रमजान में अमेरिकी हमले
रमजान में अमेरिकी हमले रमजान के दौरान अमेरिकी हमलों को लेकर विवाद तेज हो गया है। एक US सांसद ने अपनी ही सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला, किस देश में हुए हमले और इसके राजनीतिक व अंतरराष्ट्रीय असर क्या हो सकते हैं।

रमजान का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए आध्यात्मिक शांति, उपवास और प्रार्थना का समय होता है। लेकिन हाल के वर्षों में, खासकर 2026 में, मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाइयों पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर हमले की तैयारी में है, और यह ठीक रमजान के दौरान हो सकता है। इस मुद्दे पर अमेरिकी कांग्रेस की सदस्य इल्हान ओमार (Ilhan Omar) ने अपनी ही सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका मुस्लिम देशों पर हमले रमजान में ही क्यों करता है? क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है या धार्मिक पूर्वाग्रह? इस विवाद ने पूरी दुनिया में बहस छेड़ दी है।
रमजान में अमेरिकी हमले: रमजान के दौरान अमेरिकी कार्रवाइयों का इतिहास
- इतिहास गवाह है कि अमेरिका ने कई बार मुस्लिम बहुल देशों पर सैन्य कार्रवाई रमजान के महीने में की है।
- 2003 में इराक पर अमेरिकी हमला भी रमजान के दौरान शुरू हुआ था,
- जिसने लाखों लोगों की जिंदगियां तबाह कर दीं।
- अब 2026 में ईरान के साथ तनाव चरम पर है।
- ट्रंप प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
- अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में अपनी तैनाती बढ़ा रही है,
- और रिपोर्ट्स कहती हैं कि हमला इस सप्ताहांत तक हो सकता है।
रमजान में हमला मुस्लिम दुनिया के लिए अपमानजनक माना जा रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी और मुस्लिम देशों में अमेरिका विरोधी भावनाएं भड़क सकती हैं। अरब देशों ने भी चुपके से अमेरिका को चेतावनी दी है कि रमजान में हमला धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा।
इल्हान ओमार के सवाल और विवाद
मिनेसोटा की डेमोक्रेटिक कांग्रेसवुमन इल्हान ओमार ने इस मुद्दे पर खुलकर बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “अमेरिका मुस्लिम देशों पर रमजान में हमला करना पसंद करता है। इराक पर हमला भी रमजान में हुआ था, और अब ईरान पर होने वाला हमला भी उसी पैटर्न का लगता है। मुझे यकीन है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन से ज्यादा इन देशों की पूजा (धर्म) से जुड़ा है।”
- ओमार ने कहा कि ऐसा हमला असंवैधानिक भी हो सकता है,
- क्योंकि युद्ध की घोषणा कांग्रेस का अधिकार है, राष्ट्रपति का नहीं।
- उन्होंने ट्रंप प्रशासन से सवाल किया कि क्या अमेरिका मुस्लिम देशों
- के खिलाफ धार्मिक पूर्वाग्रह रखता है? उनके बयान ने मुस्लिम समुदाय में समर्थन पाया,
- लेकिन रिपब्लिकन पक्ष ने इसे राष्ट्र-विरोधी करार दिया।
- ट्रंप ने ओमार और रशीदा त्लैब जैसी मुस्लिम कांग्रेसवुमन पर पहले भी निशाना साधा है,
- उन्हें “अमेरिका वापस भेजने” की बात कही है।
यह विवाद सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। मुस्लिम संगठन CAIR ने कांग्रेस से ईरान पर हमले का विरोध करने की अपील की है। कई अंतरराष्ट्रीय नेता भी चिंतित हैं कि रमजान में हमला क्षेत्रीय युद्ध को भड़का सकता है।
वैश्विक प्रभाव और आलोचना
- रमजान में संभावित हमला तेल की कीमतों में उछाल ला सकता है,
- क्योंकि मिडिल ईस्ट तेल उत्पादन का केंद्र है।
- ईरान ने पहले ही अमेरिकी ठिकानों पर हमले की धमकी दी है।
- अगर हमला होता है, तो हिजबुल्लाह, हूती जैसे ईरान समर्थित समूह भी सक्रिय हो सकते हैं।
- इससे यमन, सीरिया, लेबनान तक अस्थिरता फैल सकती है।
अमेरिकी कांग्रेस में भी विभाजन है। कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने कहा है कि हमले के लिए स्पष्ट सबूत और कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है। चक शूमर जैसे नेताओं ने कहा कि प्रशासन को जनता के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए।
निष्कर्ष
रमजान में अमेरिकी हमलों का विवाद सिर्फ सैन्य रणनीति का नहीं, बल्कि धार्मिक संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय नैतिकता का भी सवाल है। इल्हान ओमार जैसे सांसदों के सवाल अमेरिकी सरकार को आईना दिखा रहे हैं। क्या अमेरिका अपनी विदेश नीति में धार्मिक पूर्वाग्रह से ऊपर उठ पाएगा? या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा? यह समय बताएगा। फिलहाल, दुनिया रमजान की शांति की उम्मीद कर रही है, लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव इसे मुश्किल बना रहा है।
