पटना UGC छात्र झड़प
पटना UGC छात्र झड़प पटना में UGC के नए नियमों और आरक्षण लागू करने के समर्थन में हजारों छात्र सड़कों पर उतरे। जेपी गोलंबर पर पुलिस से झड़प, बैरिकेड तोड़े, 2 छात्र नेता हिरासत में। सुप्रीम कोर्ट रोक के बाद उग्र प्रदर्शन की पूरी डिटेल।

बिहार की राजधानी पटना में एक बड़ा छात्र प्रदर्शन देखने को मिला। हजारों छात्र UGC (University Grants Commission) के नए नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) के समर्थन में सड़कों पर उतर आए। ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, भेदभाव रोकने और जातिगत उत्पीड़न पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाए गए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर हाल ही में रोक (स्टे) लगाए जाने के बाद छात्रों में रोष भड़क उठा।
प्रदर्शन पटना कॉलेज से शुरू होकर गांधी मैदान की ओर बढ़ा, लेकिन पुलिस ने जेपी गोलंबर पर उन्हें रोक दिया। इससे स्थिति बिगड़ गई और पुलिस-छात्रों के बीच धक्का-मुक्की, बैरिकेड तोड़ने और जोरदार झड़प हुई। पुलिस ने दो प्रमुख छात्र नेताओं – मनीष यादव और अमर आजाद – को हिरासत में ले लिया। यह घटना UGC नियमों को लेकर देशव्यापी विवाद का हिस्सा है, जहां एक तरफ सामान्य वर्ग के छात्र विरोध कर रहे हैं, वहीं SC, ST, OBC और बहुजन समुदाय के छात्र इसे लागू करने की मांग पर अड़े हैं।
पटना UGC छात्र झड़प: UGC के नए नियम क्या हैं?
UGC ने जनवरी 2026 में ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ अधिसूचित किए। इनका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न और असमानता को खत्म करना है। प्रमुख प्रावधान:
- विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता समिति का गठन।
- जातिगत उत्पीड़न की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई।
- भेदभाव रोकने के लिए दंडात्मक प्रावधान।
- आरक्षण और समावेशी नीतियों को मजबूत करना।
कुछ छात्र संगठनों का दावा है कि ये नियम 65% तक आरक्षण या विशेष सुरक्षा प्रदान करते हैं, जो पिछड़े वर्गों के लिए फायदेमंद हैं। लेकिन सामान्य वर्ग के छात्र इन्हें “भेदभावपूर्ण” और “जातिवादी” बता रहे हैं, क्योंकि वे इन्हें सामान्य वर्ग के खिलाफ मानते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नियमों पर स्टे लगा दिया, जिससे समर्थक छात्र नाराज हो गए।
पटना प्रदर्शन की पूरी घटना
सोमवार सुबह पटना यूनिवर्सिटी और पटना कॉलेज के छात्रों ने बड़े पैमाने पर जुटना शुरू किया। ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (ABSU), स्वर्ण समाज एकता मंच के कुछ हिस्सों और अन्य SC-ST-OBC संगठनों ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। छात्रों ने प्लेकार्ड उठाए – “UGC नियम लागू करो”, “भेदभाव बंद करो”, “समानता के लिए लड़ाई” आदि।
- मार्च गांधी मैदान तक पहुंचने की कोशिश में जेपी गोलंबर पर पुलिस बैरिकेड से टकराया।
- छात्रों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की,
- नारे लगाए और पुलिस पर आरोप लगाया कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं।
- पुलिस ने लाठीचार्ज से बचते हुए भीड़ को काबू करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति उग्र हो गई।
दो छात्र नेता हिरासत में लिए गए – मनीष यादव (जो पहले भी कई आंदोलनों में सक्रिय रहे) और अमर आजाद। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि “हम सिर पर कफन बांधकर निकले हैं, नियम लागू होने तक पीछे नहीं हटेंगे।” ट्रैफिक जाम हुआ, शहर में तनाव फैला, लेकिन शाम तक स्थिति नियंत्रण में आ गई।
क्यों मचा बवाल? विवाद के दोनों पक्ष
यह प्रदर्शन UGC नियमों पर गहरा विभाजन दिखाता है:
समर्थक पक्ष (SC, ST, OBC छात्र):
- नियम भेदभाव रोकेंगे, उच्च शिक्षा में समान अवसर देंगे।
- वे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का स्टे अन्याय है,
- और नियम तुरंत लागू होने चाहिए।
विरोधी पक्ष (सामान्य वर्ग):
- नियम अस्पष्ट, भेदभावपूर्ण और सामान्य छात्रों के अधिकार छीनने वाले हैं।
- वे “काला कानून वापस लो” के नारे लगा रहे हैं।
- दिल्ली, लखनऊ, जयपुर समेत कई शहरों में विरोध हो रहा है।
पटना में समर्थन प्रदर्शन इसलिए उभरा क्योंकि बिहार में पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी है और आरक्षण मुद्दा संवेदनशील है। राजनीतिक दल भी विभाजित – कुछ NDA पर जातिवाद फैलाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि अन्य इसे समानता का कदम बता रहे हैं।
विभिन्न प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
छात्र संगठन:
ABSU और अन्य ने चक्का जाम और राष्ट्रव्यापी हड़ताल की धमकी दी। एक छात्र ने कहा, “यह सिर्फ नियमों की लड़ाई नहीं, समानता की लड़ाई है।”
पुलिस और प्रशासन:
- पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने की कोशिश की गई,
- लेकिन उग्रता पर कार्रवाई जरूरी थी।
- हिरासत में लिए गए नेताओं से पूछताछ जारी।
मीडिया और सोशल मीडिया:
- घटना वायरल हुई, जहां एक तरफ समर्थन, दूसरी तरफ आलोचना।
- कुछ रिपोर्ट्स में इसे “जातिगत ध्रुवीकरण” बताया गया।
राष्ट्रीय स्तर: दिल्ली के नॉर्थ कैंपस से लेकर UP, राजस्थान तक विरोध और समर्थन दोनों चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजर।
निष्कर्ष: शिक्षा में समानता vs विभाजन का सवाल
- पटना का यह प्रदर्शन UGC नियमों को लेकर देशव्यापी बहस का प्रतीक है।
- जहां एक पक्ष इसे उच्च शिक्षा में न्याय का कदम मानता है,
- वहीं दूसरा पक्ष इसे विभाजनकारी बताता है।
- छात्रों की सड़क पर उतरना दिखाता है कि शिक्षा नीति कितनी संवेदनशील है।
सरकार और UGC को चाहिए कि पारदर्शी तरीके से नियमों की समीक्षा करें, ताकि सभी वर्गों के हित सुरक्षित रहें। सुप्रीम कोर्ट का फैसला निर्णायक होगा, लेकिन तब तक ऐसे प्रदर्शन जारी रह सकते हैं। शिक्षा का मकसद समानता और विकास है, न कि विभाजन। उम्मीद है कि संवाद से इस विवाद का समाधान निकलेगा, ताकि छात्र पढ़ाई पर फोकस कर सकें, न कि सड़कों पर।
