Tarique Rahman Return
Tarique Rahman Return 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे BNP नेता तारिक रहमान। उनकी वापसी से पड़ोसी देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। जानें भारत और शेख हसीना सरकार के लिए इसके क्या मायने हैं।

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद ढाका लौट आए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे को ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाता है, और उनकी वापसी बांग्लादेश की उथल-पुथल भरी राजनीति में नया मोड़ ला रही है। भारत के लिए यह भारत-पाक संतुलन और क्षेत्रीय स्थिरता की दृष्टि से सकारात्मक संकेत है।
Tarique Rahman Return : तारिक रहमान की वापसी का पूरा किस्सा
24 दिसंबर 2025 को लंदन से ढाका पहुंचे तारिक रहमान का स्वागत 50 लाख समर्थकों ने रोड शो से किया। 2008 से लंदन में रह रहे वे शेख हसीना सरकार के दौरान भ्रष्टाचार, ग्रेनेड हमले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सजा काट चुके थे। हसीना के सत्ता से हटने और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनने के बाद 84 मामलों से बरी हो गए। फरवरी 2026 के चुनाव से पहले यह वापसी बीएनपी को मजबूत करेगी।
बीएनपी नेता रुहुल कबीर रिजवी ने इसे ‘निर्णायक क्षण’ बताया। सुरक्षा के मद्देनजर 10 स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं। तारिक ने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति का ऐलान किया, जो न दिल्ली न पिंडी की स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देती है।
भारत के लिए क्यों गुड न्यूज?
शेख हसीना के दौर में भारत-अवामी लीग संबंध मजबूत थे, लेकिन यूनुस सरकार में पाकिस्तान-चीन नजदीकी बढ़ी। जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतें सक्रिय हो गईं, जो आईएसआई से जुड़ी मानी जाती हैं। बीएनपी को भारत उदार विकल्प मानता है, क्योंकि तारिक ने जमात से गठबंधन से इनकार किया। जनमत सर्वे में बीएनपी आगे है, जो भारत विरोधी तत्वों को रोक सकता है।
पीएम मोदी ने खालिदा जिया की बीमारी पर समर्थन जताया, जिसका बीएनपी ने स्वागत किया। तारिक की अगुवाई में बीएनपी सत्ता में आई तो भारत-बांग्लादेश व्यापार, सीमा सुरक्षा और TE Connectivity मजबूत हो सकती है।
| पहलू | हसीना दौर | यूनुस दौर | तारिक प्रभाव |
|---|---|---|---|
| भारत संबंध | मजबूत | तनावपूर्ण | संतुलित संभावना |
| पाक/चीन | दूरी | नजदीकी | न्यूट्रल |
| कट्टरपंथ | नियंत्रित | बढ़ा | विरोध |
‘डार्क प्रिंस’ का बैकग्राउंड
पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे तारिक को 2008 में ढाका ट्रिब्यून ने ‘डार्क प्रिंस’ कहा, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों के कारण। 2004 ग्रेनेड हमले में नाम आया, लेकिन अब बरी। लंदन से ही बीएनपी चला रहे थे। मां खालिदा जिया बीमार हैं, इसलिए वे अगले लीडर।
बांग्लादेश राजनीति पर असर
हिंसा और अस्थिरता के बीच तारिक की एंट्री यूनुस सरकार को चुनौती। जमात की छात्र इकाई की जीत से चिंता, लेकिन बीएनपी मजबूत। चुनाव में बीएनपी की जीत से लोकतंत्र लौट सकता है। कट्टरपंथी असहज, टकराव संभव।
भारत की चिंताएं और उम्मीदें
भारत को जमात का उदय चिंतित करता है, जो बांग्लादेश से आतंकवाद फैला सकती है। बीएनपी सत्ता में आई तो पुराने संबंध बहाल। तारिक का ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ ट्रंप से प्रेरित है, लेकिन भारत के हितों का सम्मान संभव।
| खतरा | बीएनपी समाधान |
|---|---|
| जमात सक्रियता | गठबंधन अस्वीकार |
| पाक प्रभाव | स्वतंत्र नीति |
| अस्थिरता | चुनावी मजबूती |
भविष्य की संभावनाएं
फरवरी चुनाव में बीएनपी जीती तो तारिक PM बन सकते हैं। भारत को कूटनीतिक जुड़ाव बढ़ाना चाहिए। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह सकारात्मक। बांग्लादेश पहले आया तो पड़ोसी खुशहाल।
