मन से ज्यादा खतरनाक क्यों?
