तारिक रहमान बयान
तारिक रहमान बयान BNP लीडर तारिक रहमान के बयान से बांग्लादेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। उन्होंने कहा कि 1971 के बिना बांग्लादेश का अस्तित्व नहीं होता, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है।

#तारिक रहमान, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के संयोजक और खालिदा जिया की सबसे बड़ी संतान, ने हाल ही में एक साक्षात्कार में 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम पर सनसनीखेज बयान दिया। उन्होंने कहा कि “1971 के बिना भी बांग्लादेश का अस्तित्व संभव था।” यह बयान पाकिस्तान समर्थक तत्वों और बांग्लादेशी राष्ट्रवादियों के बीच भूचाल ला रहा है।
तारिक रहमान कौन हैं?
#तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और BNP के केंद्रीय नेतृत्वकर्ता। लंदन में निर्वासित जीवन जीते हुए वे पार्टी को निर्देशित करते हैं। 2008 के आम चुनावों से पहले भ्रष्टाचार के आरोप में जेल गए, लेकिन BNP समर्थकों के लिए वे ‘मिरा कसरत’ (चमत्कारी बालक) हैं। उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बढ़ी, जब BNP ने अंतरिम सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज किया।
तारिक रहमान बयान : विवादास्पद बयान का पूरा संदर्भ
हाल के एक वीडियो साक्षात्कार में तारिक ने कहा, “1971 की जंग के बिना भी पूर्वी पाकिस्तान एक अलग राष्ट्र बन सकता था। मुजिबुर रहमान ने अनावश्यक रूप से युद्ध को बढ़ावा दिया।” उन्होंने पाकिस्तान के साथ संघीय ढांचे की वकालत की, जहां बंगाली भाषा और संस्कृति सुरक्षित रहती। यह बयान 1971 को बांग्लादेश की पहचान मानने वाले देशवासियों के लिए अपमानजनक है, क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम में 30 लाख शहीद हुए और 2 करोड़ शरणार्थी बने।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1971 का महत्व
1970 के आम चुनावों में शेख मुजिबुर रहमान की अवामी लीग ने पूर्ण बहुमत जीता, लेकिन पश्चिम पाकिस्तान ने सत्ता नहीं सौंपी। 25 मार्च 1971 को ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ में पाकिस्तानी सेना ने ढाका विश्वविद्यालय सहित बंगाली बुद्धिजीवियों का नरसंहार किया। भारत के हस्तक्षेप से 16 दिसंबर 1971 को विजय प्राप्त हुई। बांग्लादेश के संविधान की प्रस्तावना में ही 1971 को राष्ट्र जन्म का आधार बताया गया। तारिक का बयान इस राष्ट्र-निर्माण मिथक को चुनौती देता है।
बयान के पीछे राजनीतिक मकसद
- तारिक का यह बयान BNP की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
- शेख हसीना के बाद अवामी लीग कमजोर हुई,
- BNP कट्टर इस्लामी दलों से गठबंधन कर रही है।
- पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने का संकेत देते हुए वे जमात-ए-इस्लामी जैसे समूहों को लुभा रहे। अं
- तरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस पर दबाव बनाने के लिए यह बयान है।
- पाकिस्तान ने भी तारिक के बयान का स्वागत किया, जो भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित कर सकता।
प्रतिक्रियाएं और विवाद
- बांग्लादेश में मुक्ति संग्राम के योद्धाओं ने तारिक को ‘राजद्रोही’ कहा।
- अवामी लीग ने उन्हें पाकिस्तानी एजेंट करार दिया।
- भारत में भी आलोचना हुई, क्योंकि 1971 में भारत ने बांग्लादेश को मान्यता दी।
- सोशल मीडिया पर #TariqueTraitor ट्रेंड कर रहा।
- BNP समर्थक इसे ऐतिहासिक विश्लेषण बता रहे,
- लेकिन अधिकांश इसे राष्ट्र-विरोधी मानते हैं।
- विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान 2026 चुनावों से पहले ध्रुवीकरण का प्रयास है।
व्यापक प्रभाव और भविष्य
- यह बयान बांग्लादेश की पहचान संकट को उजागर करता है।
- हसीना के बाद कट्टरवाद बढ़ा, हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले हुए।
- तारिक यदि सत्ता में आए तो पाकिस्तान-प्रवृत्ति मजबूत हो सकती।
- भारत को सतर्क रहना होगा।
- बांग्लादेशी युवा पीढ़ी 1971 को भूल रही, ऐसे बयान भ्रम फैला सकते।
- राष्ट्रवाद बनाम इस्लामी एकता की बहस तेज हो गई।
- अंतरिम सरकार को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
तारिक रहमान का बयान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को चुनौती देता, बल्कि बांग्लादेश के भविष्य को प्रभावित कर सकता। क्या यह राजनीतिक चालबाजी है या गहरी सोची-समझी रणनीति? समय बताएगा।
