कांग्रेस सांसद पत्र
कांग्रेस सांसद पत्र कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। निष्पक्षता की मांग, प्रियंका गांधी समेत सांसदों का गंभीर पत्र।

भारतीय संसद में राजनीतिक घमासान कोई नई बात नहीं है, लेकिन फरवरी 2026 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर कांग्रेस की महिला सांसदों द्वारा लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस की महिला सांसदों ने स्पीकर पर आरोप लगाया कि वे भाजपा के दबाव में काम कर रहे हैं और संसद की निष्पक्षता को ताक पर रख दिया है। यह विवाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति से जुड़ा है, जहां विपक्षी महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
कांग्रेस सांसद पत्र: पृष्ठभूमि
संसद का शीतकालीन सत्र 2026 में शुरू से ही हंगामेदार रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा, जैसे महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं। 4 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी को इस चर्चा पर जवाब देना था, लेकिन लोकसभा में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की महिला सांसदों ने पीएम की सीट के सामने बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इससे सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई और पीएम का भाषण टल गया।
- स्पीकर ओम बिरला ने इस घटना पर बयान जारी किया,
- जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें “कांग्रेस सदस्यों द्वारा अप्रत्याशित कृत्य” की जानकारी थी,
- जिसके चलते उन्होंने पीएम को सदन में न आने की सलाह दी।
- बिरला ने इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि
- इससे देश की संसदीय परंपराओं को ठेस पहुंची।
- लेकिन कांग्रेस ने इसे स्पीकर की पक्षपातपूर्णता का प्रमाण माना।
- महिला सांसदों ने आरोप लगाया कि स्पीकर भाजपा के दबाव में काम कर रहे हैं,
- और उनके बयान “झूठे, आधारहीन और अपमानजनक” हैं।
क्या हुआ था घटना के दिन?
4 फरवरी को लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। पीएम मोदी के जवाब देने से ठीक पहले कांग्रेस की महिला सांसदों, जिसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, सोनिया गांधी और अन्य शामिल थीं, ने पीएम की सीट के सामने बैनर लेकर नारे लगाए। बैनरों पर “पीएम की अनुपस्थिति” और “विपक्ष की आवाज दबाई जा रही” जैसे संदेश थे। स्पीकर ने इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताया और कार्यवाही स्थगित कर दी।
बाद में स्पीकर ने मीडिया को बताया कि उन्हें “कांग्रेस सदस्यों द्वारा पीएम की सीट पर पहुंचकर अप्रत्याशित कार्य” की सूचना थी, जो लोकतंत्र को कलंकित कर सकती थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि स्पीकर ने पीएम को सुरक्षा कारणों से सदन न आने की सलाह दी। लेकिन कांग्रेस ने इसे स्पीकर की मिलीभगत बताया। प्रियंका गांधी ने कहा, “स्पीकर पर इतना दबाव है कि वे सही-गलत की परवाह नहीं कर रहे। यह गलत है।”
कांग्रेस महिला सांसदों के आरोप
- कांग्रेस की लोकसभा महिला सांसदों ने 5 फरवरी को स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा,
- जिसमें उन्होंने स्पीकर के बयान को “झूठा और अपमानजनक” करार दिया।
- पत्र में कहा गया कि स्पीकर सत्ताधारी दल के दबाव में पीएम की अनुपस्थिति को
- जस्टिफाई करने के लिए महिला सांसदों पर आधारहीन आरोप लगा रहे हैं।
- उन्होंने स्पीकर से पूछा कि “
- नियम 20 के तहत पीएम को सदन में अपनी अनुपस्थिति की सूचना क्यों नहीं दी गई?”
- और “कौन से नियम के तहत स्पीकर ने पीएम को सदन से दूर रहने की सलाह दी?”
महिला सांसदों ने स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्पीकर का पद संवैधानिक है और इसे राजनीतिक दबाव से मुक्त रहना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है, और स्पीकर विपक्षी सदस्यों के भाषणों को सीमित कर रहे हैं। कुछ सांसदों ने तो यहां तक कहा कि स्पीकर “भाजपा नेता की तरह व्यवहार” कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी स्पीकर को पत्र लिखकर नियमों के उल्लंघन की शिकायत की।
भाजपा का जवाब और काउंटर आरोप
कांग्रेस सांसद पत्र: भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष संसद की गरिमा को गिरा रहा है।भाजपा की महिला सांसदों ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने सदन में महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार किया। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलजे ने कहा कि राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी के भाषण के दौरान अनुचित इशारे किए, जो महिलाओं का अपमान है। भाजपा महिलाओं ने स्पीकर से इसकी शिकायत की और कार्रवाई की मांग की।
- पीएम मोदी ने बाद में राज्यसभा में बोलते हुए इस घटना को
- “दर्दनाक” बताया और कहा कि यह राष्ट्रपति,
- संविधान और महिलाओं का अपमान है।
- उन्होंने विपक्ष पर संसद को बाधित करने का आरोप लगाया।
- स्पीकर बिरला ने भी अपने बयान में कहा कि वे सदन की सुरक्षा और गरिमा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राजनीतिक निहितार्थ
यह विवाद सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि भारतीय संसद की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर का पद अब निष्पक्ष नहीं रहा, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। विपक्षी दल अब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं, जो अनुच्छेद 94-सी के तहत संभव है। अगर ऐसा हुआ, तो यह संसदीय इतिहास में दुर्लभ घटना होगी।
- दूसरी तरफ, भाजपा इसे विपक्ष की हताशा बताती है।
- लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद संसद की उत्पादकता को प्रभावित करते हैं।
- 2026 के सत्र में पहले ही कई विधेयक लंबित हैं,
- और यह हंगामा उन्हें और पीछे धकेल सकता है।
- सोशल मीडिया पर भी #SpeakerBias और #SaveParliament जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं,
- जो जनता की रुचि दिखाते हैं।
निष्कर्ष
ओम बिरला पर लगे आरोप संसद की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हैं। कांग्रेस महिला सांसदों का हमला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का प्रयास है। लेकिन भाजपा के काउंटर आरोपों से साफ है कि यह विवाद जल्द थमने वाला नहीं। जरूरत है कि स्पीकर और सभी दल संसद की गरिमा बनाए रखें, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो। क्या स्पीकर इन आरोपों का जवाब देंगे या विवाद बढ़ेगा? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल यह भारतीय राजनीति का गर्म मुद्दा बना हुआ है।
