CM करीबी संपत्ति विवाद
CM करीबी संपत्ति विवाद RJD ने CM के करीबी 3–4 लोगों की कथित संपत्ति को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि उनकी दौलत छोटे राज्य के बजट से भी ज्यादा है। जानिए क्या हैं आरोप, किस पर उठे सवाल और सियासत में क्यों मचा है हंगामा।

बिहार की राजनीति हमेशा से विवादों और आरोप-प्रत्यारोपों से भरी रही है। हाल ही में RJD ने एक ऐसा दावा किया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बिहार के मुख्यमंत्री के करीबी 3-4 लोगों की कुल संपत्ति किसी छोटे राज्य के पूरे सालाना बजट से भी अधिक है। यह बयान भ्रष्टाचार, कथित सत्ता के दुरुपयोग और आम जनता की उपेक्षा पर केंद्रित है। RJD का यह हमला NDA सरकार की छवि पर सीधा प्रहार है, खासकर जब राज्य में विकास, रोजगार और गरीबी जैसे मुद्दे पहले से ही गरम हैं।
CM करीबी संपत्ति विवाद : RJD का मुख्य आरोप क्या है?
- RJD नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के कुछ चुनिंदा करीबी सहयोगी,
- सलाहकार या प्रभावशाली व्यक्ति इतनी तेजी से अमीर हुए हैं कि उनकी
- व्यक्तिगत दौलत राज्य के छोटे-छोटे बजट से तुलना करने लायक हो गई है।
- पार्टी का दावा है कि ये लोग सत्ता के केंद्र में रहकर सरकारी योजनाओं,
- ठेकों और नीतियों का फायदा उठा रहे हैं।
- RJD ने इसे “लूट का सिस्टम” करार दिया है, जहां कुछ लोग रातों-रात करोड़पति-खरबपति बन जाते हैं,
- जबकि बिहार का आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और पलायन से जूझ रहा है।
यह आरोप विशेष रूप से उन लोगों पर है जो मुख्यमंत्री के सर्कल ऑफ ट्रस्ट में हैं। RJD का कहना है कि इनकी संपत्ति में वृद्धि सामान्य कमाई से कहीं अधिक है और जांच की जरूरत है। पार्टी ने इसे भ्रष्टाचार का “सबूत” बताते हुए CBI या ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग भी की है।
बिहार की राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह हमला
- बिहार में लंबे समय से नीतीश कुमार की सरकार पर RJD हमलावर रही है।
- तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव जैसे नेता अक्सर सरकार को “भ्रष्ट” और “जनविरोधी” बताते हैं।
- हाल के बजट सत्र में भी RJD ने बजट को “खोखला” और “गरीब-विरोधी” कहा था।
- इस संदर्भ में यह नया आरोप पुराने विवादों को नई ऊर्जा दे रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में बिहार के कई अधिकारियों और नेताओं की संपत्ति पर सवाल उठे हैं। उदाहरण के लिए, कुछ विभागों में इंजीनियरों या ठेकेदारों की संपत्ति पर जांच हुई है। RJD का यह दावा इसी कड़ी का हिस्सा लगता है, जहां पार्टी सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश कर रही है।
सरकार की संभावित प्रतिक्रिया और सच्चाई की जांच
- अब तक सरकार की ओर से इस विशिष्ट दावे पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है,
- लेकिन पिछले आरोपों पर JDU और NDA ने RJD को ही “भ्रष्टाचार का घराना” बताया है।
- वे कहते हैं कि RJD खुद संपत्ति और परिवारवाद के आरोपों से घिरी है।
- सच्चाई यह है कि बिना ठोस सबूतों के ऐसे दावे राजनीतिक हथियार ज्यादा हैं।
- अगर संपत्ति का आंकड़ा सही है, तो यह बड़ा घोटाला हो सकता है।
- छोटे राज्यों जैसे गोवा, सिक्किम या उत्तर-पूर्वी राज्यों का बजट 10-50 हजार करोड़ तक होता है।
- अगर 3-4 लोगों की संपत्ति इससे ज्यादा है, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है।
निष्कर्ष: जनता के लिए क्या मायने?
यह विवाद बिहार की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को मजबूत करता है। चाहे RJD का दावा सही हो या राजनीतिक चाल, लेकिन यह साफ करता है कि राज्य में भ्रष्टाचार के आरोप कम नहीं हो रहे। आम बिहारी को चाहिए कि ऐसे मुद्दों पर सतर्क रहे और पारदर्शी शासन की मांग करे।
अगर जांच होती है, तो सच सामने आएगा। फिलहाल, यह हमला 2025 चुनावों के बाद की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां RJD सरकार को लगातार घेरना चाहती है। बिहार की जनता ही अंतिम फैसला करेगी कि कौन सही है और कौन गलत।
