CJI सूर्यकांत PIL फटकार
CJI सूर्यकांत PIL फटकार सूर्यकांत ने एक जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी निराधार PIL से न्यायपालिका का समय बर्बाद होता है और व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

भारत की न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ और PIL के दुरुपयोग पर CJI सूर्यकांत की तीखी टिप्पणी ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने याचिका देखते ही गुस्से में कहा, “भगवान बचाए इस याचिका को!” और स्पष्ट रूप से इसे सुनने से इनकार कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि “ऐसे PIL से न्यायपालिका डूब जाएगी!” यह घटना न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक बोझ और फर्जी या कमजोर याचिकाओं के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता को दर्शाती है।
CJI सूर्यकांत PIL फटकार: घटना का संक्षिप्त विवरण
यह घटना सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच के समक्ष हुई, जहां CJI सूर्यकांत जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ सुनवाई कर रहे थे। याचिका का विषय ऐसा था कि जैसे ही इसे पढ़ा गया, CJI ने तुरंत अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न केवल समय की बर्बादी हैं, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और कार्यक्षमता पर भी गहरा असर डाल रही हैं। CJI ने जोर देकर कहा कि PIL का मूल उद्देश्य सार्वजनिक हित की रक्षा करना है, न कि व्यक्तिगत या राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना। ऐसी याचिकाओं से अदालत का बहुमूल्य समय व्यर्थ होता है, जिसका असर असली जरूरतमंद मामलों पर पड़ता है।
PIL क्या है और इसका महत्व
पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) 1980 के दशक में भारत में शुरू हुआ एक क्रांतिकारी कदम था। जस्टिस पी.एन. भगवती और जस्टिस वी.आर. कृष्णा अय्यर जैसे न्यायाधीशों ने इसे लोकतंत्र की मजबूती के लिए विकसित किया। PIL के जरिए कोई भी व्यक्ति या संगठन सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर अदालत जा सकता है, भले ही वह खुद पीड़ित न हो। इससे पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और महिलाओं-बच्चों के अधिकार जैसे कई बड़े बदलाव आए।
- लेकिन आज स्थिति बदल गई है। कई लोग PIL को प्रचार,
- राजनीतिक लाभ या व्यक्तिगत दुश्मनी के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
- फर्जी तथ्य, बिना आधार की मांगें और AI से तैयार की गई गलत याचिकाएं आम हो गई हैं।
- CJI सूर्यकांत ने पहले भी कई बार AI के दुरुपयोग पर चिंता जताई है,
- जहां वकील बिना जांच के AI टूल्स से याचिकाएं तैयार कर रहे हैं,
- जिनमें काल्पनिक फैसले या गलत जानकारी शामिल होती है।
न्यायपालिका पर बढ़ता बोझ: आंकड़े और हकीकत
- सुप्रीम कोर्ट में लाखों मामले लंबित हैं।
- 2026 की शुरुआत में ही पेंडिंग मामलों की संख्या चिंताजनक स्तर पर है।
- PIL की संख्या में अचानक उछाल आया है,
- खासकर चुनावों या विवादास्पद मुद्दों के समय।
- CJI ने कहा है कि कुछ वकील और याचिकाकर्ता अदालत को प्रचार का मंच बना रहे हैं।
- इससे असली पीड़ितों के मामले पीछे छूट जाते हैं।
CJI सूर्यकांत ने कई मौकों पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने एक याचिका को ‘पब्लिसिटी-सीकिंग’ बताते हुए खारिज किया और कहा कि सुधार के लिए पत्र लिखें, PIL दाखिल न करें। जनवरी 2026 से उन्होंने अनंत सुनवाई पर रोक लगाने और समयबद्ध तर्क देने के नियम लागू करने की बात कही है। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
CJI की टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण?
- “भगवान बचाए इस याचिका को!” जैसी टिप्पणी सिर्फ गुस्सा नहीं,
- बल्कि एक सिस्टमिक समस्या की ओर इशारा है।
- CJI ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसे PIL जारी रहे तो न्यायपालिका की विश्वसनीयता और क्षमता पर सवाल उठेंगे।
- अदालत का समय सीमित है, और हर याचिका को सुनना संभव नहीं।
- इसलिए फर्जी या तुच्छ PIL पर सख्ती जरूरी है।
यह भी याद रखना चाहिए कि PIL को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह आम आदमी की आवाज है। लेकिन दुरुपयोग रोकने के लिए दिशानिर्देश मजबूत करने होंगे। याचिकाकर्ताओं को सत्यापन, साक्ष्य और गंभीरता का पालन करना होगा।
निष्कर्ष
- CJI सूर्यकांत की यह फटकार एक चेतावनी है –
- न्यायपालिका को बचाना है तो PIL के दुरुपयोग को रोकना होगा।
- अदालतें लोकतंत्र की चौकीदार हैं,
- इन्हें राजनीति या प्रचार का अड्डा नहीं बनने देना चाहिए।
- यदि हम चाहते हैं कि न्याय समय पर और निष्पक्ष मिले, तो हमें जिम्मेदार PIL संस्कृति अपनानी होगी।
भगवान न करे, लेकिन यदि ऐसे PIL बढ़ते रहे तो सच में न्यायपालिका डूबने का खतरा मंडरा सकता है। CJI की बातों पर गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है। आइए, हम सब मिलकर एक मजबूत और स्वस्थ न्याय व्यवस्था की रक्षा करें।
