बांग्लादेश भारत डीजल डील
बांग्लादेश भारत डीजल डील बांग्लादेश-भारत तनाव के बीच बड़ा भरोसे का संकेत! 14 अरब टका की डील से 1.8 लाख टन डीजल भारत से खरीदेगा ढाका। सीमा विवाद के बावजूद ऊर्जा सहयोग मजबूत। क्या यह रिश्ते सुधारने की शुरुआत है? लेटेस्ट अपडेट्स यहां।

बांग्लादेश ने भारत से तनाव के बीच ही 1.8 लाख टन डीजल खरीदने का बड़ा फैसला लिया है, जिसकी कीमत लगभग 14.62 अरब बांग्लादेशी टका (लगभग 119 मिलियन डॉलर) आएगी. इस सौदे से साफ होता है कि राजनीतिक तनाव के बावजूद बांग्लादेश भारत पर ऊर्जा की जरूरतों के लिए भरोसा कर रहा है और आर्थिक जरूरतें राजनीतिक मुद्दों से ऊपर हैं.
डीजल डील की मुख्य बातें
- बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने जनवरी से दिसंबर 2026 के बीच भारत,
- की सरकारी तेल कंपनी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL)
- से 1.8 लाख टन डीजल आयात करने का फैसला किया है.
- यह डील बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के जरिए हो रही है,
- जो देश की सरकारी तेल एजेंसी है.
इस डीजल की कुल लागत 119.13 मिलियन अमेरिकी डॉलर या लगभग 14.62 अरब बांग्लादेशी टका तय की गई है. यह कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तय हुई है, जिसमें बेस कीमत के ऊपर प्रीमियम भी जोड़ा गया है.
बांग्लादेश भारत डीजल डील: भुगतान कैसे होगा?
बांग्लादेश की सरकारी खरीद सलाहकार समिति की बैठक में तय हुआ कि इस डीजल आयात का भुगतान दो तरीके से होगा. बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) अपने बजट से इसमें से कुछ हिस्सा खर्च करेगी.
बाकी की राशि बैंकों से लोन लेकर जुटाई जाएगी, ताकि देश की तुरंत की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकें. इस तरह बांग्लादेश अपने बजट पर भारी दबाव बनने से बचने की कोशिश कर रहा है.
यह डील क्यों खास है?
- भारत और बांग्लादेश के बीच इन दिनों सीमा विवाद,
- अल्पसंख्यकों पर हमले और कुछ राजनीतिक मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है.
- ऐसे में बांग्लादेश द्वारा भारत से इतनी बड़ी मात्रा में डीजल खरीदना एक बड़ा संकेत है.
- यह दिखाता है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भारत के साथ,
- आर्थिक और ऊर्जा संबंधों को जारी रखना चाहती है,
- भले ही राजनीतिक स्तर पर कुछ तनाव हो.
- विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक जरूरतें राजनीतिक तनावों से ऊपर हैं,
- इसीलिए ऐसे समझौते बरकरार रहते हैं.
भारत से डीजल आयात का इतिहास
बांग्लादेश भारत से डीजल आयात करने का यह नया फैसला पिछले सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षरित 15 साल के दीर्घकालिक समझौते के तहत लिया गया है. इस समझौते के तहत बांग्लादेश भारत से लगातार डीजल खरीद रहा है.
पहले डीजल रेलवे वैगनों के जरिए आयात किया जाता था, लेकिन अब भारत–बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के जरिए भी तेल और डीजल की आपूर्ति बढ़ी है. इस पाइपलाइन ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है.
बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतें
- बांग्लादेश की सालाना डीजल की मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है,
- क्योंकि देश की अपनी रिफाइनरी क्षमता सीमित है.
- इसी वजह से बांग्लादेश के लिए भारत एक विश्वसनीय और सस्ता डीजल स्रोत बना हुआ है.
इस नई डील से बांग्लादेश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी और देश में डीजल की कमी या ब्लैकमार्केटिंग का खतरा कम होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के साथ ऊर्जा सहयोग बांग्लादेश की आर्थिक स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है.
चावल के बाद डीजल पर भी भरोसा
- इससे पहले बांग्लादेश ने भारत से 50,000 टन चावल खरीदने का फैसला किया था,
- जिसे भारतीय चावल के सस्ते दामों के चलते आर्थिक रूप से समझदारी बताया गया था.
- अब डीजल की यह बड़ी डील दिखाती है कि बांग्लादेश भारत पर न केवल खाद्यान्न,
- बल्कि ऊर्जा की जरूरतों के लिए भी भरोसा कर रहा है.
बांग्लादेश के वित्त सलाहकार सलेहुद्दीन अहमद ने खुद कहा है कि भारत के साथ आर्थिक संबंधों को अलग रखकर देखा जाता है और भारत के साथ आर्थिक संबंध बेहतर बनाने पर काम चल रहा है. इस डीजल डील से यह संकेत मजबूत होता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक जुड़ाव राजनीतिक तनाव के बावजूद जारी रहेगा.
