जम्मू-कश्मीर आतंकी साजिश
जम्मू-कश्मीर आतंकी साजिश जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम किया। सड़क किनारे रखे विस्फोटक बरामद कर समय रहते खतरा टाल दिया गया। इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज, हाई अलर्ट जारी।

#जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की सतर्कता ने एक बार फिर बड़ी तबाही को टाल दिया है। हाल ही में गंडरबल जिले में सड़क किनारे एक बैग में रखा गया इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) मिला, जिसे सुरक्षाबलों ने समय रहते निष्क्रिय कर दिया। यह घटना 21 फरवरी 2026 को हुई, जब गंडरबल के सफापोरा इलाके में गुलाब शेख मोहल्ला के पास कोहिस्तान कॉलोनी के नजदीक यह संदिग्ध बैग देखा गया। आतंकियों की मंशा साफ थी – हाईवे पर वाहनों, खासकर सुरक्षा बलों की गाड़ियों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि पहुंचाना। लेकिन भारतीय सेना, पुलिस और बम निरोधक दस्ते की त्वरित कार्रवाई से खौफनाक साजिश नाकाम हो गई। यह घटना जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही ऐसी साजिशों की एक कड़ी है, जहां आतंकी तत्व सड़कों को मौत का जाल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर आतंकी साजिश: घटना का विवरण
- सुरक्षा बलों को गश्त के दौरान सड़क किनारे एक संदिग्ध बैग दिखा।
- बैग में IED छिपाकर रखा गया था, जो रिमोट या टाइमर से सक्रिय हो सकता था।
- इलाके को तुरंत घेर लिया गया, ट्रैफिक रोक दिया गया और बम निरोधक दस्ते
- (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड) को बुलाया गया।
- विशेषज्ञों ने सावधानीपूर्वक जांच के बाद IED को एक सुरक्षित स्थान पर ले जाकर
- नियंत्रित विस्फोट से नष्ट कर दिया।
- इस कार्रवाई से किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और हाईवे पर यातायात बहाल हो गया।
यह IED आम लोगों, पर्यटकों या सुरक्षा बलों के काफिले को टारगेट करने के लिए रखा गया था। गंडरबल-बांदीपोरा रोड जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर यह साजिश रची गई थी, जहां रोजाना सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। यदि यह विस्फोट होता, तो कई निर्दोष लोगों की जान जा सकती थी और क्षेत्र में दहशत फैल जाती।
जम्मू-कश्मीर में बढ़ती IED साजिशें: आंकड़े और पैटर्न
2026 की शुरुआत से अब तक जम्मू-कश्मीर में कम से कम छह IED बरामद और निष्क्रिय किए जा चुके हैं। आतंकी संगठन, खासकर पाकिस्तान आधारित ग्रुप्स, बार-बार सड़क किनारे IED लगाकर घात लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल की कुछ प्रमुख घटनाएं:
- श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर IED मिलना और नष्ट करना।
- अन्य जिलों में भी इसी तरह की कोशिशें नाकाम।
- पिछले दो महीनों में कई ऐसी साजिशें विफल हुईं, जिनमें सुरक्षा बल मुख्य निशाना थे।
ये साजिशें दर्शाती हैं कि आतंकी तत्व अब पारंपरिक हमलों से हटकर आसान लेकिन घातक तरीके अपना रहे हैं। IED सस्ते, आसानी से बनने वाले और दूर से नियंत्रित होने वाले होते हैं, जिससे उन्हें छिपाना आसान हो जाता है।
सुरक्षा बलों की भूमिका: सतर्कता की मिसाल
- भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस,
- CRPF और अन्य एजेंसियां लगातार हाई अलर्ट पर हैं।
- गश्त, इंटेलिजेंस इनपुट और स्थानीय लोगों की मदद से ऐसी साजिशें पकड़ी जा रही हैं।
- बम निरोधक दस्ते की टीमों की ट्रेनिंग और त्वरित रिस्पॉन्स ने कई बार जानें बचाई हैं।
- इस घटना में भी उनकी professionalism ने बड़ी दुर्घटना टाली।
ये सफलताएं दिखाती हैं कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है। आर्टिकल 370 हटने के बाद से आतंकी गतिविधियां कम हुई हैं, लेकिन बचे-खुचे तत्व अब भी अस्थिरता फैलाने की कोशिश में लगे हैं।
आम जनता के लिए संदेश: सतर्क रहें, सहयोग करें
- ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए आम नागरिकों को भी सतर्क रहना चाहिए।
- यदि कोई संदिग्ध वस्तु, बैग या पैकेट दिखे,
- तो तुरंत पुलिस या सुरक्षा बलों को सूचित करें।
- “देखा तो रिपोर्ट करो” का मंत्र अपनाएं।
- स्थानीय लोगों की जानकारी अक्सर सबसे मूल्यवान होती है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन शांति बनाए रखने में जनता की भागीदारी भी जरूरी है।
निष्कर्ष: शांति की जीत जारी रहेगी
जम्मू-कश्मीर में यह एक और उदाहरण है कि कैसे सुरक्षा बलों की सजगता ने बड़ी तबाही को टाल दिया। सड़क किनारे रखे विस्फोटक से रची गई खौफनाक साजिश नाकाम होने से सैकड़ों जिंदगियां बच गईं। लेकिन यह चेतावनी भी है कि चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। मजबूत इच्छाशक्ति, बेहतर इंटेलिजेंस और जन-सहयोग से हम आतंकवाद को जड़ से खत्म कर सकते हैं।
