Army Social Media Policy
Army Social Media Policy भारतीय सेना ने अपनी नई सोशल मीडिया नीति लागू की है। अब जवान और अफसर Instagram या Facebook पर पोस्ट साझा नहीं कर पाएंगे। ये फैसला गोपनीयता व सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

भारतीय सेना ने सोशल मीडिया उपयोग को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है, जिसमें जवानों को इंस्टाग्राम पर पोस्टिंग, लाइक या कमेंट करने की पूरी मनाही लगा दी गई है। यह नीति 23 दिसंबर 2025 से लागू हो चुकी है और इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। नीचे विस्तार से जानिए इस नीति के हर पहलू को।
Army Social Media Policy : नीति के मुख्य बदलाव
भारतीय सेना के जवान और अधिकारी अब इंस्टाग्राम का उपयोग केवल देखने (व्यूइंग) और निगरानी (मॉनिटरिंग) के लिए कर सकेंगे। पोस्ट शेयर करना, लाइक ठोकना या कोई टिप्पणी करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। रक्षा मंत्रालय के इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर से जारी इस आदेश को सभी यूनिटों और विभागों में भेज दिया गया है। इससे सैनिक फर्जी खबरों या भ्रामक कंटेंट को पहचानकर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर सकेंगे, जो सूचना युद्ध के दौर में बेहद जरूरी है।
सुरक्षा संबंधी बड़ा कारण
इस नीति का सबसे बड़ा कारण हनी ट्रैप और संवेदनशील जानकारी का लीक होना है।过去 में विदेशी एजेंसियों ने सोशल मीडिया के जरिए सैनिकों को फंसाया, जिससे गोपनीय डेटा बाहर चला गया। सेना प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि ‘रिएक्ट’ और ‘रिस्पॉन्ड’ में फर्क है – जवानों को जल्दबाजी में बहस में न पड़ने दिया जाएगा। डिजिटल गतिविधियों पर पहले से लागू नियम भी यथावत रहेंगे, ताकि साइबर खतरों से बचा जा सके।
सोशल मीडिया पर सेना का पुराना रुख
2019 तक सैनिक किसी भी सोशल मीडिया ग्रुप में शामिल नहीं हो सकते थे। 2020 में 89 ऐप्स, जिनमें फेसबुक और इंस्टाग्राम शामिल थे, हटाने के सख्त आदेश दिए गए। बाद में फेसबुक, यूट्यूब, एक्स, लिंक्डइन, टेलीग्राम और व्हाट्सएप को सख्त निगरानी में सीमित अनुमति मिली। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 2020 में इस तरह के प्रतिबंध को सही ठहराया था।
| वर्ष | प्रमुख बदलाव | कारण |
|---|---|---|
| 2019 | सोशल मीडिया ग्रुप जॉइनिंग पर पूर्ण禁 | सुरक्षा खतरे |
| 2020 | 89 ऐप्स हटाने का आदेश | चाइनीज ऐप्स और डेटा लीक |
| 2025 | इंस्टाग्राम केवल व्यूइंग के लिए | फेक न्यूज मॉनिटरिंग |
जवानों पर क्या असर पड़ेगा?
यह नीति जवानों के लिए ‘पैसिव पार्टिसिपेशन’ सुनिश्चित करेगी, यानी सिर्फ अवलोकन तक सीमित रहेंगे। फर्जी पोस्ट देखने पर वे रिपोर्ट कर सकेंगे, जिससे सेना की आंतरिक सतर्कता बढ़ेगी। हालांकि, निजी जीवन में सोशल मीडिया की कमी महसूस हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। सेना के आधिकारिक हैंडल्स पहले की तरह सक्रिय रहेंगे।
अन्य प्लेटफॉर्म्स पर नियम
- फेसबुक, एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी पोस्टिंग प्रतिबंधित रहेगी,
- लेकिन देखने की अनुमति बनी हुई है।
- व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर सख्त निगरानी जारी रहेगी।
- कुल मिलाकर, यह कदम डिजिटल युग में सेना की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में है।
भविष्य की संभावनाएं
यह नीति आने वाले समय में अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी लागू हो सकती है। सेना डिजिटल ट्रेनिंग को बढ़ावा देगी, ताकि जवान फेक न्यूज का मुकाबला कर सकें। नागरिकों के लिए भी यह संदेश है कि सोशल मीडिया पर सावधानी बरतें। रक्षा विशेषज्ञ इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
