संसद हंगामा सस्पेंशन
संसद हंगामा सस्पेंशन लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के दौरान भारी हंगामा, स्पीकर की ओर पेपर फेंकने पर 8 विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। सदन की कार्यवाही प्रभावित, सख्त कार्रवाई से राजनीतिक तनाव बढ़ा।

भारतीय संसद, जो लोकतंत्र की मंदिर के रूप में जानी जाती है, आजकल हंगामे और अनुशासनहीनता की खबरों से सुर्खियों में बनी हुई है। 3 फरवरी 2026 को बजट सत्र के दौरान लोकसभा में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने सदन की गरिमा पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया। विपक्षी सांसदों ने स्पीकर की कुर्सी की ओर कागज के टुकड़े उछाल दिए, जिसके बाद स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। यह घटना न केवल संसदीय मर्यादा की अवहेलना है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी एक काला धब्बा साबित हुई है।
संसद हंगामा सस्पेंशन: घटना का क्रम और पृष्ठभूमि
- बजट सत्र का यह दिन काफी महत्वपूर्ण था।
- सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा चल रही थी।
- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बोलने वाले थे।
उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब (मेमॉयर) का हवाला देते हुए कुछ बयान देने की कोशिश की, जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई। सत्ता पक्ष के सदस्यों का कहना था कि अप्रकाशित किताब या गैर-आधिकारिक सामग्री का सदन में उल्लेख नहीं किया जा सकता। इस पर बहस तेज हुई और हंगामा शुरू हो गया।
हंगामे के बीच कुछ विपक्षी सांसद सदन के वेल में आ गए, नारे लगाए और स्पीकर की कुर्सी की दिशा में कागज के टुकड़े फेंक दिए।
यह दृश्य बेहद आपत्तिजनक था, क्योंकि संसद सदन में स्पीकर की कुर्सी को सर्वोच्च माना जाता है और उसकी अवमानना को गंभीर अपराध समझा जाता है। स्पीकर (पीठासीन अधिकारी) ने तुरंत इसकी निंदा की और कहा कि यह संसदीय मर्यादा का घोर उल्लंघन है। ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दोपहर करीब तीन बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें इन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (या पीठासीन अधिकारी) ने 8 विपक्षी सांसदों को मौजूदा बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित घोषित कर दिया। सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
निलंबित सांसदों के नाम
विभिन्न समाचार स्रोतों के अनुसार निलंबित सांसद मुख्य रूप से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से हैं। इनमें शामिल हैं:
- मणिक्कम टैगोर (कांग्रेस, तमिलनाडु)
- गुरजीत सिंह औजला (कांग्रेस, पंजाब)
- अमरिंदर सिंह राजा वॉरिंग (कांग्रेस, पंजाब)
- किरण कुमार रेड्डी (कांग्रेस)
- हिबी ईडन (कांग्रेस, केरल)
- डीन कुरियाकोस
- प्रशांत पडोले
- एस. वेंकटेशन (या एस वेंकट रमन, सीपीआई(एम) से संभावित)
कुछ रिपोर्टों में संख्या 6 से 8 के बीच बताई गई है, लेकिन अधिकांश स्रोत 8 सांसदों की पुष्टि करते हैं। ये सभी सांसद हंगामे में शामिल थे और स्पीकर की ओर कागज फेंकने के आरोप में सस्पेंड किए गए।
संसदीय मर्यादा और लोकतंत्र पर प्रभाव
- संसद में हंगामा नई बात नहीं है,
- लेकिन स्पीकर पर कागज फेंकना एक नया निचला स्तर है।
- यह घटना दिखाती है कि राजनीतिक मतभेद कितने गहरे हो चुके हैं।
- सत्ता पक्ष ने इसे “संसद की गरिमा का अपमान” बताया है,
- जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार चर्चा को दबा रही है।
- निलंबन के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई कांग्रेस नेता संसद के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
- यह कार्रवाई संसद की कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए जरूरी थी,
- लेकिन इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है।
- बजट सत्र में महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे अर्थव्यवस्था, व्यापार समझौते (
- अमेरिका-भारत ट्रेड डील) और अन्य नीतिगत चर्चाओं पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष: संसद की गरिमा बचानी होगी
संसद हंगामा सस्पेंशन: लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन वह अनुशासित और सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए। स्पीकर पर पेपर फेंकना किसी भी बहाने जायज नहीं ठहराया जा सकता। उम्मीद है कि सभी दल मिलकर संसद को पुनः गरिमामय बनाने में सहयोग करेंगे। यदि ऐसे हंगामे जारी रहे, तो जनता का संसद पर विश्वास कमजोर होगा।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता और संवाद का प्रतीक है। आशा है कि आने वाले दिनों में सदन सुचारू रूप से चलेगा और महत्वपूर्ण मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा होगी।
