अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट टैरिफ
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट टैरिफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद टैरिफ घटाकर 10% किया जाएगा। व्यापार और निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद। जानें नया टैरिफ कब से लागू होगा और किसे मिलेगा सीधा फायदा।

20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति को बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ अवैध हैं। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि राष्ट्रपति को कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। यह फैसला ट्रंप की आर्थिक और विदेश नीति के लिए बड़ा setback माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर दुनिया भर से आयात पर 10% से 50% तक टैरिफ थोपे थे।
लेकिन फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने पलटवार किया और सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। यह नया टैरिफ ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत लगाया गया है। कई विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले भारत जैसे देशों पर 18% या उससे ज्यादा टैरिफ लग रहा था, लेकिन अब ज्यादातर मामलों में यह घटकर 10% रह सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA को टैरिफ लगाने के लिए अनुचित बताया।
- कोर्ट का कहना था कि यह कानून राष्ट्रीय आपातकाल में विदेशी संपत्ति को नियंत्रित करने के लिए है,
- न कि कर (टैरिफ) लगाने के लिए।
- ट्रंप ने ड्रग्स ट्रैफिकिंग और ट्रेड डेफिसिट को आपातकाल बताकर कनाडा-मेक्सिको पर 25%,
- चीन पर 10% और अन्य देशों पर 10% से ज्यादा टैरिफ लगाए थे।
कोर्ट ने माना कि राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हैं और टैक्सेशन का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है। यह फैसला separation of powers के सिद्धांत पर आधारित है। अनुमान है कि इससे अमेरिकी सरकार को 175 बिलियन डॉलर से ज्यादा रिफंड देना पड़ सकता है, क्योंकि आयातकों ने पहले ही भुगतान किया था।
ट्रंप ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जजों को “fools” कहा और कहा कि कोर्ट विदेशी ताकतों के आगे झुक गया है। लेकिन उन्होंने तुरंत नया कदम उठाया।
ट्रंप का नया 10% ग्लोबल टैरिफ: क्या बदलेगा?
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने Trade Act की धारा 122 का सहारा लिया,
- जो अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं के लिए 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देती है
- (150 दिनों के लिए)। ट्रंप ने सभी देशों से आयात पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया,
- जो मंगलवार (22 फरवरी 2026) से प्रभावी होना था।
- कई मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे आज तक, इकोनॉमिक टाइम्स हिंदी) के अनुसार,
- भारत पर पहले 18% या उससे ज्यादा टैरिफ था,
- लेकिन नए व्यवस्था में यह घटकर 10% हो सकता है।
- हालांकि, कुछ सेक्टरों में Section 232 जैसे पुराने टैरिफ बने रह सकते हैं।
- व्हाइट हाउस अधिकारियों ने संकेत दिया कि भारत जैसे देशों के लिए यह राहत भरा कदम है।
Trump का कहना है कि यह टैरिफ अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करेगा और ट्रेड डेफिसिट कम करेगा। लेकिन आलोचक इसे protectionism बताते हैं, जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा? फायदे और चुनौतियां
- भारत-अमेरिका व्यापार में टैरिफ का बड़ा रोल है।
- भारत से अमेरिका को टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी और ज्वेलरी जैसे उत्पाद निर्यात होते हैं।
- पहले उच्च टैरिफ से भारतीय निर्यातक प्रभावित हो रहे थे,
- क्योंकि लागत बढ़ जाती थी और प्रतिस्पर्धा कम होती थी।
अब 10% टैरिफ से:
- निर्यात सस्ता हो सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों को फायदा।
- अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
- भारत सरकार और उद्योग संघ राहत की बात कर रहे हैं।
लेकिन चुनौतियां भी हैं:
- यदि यह अतिरिक्त टैरिफ है, तो कुछ सेक्टरों में कुल मिलाकर ज्यादा बोझ पड़ सकता है।
- वैश्विक व्यापार युद्ध बढ़ सकता है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो।
- रुपये की वैल्यू और इन्फ्लेशन पर असर।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब ट्रेड डील्स पर फोकस करना चाहिए, जैसे कि अमेरिका के साथ नए समझौते।
कब से मिलेगा फायदा? समयसीमा और अगले कदम
नया 10% टैरिफ तुरंत प्रभावी होने की उम्मीद है, लेकिन पुराने टैरिफ रद्द होने से रिफंड प्रक्रिया शुरू होगी। आयातकों को कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में अपील करनी होगी।
भारतीय निर्यातकों के लिए फायदा कुछ हफ्तों से महीनों में दिख सकता है, जब नए शिपमेंट पर कम टैरिफ लागू होगा। सरकारें और बिजनेस दोनों इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यह अस्थायी है, लेकिन भविष्य में और बदलाव हो सकते हैं।
निष्कर्ष: वैश्विक व्यापार में नया मोड़
यह फैसला अमेरिकी लोकतंत्र की ताकत दिखाता है, जहां न्यायपालिका कार्यपालिका की जांच करती है। ट्रंप की नीति पर ब्रेक लगा, लेकिन उन्होंने वैकल्पिक रास्ता चुना। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए 10% टैरिफ राहत लेकर आया है, जो निर्यात बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन यह घटनाक्रम बताता है कि व्यापार नीतियां अब और पारदर्शी और कानूनी ढांचे में रहेंगी। भारत को इस मौके का फायदा उठाते हुए मजबूत ट्रेड स्ट्रैटेजी बनानी चाहिए।
