कोर्ट में चाकू हंगामा
कोर्ट में चाकू हंगामा कोर्ट परिसर में उस वक्त सनसनी फैल गई जब एक महिला ने जज के सामने चाकू निकालकर वकील को धमकी दी। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे और न्यायिक परिसर में हड़कंप मच गया।

भारतीय न्याय व्यवस्था को सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन हाल ही में वाराणसी की एक अदालत में हुई घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। जहां न्याय की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चलनी चाहिए, वहां जज के सामने ही एक महिला ने बैग से चाकू निकाल लिया और महिला वकील को खुलेआम जान से मारने की धमकी दे डाली। यह घटना न केवल कोर्ट रूम में अफरा-तफरी मचा गई, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर गई कि क्या अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है? यह घटना 19 फरवरी 2026 को वाराणसी के एसीजेएम षष्ठम कोर्ट में हुई, जहां मिर्जामुराद की रहने वाली एक महिला अपने मारपीट के मामले में पैरवी के लिए आई थी।
घटना का पूरा विवरण: क्या हुआ कोर्ट रूम में?
वाराणसी कचहरी परिसर स्थित एसीजेएम षष्ठम कोर्ट में गुरुवार को सामान्य सुनवाई चल रही थी। महिला पक्षकार (पीड़िता) अपने मामले की पैरवी के लिए महिला अधिवक्ता के साथ बहस में शामिल हुई। बहस के दौरान बातें बढ़ गईं और अचानक महिला ने अपने बैग से चाकू निकाल लिया। उसने जज की मौजूदगी में ही महिला वकील पर चाकू तानते हुए धमकी दी कि “तुम्हें मार डालूंगी”।
- कोर्ट रूम में मौजूद लोग स्तब्ध रह गए।
- चाकू देखते ही हंगामा मच गया, लोग चीखने-चिल्लाने लगे।
- जज ने तुरंत स्थिति संभालने की कोशिश की,
- लेकिन महिला उग्र हो चुकी थी।
- कोर्ट स्टाफ और सुरक्षा गार्ड्स ने मिलकर उसे काबू किया और चाकू छीन लिया।
- महिला को गिरफ्तार कर लिया गया,
- जबकि कोर्ट रूम में खलबली मच गई।
- पूरी घटना कुछ ही सेकंडों में हुई,
- लेकिन इसका असर लंबे समय तक रहा।
यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह जज के सामने हुई, जहां न्यायाधीश की उपस्थिति में कोई भी हथियारबंद होना या धमकी देना अदालत की गरिमा का अपमान है।
कोर्ट में चाकू हंगामा: कारण क्या थे? विवाद की जड़ें
- जानकारी के अनुसार, महिला मारपीट के एक पुराने मामले में शामिल थी।
- मामले में महिला वकील उसकी पैरवी कर रही थीं,
- लेकिन सुनवाई के दौरान पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।
- महिला को लगा कि वकील उसके पक्ष में ठीक से नहीं बोल रही हैं या मामले को लंबा खींच रही हैं।
- गुस्से में आकर उसने चाकू निकाल लिया।
ऐसे मामलों में अक्सर भावनाएं भड़क जाती हैं, खासकर जब पारिवारिक या व्यक्तिगत विवाद अदालत तक पहुंचते हैं। लेकिन कोर्ट रूम में हथियार लेकर पहुंचना और जज के सामने धमकी देना किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। यह घटना बताती है कि कैसे छोटे-छोटे विवाद बड़े हादसे का रूप ले सकते हैं।
कोर्ट और पुलिस की प्रतिक्रिया: त्वरित कार्रवाई
- घटना के तुरंत बाद कोर्ट अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी।
- महिला को गिरफ्तार कर लिया गया और उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 506 (आपराधिक धमकी),
- 307 (हत्या का प्रयास) और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
- कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है कि महिला चाकू कैसे लेकर कोर्ट परिसर में घुसी, क्योंकि कोर्ट में सिक्योरिटी चेकपॉइंट होते हैं। इस घटना ने अदालतों में प्रवेश पर और सख्ती की मांग को बल दिया है।
अदालतों में बढ़ती असुरक्षा: एक गंभीर चिंता
- यह पहली बार नहीं है जब कोर्ट में हिंसा या धमकी की घटना हुई हो।
- पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में वकीलों, जजों या पक्षकारों पर हमले हुए हैं।
- चाहे वह दिल्ली में जज को धमकी हो या ओडिशा में महिला जज पर चाकू से हमला,
- ये घटनाएं न्याय व्यवस्था की नींव को हिला रही हैं।
वकील समुदाय और न्यायिक अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट परिसर में सीसीटीवी, मेटल डिटेक्टर और अधिक सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि कई मामले भावनात्मक होते हैं और हिंसा का खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष: न्याय की गरिमा बनाए रखने की जरूरत
- वाराणसी कोर्ट की यह घटना एक चेतावनी है कि अदालतें सिर्फ कानून की जगह नहीं,
- बल्कि समाज की आखिरी उम्मीद हैं।
- यहां कोई भी हिंसा या धमकी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
- सरकार, न्यायपालिका और पुलिस को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
अंत में, उम्मीद है कि कानून की ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और अदालतें शांतिपूर्ण ढंग से न्याय प्रदान करती रहें। समाज को भी समझना होगा कि विवादों का समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि कानून के रास्ते से ही संभव है।
