राष्ट्रीय ध्वज के साथ देशभक्ति का जज़्बा दिखाते नागरिक।
देश पर गर्व : प्यू रिसर्च सेंटर के नए सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा – 31% भारतीयों ने देश पर गर्व के स्रोत पर कोई जवाब नहीं दिया, जो 25 देशों में सबसे ज्यादा है। लेकिन नकारात्मक बातें सिर्फ 3% ने कहीं। क्या भारतीय सच में गर्व नहीं करते या अभिव्यक्ति में संकोच है? पूरी रिपोर्ट और विश्लेषण पढ़ें।
भारत में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना हमेशा से मजबूत मानी जाती रही है। लोग अक्सर कहते हैं कि भारतीय सबसे ज्यादा अपने देश पर गर्व करते हैं। लेकिन वाशिंगटन डीसी स्थित प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की नई रिपोर्ट ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट का नाम है “What Makes People Proud of Their Country”। इसमें 25 देशों के 33,486 लोगों से सर्वे किया गया (चीन शामिल नहीं)।

देश पर गर्व मुख्य खुलासा – 31% भारतीयों ने जवाब देने से इनकार किया!
सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि उन्हें अपने देश पर किस बात का गर्व है, तो 31 प्रतिशत भारतीयों ने कोई जवाब नहीं दिया या उन्हें समझ नहीं आया कि क्या कहें। यह आंकड़ा अन्य 24 देशों में सबसे ज्यादा है। ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, जर्मनी, यूके और अमेरिका जैसे विकसित देशों में यह प्रतिशत काफी कम है।
हैरानी की बात यह है कि जब नकारात्मक पक्ष पूछा गया – “किस बात से देश पर गर्व नहीं है?” – तो सिर्फ 3 प्रतिशत भारतीयों ने कोई नकारात्मक बात बताई। यह इंडोनेशिया को छोड़कर सबसे कम है। यूके में 29% और अमेरिका में 20% लोगों ने नकारात्मक दृष्टिकोण जताया।
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है: “31% लोगों के उत्तर न देने का मतलब यह कतई नहीं है कि भारतीय अपने देश पर गर्व नहीं करते हैं।” फिर भी यह हिचकिचाहट सवाल उठाती है – क्या भारतीय गर्व महसूस तो करते हैं, लेकिन खुलकर व्यक्त करने में संकोच करते हैं?
भारतीयों के गर्व के मुख्य स्रोत क्या हैं?
जिन्होंने जवाब दिया, उनके अनुसार:
- लोग (10%)
- कला और संस्कृति, अर्थव्यवस्था, राजनीतिक प्रणाली (प्रत्येक 8%)
- सामान्य पहचान (7%)
- राजनीतिक नेतृत्व (6%)
आश्चर्यजनक रूप से:
- सेना का जिक्र सिर्फ 3% ने किया।
- क्रिकेट और भोजन का उल्लेख बिल्कुल नहीं।
- धर्म को सिर्फ 5% ने गर्व का स्रोत बताया, जो वर्तमान धार्मिक विमर्श से बिल्कुल अलग है।
अन्य देशों में फ्रांस और इटली अपनी कला-संस्कृति पर सबसे ज्यादा गर्व करते हैं (26%), ग्रीस इतिहास पर (37%), जापान लोगों पर (41%), अमेरिका स्वतंत्रता और नकारात्मक दृष्टिकोण पर।
राजनीति का प्रभाव भारत में कम क्यों?
- भारत में राजनीति गर्व या नफरत का बड़ा कारक नहीं लगती। भाजपा समर्थकों
- में नकारात्मक दृष्टिकोण 1% और गैर-समर्थकों में 4% – अंतर सिर्फ 3%। जबकि अमेरिका में सत्तारूढ़
- समर्थकों में 8% और विरोधियों में 31% – अंतर 23%। यह दिखाता है
- कि भारत में राजनीतिक ध्रुवीकरण गर्व की भावना पर कम असर डालता है।
क्यों उठ रहे हैं सवाल? भारतीय प्रतिक्रिया और बहस
यह रिपोर्ट आम धारणा से टकराती है कि भारतीय सबसे ज्यादा देशभक्त हैं। सोशल मीडिया और चर्चाओं में लोग पूछ रहे हैं:
- क्या हम सच में गर्व महसूस नहीं करते?
- या अभिव्यक्ति में संकोच है – सामाजिक दबाव, आलोचना का डर, या विनम्रता?
- सेना, क्रिकेट, धर्म जैसे लोकप्रिय विषयों का कम जिक्र क्यों?
रिपोर्ट भारतीय समाज में आत्म-मूल्यांकन की जरूरत बताती है। यह गर्व की कमी नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति के तरीके पर सवाल है।
क्या सिखाता है यह सर्वे?
यह अध्ययन बताता है कि राष्ट्रीय गौरव सिर्फ जोर-शोर से व्यक्त नहीं होता। भारत में गर्व गहरा लेकिन शांत है। नकारात्मकता कम होना सकारात्मक संकेत है। लेकिन 31% का चुप रहना हमें सोचने पर मजबूर करता है – क्या हम खुलकर गर्व जताने से हिचकते हैं? शिक्षा, मीडिया और समाज को गर्व की स्वस्थ अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना चाहिए।
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