राहुल गांधी कोर्ट बयान
राहुल गांधी कोर्ट बयान राहुल गांधी ने कोर्ट में बड़ा बयान देते हुए कहा कि हाइलाइट होने के लिए केस किया गया और सीडी से छेड़छाड़ की गई। उनके बयान से राजनीतिक माहौल में नई बहस छिड़ गई।

भारतीय राजनीति में मानहानि के मामले अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं, और हाल ही में एक ऐसा ही मामला फिर से चर्चा में आया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 20 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की एक अदालत में पेश हुए। यह मामला 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा मानहानि का केस है। कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराते हुए राहुल गांधी ने तीखा पलटवार किया और आरोप लगाया कि यह केस सिर्फ उन्हें हाइलाइट करने के लिए दर्ज किया गया है। साथ ही, उन्होंने सीडी में छेड़छाड़ का भी दावा किया, जो इस मामले को और रोचक बना देता है।
यह घटना राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक और उदाहरण है, जहां कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक बयानबाजी एक-दूसरे से टकराती नजर आ रही है।
राहुल गांधी कोर्ट बयान: कोर्ट में राहुल गांधी का बयान
सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी के दौरान राहुल गांधी ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “हाइलाइट होने के लिए मुझ पर केस किया गया है।” उनका इशारा स्पष्ट रूप से बीजेपी और उसके आईटी सेल की ओर था, जहां सोशल मीडिया पर उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप लगते रहे हैं।
- राहुल गांधी ने आगे कहा कि सबूत के तौर पर पेश की गई सीडी में भी छेड़छाड़ की गई है।
- उन्होंने दावा किया कि उनके भाषण या बयान को संदर्भ से हटाकर गलत तरीके से पेश किया गया,
- जिससे मामला कमजोर हो जाता है।
- कोर्ट में उनका यह बयान दर्ज किया गया, और अब अदालत इसकी जांच करेगी।
- राहुल ने जोर देकर कहा कि ऐसे केस राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं,
- न कि किसी वास्तविक अपराध से।
यह बयान न केवल उनके खिलाफ चल रहे कई मानहानि मामलों में एक मजबूत बचाव है, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श में ‘फेक न्यूज’ और ‘एडिटेड कंटेंट’ के मुद्दे को भी उठाता है।
मामले की पृष्ठभूमि
- यह मानहानि का केस 2018 में दर्ज हुआ था,
- जब राहुल गांधी पर अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा।
- बीजेपी समर्थकों ने इसे मानहानि मानकर शिकायत की थी।
- तब से यह मामला विभिन्न अदालतों में चल रहा है।
- राहुल गांधी कई अन्य मानहानि मामलों में भी फंसे रहे हैं,
- जैसे मोदी सरनेम वाला केस, सावरकर पर बयान, सेना पर टिप्पणी आदि।
हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में राहुल को राहत दी है, जैसे सेना पर टिप्पणी वाले केस में स्टे। लेकिन सुल्तानपुर का यह मामला अमित शाह से जुड़ा होने के कारण ज्यादा संवेदनशील है। राहुल गांधी लखनऊ से सड़क मार्ग से सुल्तानपुर पहुंचे और कोर्ट में पेश होकर बयान दर्ज कराया।
सीडी छेड़छाड़ का आरोप: क्या है सच?
- राहुल गांधी का सीडी में छेड़छाड़ का दावा राजनीति में आम हो चुका है।
- पहले भी कई बार उनके वीडियो या ऑडियो को एडिट करके वायरल करने के आरोप लगे हैं।
- बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय पर अक्सर ऐसे वीडियो शेयर करने के आरोप लगते रहे हैं,
- हालांकि कई मामलों में हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगाई है।
राहुल के इस बयान से सवाल उठता है कि क्या कोर्ट में पेश सबूतों की फोरेंसिक जांच होगी? अगर छेड़छाड़ साबित हुई, तो यह केस उनके पक्ष में जा सकता है। यह आरोप डिजिटल युग में राजनीतिक प्रचार की सत्यता पर भी सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
- राहुल गांधी का यह पलटवार बीजेपी पर सीधा हमला है।
- कांग्रेस इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताती है,
- जबकि बीजेपी इसे ‘कानूनी प्रक्रिया’ कह सकती है।
- यह घटना 2026 के राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण है,
- जहां लोकसभा में विपक्ष मजबूत भूमिका निभा रहा है।
ऐसे बयान जनता के बीच बहस छेड़ते हैं। एक तरफ राहुल समर्थक इसे साहसिक कदम मानते हैं, दूसरी तरफ आलोचक इसे बचाव की कोशिश बताते हैं। कोर्ट का अंतिम फैसला ही सच्चाई सामने लाएगा।
निष्कर्ष
- राहुल गांधी का कोर्ट में दिया गया बयान – “हाइलाइट होने के लिए केस किया,
- सीडी से भी छेड़छाड़” – राजनीतिक लड़ाई का नया दौर दर्शाता है।
- यह दिखाता है कि कैसे मानहानि के केस राजनीतिक हथियार बन जाते हैं।
- उम्मीद है कि अदालत निष्पक्ष जांच करेगी और सत्य सामने आएगा।
भारतीय लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के बीच संतुलन जरूरी है। ऐसे मामले न केवल नेताओं के लिए, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए सबक हैं।
