लाउडस्पीकर विवाद राजनीति
लाउडस्पीकर विवाद राजनीति लाउडस्पीकर विवाद पर सियासत तेज हो गई है। मंत्री दानिश अंसारी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी मुस्लिमों को गुमराह कर रही है, जिससे प्रदेश की राजनीति गरमा गई।

उत्तर प्रदेश में रमजान के पवित्र महीने के दौरान मस्जिदों से अजान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर सियासी तनाव बढ़ गया है। यह विवाद अब सिर्फ धार्मिक या प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि विधानसभा में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने सरकार पर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है, जबकि योगी सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने सपा पर पलटवार करते हुए कहा है कि पार्टी मुसलमानों को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। यह बयान विधानसभा सत्र के दौरान आया, जहां विपक्ष ने रमजान गाइडलाइंस को लेकर सवाल उठाए।
लाउडस्पीकर विवाद राजनीति: विवाद की जड़
उत्तर प्रदेश सरकार ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत लाउडस्पीकर के उपयोग पर कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन इनमें मस्जिदों से अजान पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। मंत्री दानिश अंसारी ने स्पष्ट किया कि सरकार का कोई इरादा अजान रोकने का नहीं है। नियम केवल अनावश्यक ऊंची आवाज को नियंत्रित करने के लिए हैं, ताकि सार्वजनिक शांति बनी रहे और अन्य समुदायों को असुविधा न हो। रमजान में सेहरी और इफ्तार के समय सूचना देने के लिए लाउडस्पीकर की जरूरत पर भी विचार किया जा रहा है, लेकिन यह सब कानूनी दायरे में होना चाहिए।
- सपा ने इसे मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा कि योगी सरकार
- धार्मिक आजादी पर अंकुश लगा रही है।
- पार्टी विधायकों ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया औरसरकार से स्पष्ट नीति मांगी।
- उनका दावा है कि कुछ जिलों में प्रशासन द्वारा लाउडस्पीकर हटाने के निर्देश दिए गए,
- जो रमजान के दौरान मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा है।
मंत्री दानिश अंसारी का पलटवार: सपा मुसलमानों को गुमराह कर रही है
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने सपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “लाउडस्पीकर पर कोई मनाही नहीं है। सपा मुसलमानों को डराकर और गुमराह करके वोट बैंक की राजनीति कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी हमेशा से मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती आई है, लेकिन उनके विकास, शिक्षा या रोजगार के लिए ठोस काम नहीं किया।
- दानिश अंसारी ने आगे कहा कि योगी सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं,
- जैसे मदरसों में आधुनिक शिक्षा, वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और
- पसमांदा मुसलमानों के उत्थान के प्रयास।
- उन्होंने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी दल तथ्यहीन बातें
- फैलाकर मुसलमानों में डर पैदा कर रहे हैं,
- जबकि वास्तविकता यह है कि प्रदेश में शांति और कानून का राज है।
- “सपा मुसलमानों को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है,
- लेकिन अब मुस्लिम समाज जागरूक हो चुका है,” उनका यह बयान काफी चर्चा में रहा।
सपा का जवाब और राजनीतिक निहितार्थ
- समाजवादी पार्टी ने मंत्री के बयानों को खारिज करते हुए कहा
- कि सरकार मुस्लिम समुदाय की भावनाओं की अनदेखी कर रही है।
- पार्टी का कहना है कि लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है।
- सपा नेताओं ने रमजान से पहले कई जगहों पर ज्ञापन सौंपे,
- जहां मस्जिदों में लाउडस्पीकर और अन्य व्यवस्थाओं की मांग की गई।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की सियासत में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर चल रही जंग का हिस्सा लगता है। भाजपा की ओर से दानिश अंसारी जैसे मुस्लिम चेहरे को आगे करके यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार सभी समुदायों के साथ न्याय कर रही है। वहीं सपा इसे धार्मिक मुद्दा बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष: क्या यह सिर्फ लाउडस्पीकर का मुद्दा है या वोट की राजनीति?
- लाउडस्पीकर विवाद अब धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है।
- मंत्री दानिश अंसारी के बयान से साफ है कि योगी सरकार इस मुद्दे को कानूनी और
- संतुलित ढंग से सुलझाना चाहती है, जबकि सपा इसे भावनात्मक मुद्दा बनाकर फायदा उठाना चाहती है।
- मुस्लिम समुदाय के लिए यह समय है कि वे तथ्यों पर ध्यान दें और गुमराह करने वाली राजनीति से दूर रहें।
अंत में, प्रदेश में शांति और सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। लाउडस्पीकर जैसे छोटे मुद्दे को बड़ा न बनाया जाए, बल्कि संवाद और समझदारी से सुलझाया जाए। योगी सरकार और विपक्ष दोनों को चाहिए कि वे राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर अल्पसंख्यक समुदाय के हितों को प्राथमिकता दें।
