दिग्विजय सिंह बयान
दिग्विजय सिंह बयान कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ कर सबको चौंका दिया। बोले—‘यह संगठन की असली ताकत है, जय सिया राम!’ जानिए दिग्विजय के इस बयान पर क्या बोले अन्य नेता और इसका राजनीतिक असर।

भारतीय राजनीति में जब भी किसी विपक्षी नेता द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की जाती है, तो यह सुर्खियों में आ जाता है। हाल ही में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक ऐसा ही बयान देकर सियासी हलचल मचा दी। अपने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संगठनात्मक क्षमता की खुलकर सराहना की। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने अपने संबोधन का अंत “जय सिया राम” के नारों के साथ किया।
दिग्विजय सिंह बयान : राजनीतिक बयान जिसने बढ़ाई हलचल
#दिग्विजय सिंह का यह बयान उनके राजनीतिक सफर में अनोखा माना जा रहा है। वे अब तक भाजपा और आरएसएस के मुखर विरोधी माने जाते रहे हैं। ऐसे में जब उन्होंने पीएम मोदी की संगठनात्मक क्षमता और मेहनत की तारीफ की, तो कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे एक नई दिशा में बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना।
दिग्विजय सिंह ने कहा,
“नरेंद्र मोदी की सफलता का रहस्य केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत या भाषण की ताकत नहीं है, बल्कि भाजपा के संगठन की मजबूती है। यह ‘टीम वर्क’ का नतीजा है कि वे आज यहां तक पहुंचे हैं।”
उनके इस बयान में न तो तंज था और न विरोध – बल्कि एक तरह का स्वीकार था कि भाजपा ने पिछले दशक में देशभर में बहुत मजबूत संगठन खड़ा किया है।
‘जय सिया राम’ का सियासी संदर्भ
- और फिर आया वह पल जिसने सबको अचंभित कर दिया —
- दिग्विजय सिंह ने अपने वक्तव्य के अंत में कहा, “जय सिया राम!”
- यह नारा आमतौर पर भाजपा और हिंदू संगठनों से जुड़ा हुआ माना जाता है।
- इसलिए कांग्रेस नेता के मुंह से यह सुनना विपक्षी खेमे में हलचल मचाने के लिए काफी था।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान संभवतः धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों की राजनीतिक महत्वता को स्वीकार करने का प्रयास है। वहीं कुछ कांग्रेस समर्थक नेताओं ने इसे “व्यक्तिगत भावनाओं की अभिव्यक्ति” बताया, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे “राजनीतिक यथार्थ को मान लेने की मजबूरी” करार दिया।
कांग्रेस के भीतर प्रतिक्रिया
- कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
- कुछ नेताओं ने कहा कि संगठन और विरोधी की ताकत को स्वीकार करना गलत नहीं है,
- जबकि कुछ का मानना है कि भाजपा की विचारधारा की प्रशंसा करना कांग्रेस की मूल विचारधारा से मेल नहीं खाता।
- दिग्विजय सिंह का राजनीतिक करियर हमेशा विवादों से घिरा रहा है।
- चाहे 2008 के मुंबई आतंकी हमलों पर दिए उनके बयान हों या
- “सांप्रदायिक ताकतों” पर उनके निरंतर हमले —
- वे हमेशा सुर्खियों में रहे हैं।
- लेकिन इस बार उनकी टिप्पणी में शिकायत या आरोप का स्वर नहीं था, बल्कि एक स्वीकारोक्ति थी।
भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया
- भाजपा नेताओँ ने दिग्विजय सिंह के इस बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया दी।
- कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आखिरकार कांग्रेस नेता को भी
- “संगठन की ताकत” का महत्व समझ में आया।
- कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें “राजनीतिक यथार्थ” देखने के लिए बधाई तक दे डाली।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 2024 के बाद की भारतीय राजनीति में अब विपक्षी दलों को भाजपा जैसे मजबूत संगठन के सामने अपनी रणनीति दोबारा तय करनी होगी। शायद यही कारण है कि दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी राजनेता भी यह मानने लगे हैं कि भाजपा की सफलता का असली आधार उसका अनुशासित और जमीनी संगठन तंत्र है।
राजनीति में बदलता विमर्श
- यह बयान केवल एक व्यक्ति की राय नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के बदलते विमर्श का संकेत भी माना जा रहा है।
- आज के दौर में धार्मिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक पहचान एक साथ राजनीति को प्रभावित कर रही हैं।
- ऐसे में विपक्षी नेताओं के लिए भी यह आवश्यक हो गया है कि वे इन तत्वों को पूरी तरह नकारकर राजनीति में टिक नहीं सकते।
निष्कर्ष
- दिग्विजय सिंह का पीएम मोदी की तारीफ वाला यह बयान आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहेगा।
- यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति में अब विरोध के पारंपरिक स्वरूप बदल रहे हैं।
- जहाँ पहले हर बात पर आलोचना होती थी, अब कुछ नेता विपक्ष की ताकत को भी स्वीकार करने लगे हैं।
“जय सिया राम” कहकर दिग्विजय सिंह ने शायद यह संकेत दिया है कि राजनीति में अब सांस्कृतिक भावनाओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
