UP पैन रजिस्ट्री नियम
UP पैन रजिस्ट्री नियम योगी सरकार ने UP में संपत्ति रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया। आधार के साथ अब पैन वेरिफिकेशन जरूरी, वित्तीय अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का बड़ा कदम।

उत्तर प्रदेश में जमीन, मकान या किसी भी अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त अब पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और सख्त हो गई है। योगी सरकार ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत संपत्ति रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड (PAN Card) को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। अब बिना पैन कार्ड के कोई भी रजिस्ट्री प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यह नियम विशेष रूप से नेपाल सीमावर्ती जिलों में लागू किया गया है, लेकिन पूरे प्रदेश में इसका असर दिख रहा है। साथ ही, फॉर्म 60 का विकल्प भी खत्म कर दिया गया है, जो पहले उन लोगों के लिए उपलब्ध था जिनके पास पैन नहीं होता था।
योगी सरकार का यह फैसला क्यों लिया गया?
योगी आदित्यनाथ सरकार का मुख्य उद्देश्य है—भू-माफिया, फर्जी रजिस्ट्री, बेनामी संपत्ति और काले धन के लेन-देन पर लगाम कसना। उत्तर प्रदेश में पिछले कई वर्षों से जमीन घोटाले, फर्जी दस्तावेजों से संपत्ति हड़पने और सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध खरीद-फरोख्त की शिकायतें आती रही हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर, खासकर भारत-नेपाल बॉर्डर वाले जिलों (जैसे गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर आदि) में यह कदम बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब ऑनलाइन रजिस्ट्री पोर्टल पर पैन कार्ड नंबर दर्ज करना अनिवार्य है। पैन का रियल-टाइम सत्यापन (Real-time Verification) आयकर विभाग के डेटाबेस से किया जाएगा। अगर पैन अमान्य, निष्क्रिय या फर्जी निकला, तो रजिस्ट्री रद्द हो जाएगी। इससे पहले जुलाई 2025 में 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति के लिए पैन सत्यापन शुरू किया गया था, लेकिन अब यह सभी मामलों में लागू है।
UP पैन रजिस्ट्री नियम: नए नियमों की मुख्य बातें
- पैन कार्ड अनिवार्य: क्रेता, विक्रेता और गवाहों के लिए पैन जरूरी। फॉर्म 60 का विकल्प समाप्त।
- आधार सत्यापन के साथ: पहले से ही आधार कार्ड का बायोमेट्रिक और ई-केवाईसी सत्यापन अनिवार्य है
- (1 फरवरी 2026 से पूरे प्रदेश में लागू)। अब पैन के साथ मिलाकर दोहरी जांच होगी।
- ऑनलाइन प्रक्रिया: UP के स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के पोर्टल पर आवेदन करते समय पैन कॉलम अनिवार्य।
- OTP और बायोमेट्रिक से वेरिफिकेशन।
- सीमावर्ती जिलों पर फोकस: नेपाल बॉर्डर वाले क्षेत्रों में संदिग्ध लेन-देन रोकने के लिए विशेष सख्ती।
- टैक्स चोरी पर रोक: पहले लोग कम मूल्य दिखाकर स्टांप ड्यूटी बचाते थे।
- अब पैन से वित्तीय ट्रांजेक्शन ट्रैक होगा, काला धन सफेद होने से रोका जाएगा।
रजिस्ट्री के लिए अब जरूरी दस्तावेज
नए नियमों के तहत रजिस्ट्री कराने के लिए मुख्य दस्तावेज:
- पैन कार्ड (क्रेता-विक्रेता दोनों का, वैलिड और एक्टिव)
- आधार कार्ड (बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के साथ)
- विक्रय विलेख (Sale Deed)
- एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (पिछले 12-30 वर्ष का)
- प्रॉपर्टी के पुराने दस्तावेज (खसरा, खतौनी आदि)
- स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान प्रमाण
- फोटो और अन्य पहचान पत्र (जरूरत पड़ने पर)
स्टांप ड्यूटी दरें अभी भी पुरुषों के लिए 7%, महिलाओं के लिए 6% और संयुक्त में 6.5% हैं, जबकि रजिस्ट्रेशन फीस 1% है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
- सकारात्मक: फर्जी डील्स कम होंगी, संपत्ति विवाद घटेंगे, खरीदारों को सुरक्षित मालिकाना हक मिलेगा।
- चुनौतियां: जिनके पास पैन कार्ड नहीं है, उन्हें पहले पैन बनवाना होगा।
- ग्रामीण इलाकों में यह प्रक्रिया थोड़ी मुश्किल हो सकती है,
- लेकिन सरकार डिजिटल इंडिया के तहत इसे आसान बनाने की कोशिश कर रही है।
- तैयारी जरूरी: अगर आप जल्द ही जमीन या मकान खरीदने/बेचने की सोच रहे हैं, तो तुरंत पैन कार्ड बनवा लें और आधार-पैन लिंक सुनिश्चित करें।
निष्कर्ष: पारदर्शिता की नई शुरुआत
योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त और सुरक्षित संपत्ति बाजार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पैन और आधार के जरिए दोहरी जांच से अब जमीन का फर्जीवाड़ा लगभग नामुमकिन हो जाएगा। यह नियम न केवल आम नागरिकों के हित में है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा।
अगर आप UP में प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े हैं, तो इन नए नियमों को ध्यान में रखें और समय रहते तैयारी कर लें। पारदर्शी व्यवस्था से सबका फायदा है—चाहे खरीदार हो, विक्रेता या सरकार।
