भारत खाड़ी मास्टरस्ट्रोक
भारत खाड़ी मास्टरस्ट्रोक पाकिस्तान-सऊदी डिफेंस डील के बावजूद भारत ने खाड़ी देशों से मजबूत व्यापारिक और रणनीतिक संबंध बनाए। UAE-भारत डील से पाक को झटका, जानिए भारत का मास्टरस्ट्रोक।

हाल के वर्षों में खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव आया है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सितंबर 2025 में हुए स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) ने सबका ध्यान खींचा। इस समझौते में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले को अपना हमला मानकर रक्षा सहयोग का वादा किया। यह डील पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी और सऊदी अरब की क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं से जुड़ी है। कई विश्लेषकों ने इसे भारत के लिए चुनौती माना, क्योंकि सऊदी अरब भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। लेकिन ठीक इसी समय भारत ने एक मास्टरस्ट्रोक खेला। फरवरी 2026 में भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता दोबारा शुरू करने का ऐलान किया। यह कदम भारत की ट्रेड डिप्लोमेसी की मजबूती को दर्शाता है।
पाक-सऊदी डील का बैकग्राउंड
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा संबंध पुराने हैं। 2025 का समझौता इसे औपचारिक रूप देता है। इसमें सऊदी अरब की वित्तीय मदद और पाकिस्तान की सैन्य क्षमता (परमाणु सहित) का आदान-प्रदान शामिल है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है, और सऊदी से मिले ऋणों का बोझ बढ़ रहा है। दूसरी ओर, सऊदी अरब क्षेत्रीय खतरों (जैसे ईरान) से निपटने के लिए नए साझेदार तलाश रहा है। इस डील ने भारत-पाकिस्तान संतुलन को प्रभावित करने की आशंका जताई। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान को मजबूत कर सकता है, लेकिन भारत ने इसे आर्थिक स्तर पर काउंटर किया।
भारत का मास्टरस्ट्रोक: GCC के साथ FTA वार्ता की शुरुआत
भारत ने GCC (सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, ओमान, बहरीन) के साथ FTA वार्ता के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे एक मजबूत व्यापारिक व्यवस्था बताया। GCC का संयुक्त GDP 2.3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है, और विदेशी मुद्रा भंडार 748 अरब डॉलर (2023 के आंकड़े) है। 2024-25 में भारत-GCC व्यापार 178-179 अरब डॉलर पहुंच गया, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 15% से अधिक है।
यह कदम इसलिए मास्टरस्ट्रोक है क्योंकि:
- पाकिस्तान की डिफेंस डील को आर्थिक पैक्ट से काउंटर किया।
- GCC देशों में भारत पहले से मजबूत है (UAE के साथ CEPA 2022 में, ओमान के साथ हाल ही में)।
- वार्ता दोबारा शुरू होने से टैरिफ कम होंगे, निवेश बढ़ेगा, और माल-सेवाओं का प्रवाह आसान होगा।
भारत खाड़ी मास्टरस्ट्रोक: खाड़ी देशों से भारत की मजबूत व्यापारिक दोस्ती
भारत की खाड़ी देशों से दोस्ती ऊर्जा, निवेश और प्रवासी भारतीयों पर टिकी है।
- UAE भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- 2022 के CEPA से व्यापार 60 अरब डॉलर से बढ़कर 200 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर है।
- सऊदी अरब से तेल आयात प्रमुख है, और निवेश बढ़ रहा है।
- कतर से LNG आयात महत्वपूर्ण है।
- कुल मिलाकर, खाड़ी देश भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और निर्यात बाजार हैं।
GCC FTA से भारतीय निर्यात (रत्न, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन) को बढ़ावा मिलेगा। गैर-टैरिफ बैरियर हटने से निवेश आएगा, रोजगार बढ़ेगा। यह भारत की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेगा।
आर्थिक और सामरिक प्रभाव
- यह डील भारत की ट्रेड डिप्लोमेसी की सफलता है।
- जबकि पाकिस्तान डिफेंस पर फोकस कर रहा है,
- भारत आर्थिक शक्ति बढ़ा रहा है।
- GCC के साथ मजबूत संबंध से क्षेत्रीय संतुलन भारत के पक्ष में झुक सकता है।
- IMEC (इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर) जैसे प्रोजेक्ट्स को फायदा होगा।
- भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत खाड़ी देशों को आकर्षित करती है,
- जहां लाखों भारतीय काम करते हैं।
निष्कर्ष
पाक-सऊदी डिफेंस डील के बीच भारत ने आर्थिक मास्टरस्ट्रोक से जवाब दिया। GCC FTA वार्ता की शुरुआत से खाड़ी देशों से मजबूत व्यापारिक दोस्ती और गहरी होगी। यह दिखाता है कि भारत युद्ध या टकराव नहीं, बल्कि व्यापार और विकास से क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ा रहा है। भविष्य में यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को नई ऊंचाई देगा। भारत की यह रणनीति न केवल पाकिस्तान की महत्वाकांक्षाओं को काउंटर करती है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देती है।
