कर्नल सोफिया केस
कर्नल सोफिया केस सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकार लगाई! कर्नल सोफिया कुरैशी पर विजय शाह की टिप्पणी केस में 2 हफ्ते में प्रोसिक्यूशन की मंजूरी देने का आदेश। देरी पर CJI की कड़ी टिप्पणी।

19 जनवरी 2026 का दिन भारतीय न्याय व्यवस्था और सेना के सम्मान के लिए यादगार रहा। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट कहा कि कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी पर अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य सरकार को दो हफ्ते के अंदर इस पर फैसला लेने का सख्त निर्देश दिया। CJI ने कहा, “अब और देरी नहीं चलेगी। मामला 19 अगस्त से लटका पड़ा है, SIT ने रिपोर्ट सौंपी, लेकिन सरकार चुप्पी साधे बैठी है।”
यह मामला पिछले साल मई 2025 से चल रहा है, जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी ने मीडिया ब्रीफिंग की थी। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई की जानकारी दी थी। इसी दौरान मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने एक सार्वजनिक सभा में विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा था कि “जिन्होंने हमारी बेटियों का सिंदूर उजाड़ा, मोदी जी ने उनकी अपनी बहन को भेजकर सबक सिखाया।” यह टिप्पणी कर्नल सोफिया पर हमला मानी गई, क्योंकि वे मुस्लिम समुदाय से हैं और बयान को सांप्रदायिक रंग दिया गया।
हाईकोर्ट से शुरू हुआ विवाद, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री के बयान को
- “नाली की भाषा” करार दिया और पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
- हाईकोर्ट ने कहा कि यह बयान सेना की छवि को ठेस पहुंचाता है
- और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ता है।
- इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा।
- मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री की माफी को
- “मगरमच्छ के आंसू” बताया और कहा कि
- “पूरे देश को शर्मसार किया गया है।”
- कोर्ट ने SIT गठन का आदेश दिया,
- जिसमें तीन वरिष्ठ IPS अधिकारी (एक महिला सहित) शामिल थे,
- और जांच मध्य प्रदेश से बाहर के अधिकारियों से कराई गई।
SIT ने जांच पूरी कर रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी। रिपोर्ट में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 152, 196 आदि के तहत अपराध बनने की बात कही गई और सरकार से मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी गई। लेकिन राज्य सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया। सरकार का तर्क था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए कार्रवाई रुकी हुई है।
आज की सुनवाई: CJI की तीखी टिप्पणियां
19 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, “आप लोग क्या कर रहे हैं? SIT ने रिपोर्ट दे दी, मंजूरी मांग ली, लेकिन सरकार बैठी है। जनवरी आ गया, 19 अगस्त से यह फैसला लटका है। अब और नहीं चलेगा।” कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दो हफ्ते में कानून के अनुसार फैसला लें – मंजूरी दें या न दें, लेकिन स्पष्ट जवाब दें। बेंच में जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मंत्री एक सार्वजनिक पदाधिकारी हैं, उन्हें जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। उनकी टिप्पणी ने न केवल कर्नल सोफिया की गरिमा को ठेस पहुंचाई, बल्कि सेना की एकता और राष्ट्रीय भावना पर भी सवाल उठाए। CJI ने कहा, “ऐसे समय में जब देश संवेदनशील मुद्दों से गुजर रहा है, मंत्री को शब्दों का ध्यान रखना चाहिए।”
कर्नल सोफिया कुरैशी: बहादुरी की मिसाल
- कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की एक प्रमुख अधिकारी हैं,
- जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन्होंने न केवल सैन्य रणनीति समझाई,
- बल्कि महिलाओं की ताकत का प्रतीक बनीं।
- उनका बयान सेना की बहादुरी और एकता का प्रतीक था,
- लेकिन मंत्री के बयान ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की।
- यह मामला महिलाओं, सेना और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा है।
कर्नल सोफिया केस : राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह केस राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। कांग्रेस ने मंत्री के इस्तीफे की मांग की, जबकि बीजेपी ने कहा कि बयान गलत समझा गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ है – कानून सबके लिए बराबर है, चाहे पद कितना भी ऊंचा हो। यह फैसला दिखाता है कि न्यायपालिका सेना के सम्मान और सांप्रदायिक सद्भाव की रक्षा के लिए कितनी सजग है।
अब सबकी नजरें मध्य प्रदेश सरकार पर टिकी हैं। दो हफ्ते में क्या फैसला आता है? क्या मुकदमा चलेगा? यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन आज का संदेश स्पष्ट है – देरी न्याय में अन्याय है, और सेना के सम्मान पर कोई समझौता नहीं होगा।
