HAL Tejas Crash
HAL Tejas Crash स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के तीसरे क्रैश ने रक्षा क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। हादसे के पीछे तकनीकी खराबी या अन्य कारणों की जांच जारी है। यह घटना भारतीय वायुसेना और रक्षा उत्पादन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है।

भारत का स्वदेशी गौरव, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस, एक बार फिर सुर्खियों में है – लेकिन इस बार दुखद वजह से। फरवरी 2026 की शुरुआत में भारतीय वायुसेना (IAF) का एक तेजस फाइटर जेट लैंडिंग के दौरान रनवे से आगे निकल गया, जिससे विमान के एयरफ्रेम को गंभीर नुकसान पहुंचा। यह घटना तेजस के इतिहास में तीसरी बड़ी दुर्घटना है, जो मात्र 23 महीनों में हुई है। पायलट सुरक्षित इजेक्ट होकर बच गए, लेकिन इस हादसे ने स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या तेजस की तकनीकी खामियां हैं? या यह सिर्फ एक संयोग है? आइए विस्तार से समझते हैं इस घटना का पूरा राज।
HAL Tejas Crash घटना का विवरण
7 फरवरी 2026 को एक फ्रंटलाइन एयरबेस पर तेजस Mk1 विमान एक रूटीन ट्रेनिंग सॉर्टी (उड़ान अभ्यास) पूरी करके लैंडिंग के लिए आ रहा था। शुरुआती जांच के अनुसार, ब्रेक फेलियर (ब्रेक सिस्टम की खराबी) की वजह से विमान रनवे पर ब्रेक नहीं लगा पाया और आगे निकलकर डिच (खाई) में जा गिरा। विमान को इतना भारी नुकसान हुआ कि इसे संभवतः सर्विस से बाहर (रिटायर) करना पड़ सकता है। पायलट ने तुरंत इजेक्ट किया और उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई।
भारतीय वायुसेना ने इस घटना के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए अपने लगभग 30 सिंगल-सीट तेजस विमानों की पूरी फ्लीट को ग्राउंड कर दिया। व्यापक तकनीकी जांच शुरू की गई है, जिसमें ब्रेकिंग सिस्टम, हाइड्रॉलिक्स, ऑनबोर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्रिटिकल कंपोनेंट्स की जांच हो रही है। IAF का यह फैसला दुबई एयरशो क्रैश (नवंबर 2025) जैसी घातक घटना से बचने के लिए लिया गया, जहां पायलट की मौत हो गई थी।
तेजस की पिछली दुर्घटनाएं: एक दुखद पैटर्न?
यह तीसरा क्रैश तेजस प्रोग्राम के लिए बड़ा झटका है। आइए पिछले हादसों पर नजर डालें:
पहला क्रैश – मार्च 2024:
- राजस्थान के जैसलमेर के पास फायरपावर डेमो से लौटते समय तेजस क्रैश हो गया।
- इंजन में खराबी बताई गई, लेकिन पायलट सुरक्षित बच गए।
- जांच में ह्यूमन एरर या टेक्निकल इश्यू दोनों पर विचार हुआ।
दूसरा क्रैश – नवंबर 2025:
- दुबई एयरशो में एरोबैटिक डिस्प्ले के दौरान तेजस क्रैश हुआ।
- विंग कमांडर नमनश स्याल की मौत हो गई,
- क्योंकि वे सुरक्षित इजेक्ट नहीं कर पाए।
- जांच में पायलट डिसोरिएंटेशन (दिशा भ्रम) या मैकेनिकल फेलियर की बात आई।
तीसरा क्रैश – फरवरी 2026:
ब्रेक फेलियर से रनवे ओवरशूट। कोई मौत नहीं, लेकिन विमान खराब।
तीन क्रैश में से दो में पायलट बच गए, लेकिन तीसरा भी फ्लीट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। तेजस 2016 में सर्विस में आया, और अब तक कुल फ्लाइट आवर्स अच्छे रहे हैं, लेकिन ये हादसे प्रोग्राम की maturity पर असर डाल रहे हैं।
खराबी का राज: क्या हैं संभावित कारण?
HAL Tejas Crash विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ताजा क्रैश के पीछे मुख्य वजह ब्रेक सिस्टम की तकनीकी खराबी मानी जा रही है। तेजस में इस्तेमाल होने वाला ब्रेकिंग सिस्टम हाइड्रॉलिक और एंटी-स्किड मैकेनिज्म पर आधारित है, लेकिन उच्च तापमान, धूल-मिट्टी या मेंटेनेंस इश्यू से फेल हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में ऑनबोर्ड सिस्टम गड़बड़ी का भी जिक्र है।
अन्य संभावित कारण:
- मेंटेनेंस और क्वालिटी कंट्रोल: HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) पर उत्पादन और क्वालिटी में देरी के आरोप लगते रहे हैं।
- सप्लाई चेन इश्यू: इंजन (GE F404) की सप्लाई में देरी से Mk1A वेरिएंट की डिलीवरी दो साल पीछे है। इससे पुराने विमानों पर ज्यादा दबाव पड़ रहा है।
- ऑपरेशनल स्ट्रेस: फ्रंटलाइन बेस पर लगातार ट्रेनिंग और हाई-इंटेंसिटी उड़ानें सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि, तेजस की क्रैश रेट अन्य फाइटर जेट्स (जैसे MiG-21) से बेहतर है, लेकिन तीन क्रैश जल्दी-जल्दी होने से चिंता बढ़ी है।
भारत के लिए क्या मतलब? झटका और सबक
- तेजस भारत का गौरव है – आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक।
- 1 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश,
- 180 Mk1A का ऑर्डर और AMCA जैसे प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है।
- HAL के शेयर गिरे, और विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए।
- लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि IAF ने तुरंत फ्लीट ग्राउंड कर जांच शुरू की,
- जो सुरक्षा को प्राथमिकता दिखाता है।
- यह घटना हमें याद दिलाती है कि स्वदेशी तकनीक में समय लगता है।
- MiG, Jaguar जैसे पुराने फ्लीट में भी क्रैश होते रहे हैं।
- तेजस को और मजबूत बनाने के लिए बेहतर टेस्टिंग,
- क्वालिटी कंट्रोल और ट्रेनिंग जरूरी है।
अंत में, तेजस का तीसरा क्रैश एक झटका है, लेकिन भारत की रक्षा क्षमता को कमजोर नहीं कर सकता। जांच पूरी होने पर सच्चाई सामने आएगी। तब तक, हमारी वायुसेना की सतर्कता और पायलटों की बहादुरी पर भरोसा है।
