ओवैसी का हमला
ओवैसी का हमला AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने डिप्टी CM पर तीखा हमला बोला है। बयान में उन्होंने कहा – “अगर तुम मुसलमान होते तो…” जिससे राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा, “अगर तुम मुसलमान होते तो क्या BJP तुम्हें कभी डिप्टी CM बनाती?” यह बयान मुस्लिम समुदाय के एक परिवार को कथित तौर पर धोखा देने के आरोपों के बीच आया, जो राजनीतिक बहस को गरमा रहा है।
विवाद की शुरुआत
मामला महाराष्ट्र के ठाणे जिले के एक मुस्लिम परिवार से जुड़ा है, जिन्होंने दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने 2022 के मार्चा धावली दंगा पीड़ितों को न्याय का वादा किया था। परिवार के अनुसार, शिंदे ने व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया कि वे उनकी मदद करेंगे, लेकिन सत्ता में आने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। ओवैसी ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो शेयर कर शिंदे को आड़े हाथों लिया, जिसमें परिवार की पीड़ा दिखाई गई। उन्होंने कहा कि BJP की राजनीति केवल वोट के लिए होती है, सत्ता मिलते ही अल्पसंख्यकों को भुला दिया जाता है।
ओवैसी का हमला : ओवैसी का पूरा बयान
लोकसभा में बोलते हुए ओवैसी ने शिंदे पर सीधा हमला बोला: “तुम्हें मुसलमान होते तो BJP कभी इतना ऊंचा पद नहीं देती। ये लोग केवल हिंदू-मुस्लिम बांटते हैं।” उन्होंने शिंदे के 2022 के विद्रोह का जिक्र किया, जब उन्होंने उद्धव ठाकरे सरकार गिराई और BJP से हाथ मिलाया। ओवैसी का आरोप है कि शिंदे ने मुस्लिम परिवारों को मात्र चुनावी लाभ के लिए गुमराह किया। “वादा किया था घर बनवाने का, नौकरी का, लेकिन सब खोखला था,” उन्होंने कहा। यह बयान महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले AIMIM की मुस्लिम वोट बैंक मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
एकनाथ शिंदे का पक्ष
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ओवैसी के बयान को खारिज करते हुए कहा कि वे सभी नागरिकों के लिए काम करते हैं, न कि धर्म के आधार पर। शिंदे ने ठाणे में दंगा प्रभावितों के लिए राहत पैकेज की बात कही और ओवैसी को “राजनीतिक स्टंटबाज” बताया। BJP नेताओं ने इसे ओवैसी की हताशा करार दिया, क्योंकि AIMIM महाराष्ट्र में कमजोर साबित हो रही है। शिंदे सरकार ने दावा किया कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया गया, लेकिन परिवार असंतुष्ट है।
राजनीतिक संदर्भ
- यह विवाद महाराष्ट्र की जटिल सियासत को दर्शाता है।
- 2022 के विद्रोह के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार मजबूत हुई,
- लेकिन अल्पसंख्यक मुद्दों पर विपक्ष सक्रिय है।
- ओवैसी की पार्टी ने ठाणे, मालेगांव जैसे इलाकों में मुस्लिम वोटों पर नजर रखी है।
- कांग्रेस और NCP ने भी शिंदे पर निशाना साधा,
- इसे सांप्रदायिक सद्भाव भंग करने का प्रयास बताया।
- दूसरी ओर, BJP इसे ओवैसी का डराने का हथकंडा मान रही।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया दौरे के दौरान भी शिंदे ने एकता का संदेश दिया था।
व्यापक प्रभाव
- ओवैसी का बयान मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना को बढ़ावा दे सकता है।
- ठाणे दंगे में 10 लोग मारे गए थे, जिसमें मुस्लिम परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
- यह घटना पुलिस मुठभेड़ों और संपत्ति जब्ती पर सवाल उठाती है।
- सोशल मीडिया पर #JusticeForMuslims और #ShindeBetrayal ट्रेंड हो रहे।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2026 के स्थानीय चुनावों में असर डालेगा।
- सरकार को पारदर्शी जांच और मुआवजा सुनिश्चित करना चाहिए।
आगे की राह
ओवैसी और शिंदे के बीच यह जुबानी जंग राजनीति को ध्रुवीकृत कर रही। मुस्लिम परिवारों को न्याय मिलना जरूरी, ताकि विश्वास बहाल हो। BJP को अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं पर फोकस करना होगा। ओवैसी को भी बयानबाजी से आगे आकर कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए। यह विवाद साबित करता है कि भारत में धर्म और राजनीति का मेल कितना जटिल है। न्याय ही एकमात्र समाधान है।
