AAP Gujarat Leader Resigns
AAP Gujarat Leader Resigns गुजरात में AAP को बड़ा झटका! किसान मोर्चा प्रमुख राजू कर्पदा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। केजरीवाल को लिखे पत्र में व्यक्तिगत कारण बताए, BJP जॉइन की अटकलें तेज।

गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के किसान विंग के प्रदेश अध्यक्ष और प्रमुख किसान नेता राजूभाई करपड़ा (रजू करपड़ा) ने 11 फरवरी 2026 को अचानक पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को अपना इस्तीफा पत्र भेजा, जिसमें सभी पदों और जिम्मेदारियों से इस्तीफा देने की घोषणा की गई। यह घटना ऐसे समय हुई है जब AAP गुजरात में किसानों के मुद्दों पर जोर-शोर से सक्रिय थी और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही थी। राजू करपड़ा का इस्तीफा पार्टी के लिए सौराष्ट्र क्षेत्र में खासा नुकसानदायक साबित हो सकता है, जहां उनकी मजबूत पकड़ थी।
AAP Gujarat Leader Resigns: कौन हैं राजू करपड़ा?
राजू करपड़ा गुजरात में AAP के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक थे। वे किसान मोर्चा (किसान सेल) के प्रदेश अध्यक्ष थे और बॉटाद जिले के हद्दद-हद्दार क्षेत्र में किसानों के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पिछले साल अक्टूबर में कपास के उचित मूल्य की मांग को लेकर हुए किसान विरोध प्रदर्शन में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। वे करीब 100 दिनों से अधिक समय जेल में रहे। हाल ही में ही उन्हें और अन्य AAP नेताओं को जमानत मिली थी। जेल से बाहर आने के महज 10-12 दिनों बाद ही उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
करपड़ा सुरेंद्रनगर जिले के मूल्ली तालुका से आते हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में छोटीला सीट से AAP के टिकट पर चुनाव लड़ा था। किसानों के बीच उनकी अच्छी पहचान थी और वे पार्टी के ग्रामीण विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। उनकी अगुवाई में AAP ने गुजरात के किसान समुदाय में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की थी, खासकर सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र में।
इस्तीफे के पीछे क्या कारण?
- AAP Gujarat Leader Resigns राजू करपड़ा ने अपने इस्तीफा पत्र में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है।
- उन्होंने लिखा कि अब वे अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों को निभाना संभव नहीं समझते।
- सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, “जय किसान साथी… दोस्तों,
- आज मैंने आम आदमी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
- मेरा फैसला बहुतों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है।
- मैंने अपने परिवार के साथ पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी प्राथमिकता और समय दिया।
- लेकिन नियति ने यहीं तक मेरा समर्थन लिखा था।
- यदि मैंने जाने-अनजाने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाया हो तो मैं माफी मांगता हूं।”
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस्तीफे के पीछे आंतरिक कलह और असंतोष है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वे गुजरात AAP के राज्य प्रमुख गोपाल इटालिया से काफी समय से नाराज चल रहे थे। जेल के दौरान पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें पर्याप्त समर्थन न मिलने का आरोप भी लगाया जा रहा है। कुछ सूत्रों ने यहां तक कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकते हैं, हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
AAP पर क्या असर पड़ेगा?
यह इस्तीफा AAP के लिए कई मायनों में बड़ा झटका है:
किसान आधार पर असर:
AAP गुजरात में किसानों के मुद्दों (जैसे कपास का MSP, कर्ज माफी, सिंचाई आदि) को लेकर BJP पर हमलावर थी। करपड़ा जैसे चेहरे के जाने से पार्टी का किसान विंग कमजोर हो सकता है।
सौराष्ट्र में नुकसान:
सौराष्ट्र क्षेत्र में AAP की बढ़ती मौजूदगी को करपड़ा की सक्रियता का श्रेय दिया जाता था। उनका जाना वहां पार्टी के विस्तार पर ब्रेक लगा सकता है।
2027 चुनाव की तैयारी:
- गुजरात में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
- AAP पहले ही पंजाब और दिल्ली में सत्ता संभाल चुकी है
- और गुजरात में “BJP को उखाड़ फेंकने” का दावा कर रही थी।
- लेकिन ऐसे बड़े नेताओं के जाने से पार्टी की रणनीति प्रभावित हो सकती है।
आंतरिक कलह की छवि:
हाल के महीनों में AAP के कई राज्यों में आंतरिक मतभेद सामने आए हैं। गुजरात में भी गोपाल इटालिया के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।
AAP और केजरीवाल की प्रतिक्रिया
- अभी तक अरविंद केजरीवाल या गुजरात AAP नेतृत्व की ओर से
- इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
- पार्टी के कुछ स्थानीय नेता इसे “व्यक्तिगत फैसला”
- बताकर कम महत्वपूर्ण दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
- लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पार्टी के लिए चिंता का विषय है,
- क्योंकि किसान मुद्दा AAP की राष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निष्कर्ष
राजू करपड़ा का इस्तीफा सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि गुजरात में AAP की किसान आधारित राजनीति पर सवालिया निशान है। अगर वे BJP में शामिल होते हैं, तो यह AAP के लिए और बड़ा झटका होगा। दूसरी ओर, अगर वे निष्क्रिय रहते हैं, तो भी पार्टी को सौराष्ट्र में नुकसान उठाना पड़ेगा। आने वाले दिनों में देखना होगा कि AAP इस झटके से कैसे उबरती है और क्या कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर होता है। फिलहाल, अरविंद केजरीवाल के गुजरात में “बदलाव” के सपने को एक तगड़ा झटका जरूर लगा है।
