पप्पू यादव बागेश्वर धाम
पप्पू यादव बागेश्वर धाम पप्पू यादव ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री को चोर-उचक्का कहकर लताड़ा। कथावाचक बनाने पर सवाल, बाबा पर तीखा हमला। राजनीति और धार्मिक विवाद गरमाया।

हाल ही में बिहार की राजनीति में एक नया तूफान उठा है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा या धीरेंद्र शास्त्री के नाम से मशहूर) पर कड़ी आपत्ति जताई है। पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने उन्हें सीधे “चोर-उचक्का” कहकर संबोधित किया और कहा कि ऐसे लोगों को कथावाचक बनाकर समाज को गुमराह किया जा रहा है। उनका बयान था – “ये कौन है धीरेंद्र? … चोर-उचक्कों को कथावाचक बना रहे हो! ओशो हैं क्या, आचार्य राममूर्ति हैं क्या?”
यह विवाद तब और गहरा हो गया जब पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री की तुलना प्रेमानंद बाबा जैसे सच्चे संतों से की, जो हमेशा मुस्कुराते रहते हैं और समाज सेवा में लगे रहते हैं। पप्पू यादव का कहना है कि असली संत तो वे हैं जो आध्यात्मिकता और प्रेम का संदेश देते हैं, न कि विवादास्पद बयानबाजी करने वाले।
पप्पू यादव बागेश्वर धाम : विवाद की जड़ क्या है?
यह हमला धीरेंद्र शास्त्री के हालिया बयानों पर केंद्रित है। उत्तर प्रदेश के बांदा में आरएसएस के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था – “जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया, उस दिन न शर्मा बचेगा, न वर्मा, न क्षत्रिय, न रविदास वाले”। इस बयान को जातिवाद और राष्ट्र-प्रतीक से जोड़कर काफी आलोचना हुई। पप्पू यादव ने इसे समाज को बांटने वाली बात माना और कहा कि ऐसे लोग सनातन धर्म की छवि खराब कर रहे हैं।
- #पप्पू यादव ने पहले भी कई बार धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा है।
- महाकुंभ के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने 60 करोड़ लोगों के स्नान का दावा किया था,
- जिसे पप्पू यादव ने “महाझूठ” और “महापाप” बताया।
- उन्होंने कहा कि कुंभ एक प्राचीन आस्था है,
- जिसका बागेश्वर बाबा को कुछ पता नहीं।
- पप्पू यादव ने यहां तक कहा कि “ऐसे बाबाओं को हम बंदर कहते हैं”,
- जो गरीबों और जनता के बारे में बेतुकी बातें करते हैं।
पप्पू यादव का राजनीतिक रुख
पप्पू यादव अक्सर सामाजिक न्याय, दलित-पिछड़े वर्गों के हितों और धर्म के नाम पर राजनीति का विरोध करते हैं। उनका मानना है कि कुछ कथावाचक और बाबा राजनीतिक एजेंट की तरह काम कर रहे हैं, जो समाज में फूट डालते हैं। धीरेंद्र शास्त्री के समर्थक उन्हें हनुमान भक्त और सनातन धर्म के प्रचारक मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें विवादास्पद और मार्केटिंग पर आधारित बताते हैं। पप्पू यादव ने उन्हें “फ्रॉड”, “नटवरलाल” और यहां तक कि “लफुआ” जैसे शब्दों से भी संबोधित किया है।
समाज पर प्रभाव
- यह विवाद धर्म और राजनीति के मिश्रण को उजागर करता है।
- धीरेंद्र शास्त्री के लाखों अनुयायी हैं, जो उनकी कथाओं से प्रेरित होते हैं।
- वहीं, पप्पू यादव का बयान उनके समर्थकों में काफी गूंजा है,
- जो इसे साहसिक मानते हैं।
- लेकिन इससे सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ सकता है।
- सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा छाया रहा,
- जहां कुछ लोग पप्पू यादव को लफंगा कह रहे हैं,
- तो कुछ उनका समर्थन कर रहे हैं।
पप्पू यादव का यह बयान न सिर्फ व्यक्तिगत हमला है, बल्कि धर्मांधता, झूठे चमत्कारों और समाज को बांटने वाली बातों के खिलाफ एक बड़ा संदेश भी है। आगे क्या होगा? क्या धीरेंद्र शास्त्री कोई जवाब देंगे या विवाद थम जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन यह साफ है कि आज के दौर में धर्म, राजनीति और सोशल मीडिया कितने गहराई से जुड़े हुए हैं।
