तेजप्रताप चूड़ा दही भोज
तेजप्रताप चूड़ा दही भोज आरजेडी नेता तेजप्रताप यादव ने चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया, जिसमें भाई तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भेजा खास न्योता। पटना में सियासी मुलाकातों की चर्चा तेज।

#तेजप्रताप यादव के चूड़ा-दही भोज का ऐलान इस बार सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक बड़ा सियासी मैसेज माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव बल्कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक को औपचारिक न्योता देने की बात खुलकर कही है। मकर संक्रांति पर होने वाला यह आयोजन लालू यादव की उस राजनीतिक शैली की याद दिला रहा है, जिसमें दही-चूड़ा जैसे सांस्कृतिक पर्व को ही मेल-मिलाप और गठबंधन की जमीन बना दिया जाता था।
तेजप्रताप चूड़ा दही भोज : क्या है ये चूड़ा‑दही भोज?
बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही‑चूड़ा का भोज सिर्फ खाने-पीने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मेल-मिलाप का बड़ा मंच माना जाता है। यह त्योहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है और परंपरागत तौर पर घर-घर में चूड़ा, दही, गुड़ और तिल से लोगों की मेहमाननवाजी की जाती है। लालू-राबड़ी परिवार के पटना वाले आवास पर सालों से होने वाला यह भोज बिहार की सियासत का ‘अनौपचारिक दरबार’ रहा है।
- इस बार twist यह है कि लालू परिवार के पारंपरिक भोज को लेकर असमंजस है,
- लेकिन तेजप्रताप अपने स्तर पर अलग चूड़ा-दही भोज करके सियासी हलचल पैदा कर चुके हैं।
- उनकी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD)
- इस आयोजन को अपनी पहचान और ताकत दिखाने के मंच के रूप में पेश कर रही है।
तेजप्रताप का प्लान: कौन‑कौन हैं मेहमान?
तेजप्रताप यादव ने साफ कहा है कि 14 जनवरी को पटना में स्थित अपने सरकारी आवास 26 M स्ट्रैंड रोड पर यह चूड़ा‑दही भोज रखा जाएगा। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए घोषणा की कि इस भोज के लिए वे “सभी वर्गों के लोगों” के साथ सत्ता और विपक्ष, दोनों के नेताओं को बुलाएंगे।
मुख्य मेहमानों की लिस्ट में शामिल हैं:
- नेता प्रतिपक्ष और छोटे भाई तेजस्वी यादव
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
- राज्यपाल (आरिफ मोहम्मद खान का नाम रिपोर्ट्स में आया है)
- डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा
- बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, जिन्हें तेजप्रताप खुद उनके सरकारी आवास जाकर कार्ड दे चुके हैं।
तेजप्रताप ने सोशल मीडिया पर दीपक प्रकाश से मुलाकात की तस्वीरें डालते हुए लिखा कि उन्होंने उन्हें 14 जनवरी के दही‑चूड़ा कार्यक्रम के लिए आमंत्रण पत्र सौंपा और नई जिम्मेदारियों की बधाई भी दी।
तेजस्वी‑नीतीश को एक मंच पर लाने की कोशिश
- तेजप्रताप का यह भोज इसलिए ‘धमाका’ माना जा रहा है,
- क्योंकि वे एक ही मंच पर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव को बुलाने की कोशिश कर रहे हैं,
- जबकि मौजूदा सियासी समीकरणों में दोनों आमने‑सामने की राजनीति कर रहे हैं।
- राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या तेजप्रताप इस बहाने न सिर्फ अपने भाई से दूरी कम करना चाहते हैं,
- बल्कि नीतीश से भी कोई नया संवाद सूत्र तलाश रहे हैं।
पिछले सालों में लालू यादव के दही‑चूड़ा भोज में कई बार विरोधी दलों के नेता भी पहुंचे और बाद में बड़े गठबंधन बने, ऐसे कई उदाहरण हैं, इसलिए इस कार्यक्रम को प्रतीकात्मक से ज्यादा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। खुद तेजप्रताप भी इंटरव्यू में कह चुके हैं कि यह आयोजन “सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा” है, जिसमें सभी को बुलाया जाएगा, ताकि एक सकारात्मक मैसेज जाए।
पारिवारिक राजनीति की पृष्ठभूमि
तेजप्रताप यादव को पिछले साल लालू प्रसाद यादव ने पार्टी और घर की राजनीति से अलग कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी JJD बना ली और विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई, लेकिन जीत नहीं सके। इसके बावजूद वे लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे परिवार से पूरी तरह अलग नहीं हैं; नए साल पर वे अपनी मां राबड़ी देवी के जन्मदिन पर 10 सर्कुलर रोड जाकर केक काटते हुए दिखे।
- अब चूड़ा‑दही भोज पर तेजस्वी को न्योता देने की घोषणा को कई लोग
- ‘रिश्तों की बर्फ पिघलाने’ की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
- सवाल यह भी है कि क्या तेजस्वी इस निमंत्रण को स्वीकार करेंगे,
- और क्या उनकी मौजूदगी से लालू परिवार की आंतरिक सियासत में कोई नया मोड़ आएगा।
बिहार की ‘दही‑चूड़ा पॉलिटिक्स’ का अगला अध्याय
- बिहार में हर चुनावी मौसम या बड़े राजनीतिक बदलाव से पहले
- दही‑चूड़ा भोज जैसे कार्यक्रमों के जरिए नई दोस्तियां और नए समीकरण बनते रहे हैं।
- तेजप्रताप के इस कदम को कुछ विश्लेषक उनकी
- ‘कमबैक पॉलिटिक्स’ और खुद को केंद्र में रखने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं,
- ताकि वे सिर्फ “बागी बेटा” नहीं, बल्कि “सियासी प्लेयर” के रूप में दिखाई दें।
14 जनवरी को होने वाला यह भोज सिर्फ खाने की थाली नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति की अगली पटकथा का ट्रेलर भी हो सकता है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि नीतीश, तेजस्वी और बड़े‑बड़े नेताओं में से कौन‑कौन वास्तव में इस चूड़ा‑दही भोज में पहुंचते हैं और किसके बीच नई नज़दीकियां या दूरियां सुर्खियां बनती हैं
