US इंडिया ट्रेड डील
US इंडिया ट्रेड डील शशि थरूर ने US-India ट्रेड डील पर मोदी सरकार से स्पष्टता मांगी, कहा जश्न मनाना चाहते हैं लेकिन डिटेल्स पता नहीं। ट्रंप-मोदी ट्वीट्स काफी नहीं, किसानों-उद्योगों के हितों पर सवाल, संसद में रखें डील।

भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (US-India Trade Deal) को लेकर हाल ही में काफी चर्चा हुई है। एक तरफ जहां सरकार और कुछ लोग इसे बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका बयान “हम तो जश्न मनाना चाहेंगे लेकिन…” काफी सुर्खियों में रहा। थरूर ने मोदी सरकार से पारदर्शिता की मांग की है और कई अनुत्तरित सवालों को सामने रखा है। यह ब्लॉग पोस्ट इसी मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करता है।
US इंडिया ट्रेड डील: क्या हुआ है समझौते में?
हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते की घोषणा हुई, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट्स के आधार पर यह बताया गया कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। बदले में भारत ने रूसी तेल खरीद को सीमित करने या रोकने जैसी कुछ शर्तें मानी हैं, ऐसा दावा किया जा रहा है। यह समझौता उन तनावों के बाद आया है, जहां अमेरिका ने भारत पर उच्च टैरिफ लगाए थे, खासकर रूस से तेल आयात और अन्य व्यापारिक मुद्दों पर।
- यह डील भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है,
- क्योंकि अमेरिका भारत का प्रमुख निर्यात बाजार रहा है।
- लेकिन हाल के वर्षों में चीन के विकल्प के रूप में भारत की
- स्थिति मजबूत होने के बावजूद, टैरिफ युद्ध ने भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुंचाया था।
- थरूर ने इसे सकारात्मक कदम माना है कि टैरिफ कम होना अच्छी बात है,
- लेकिन उन्होंने जोर दिया कि इससे ज्यादा उत्साह नहीं दिखाना चाहिए जब तक पूरी डील की शर्तें स्पष्ट न हों।
शशि थरूर के प्रमुख सवाल: पारदर्शिता की मांग
शशि थरूर ने संसद में और मीडिया के माध्यम से मोदी सरकार से कई करारे सवाल पूछे हैं। उनका मुख्य बिंदु यह है कि केवल ट्रंप और मोदी के ट्वीट्स से डील की पूरी तस्वीर नहीं मिलती। उन्होंने कहा, “हम जश्न मनाना चाहते हैं लेकिन… क्या यह पर्याप्त है? संसदीय लोकतंत्र में जनता और संसद को पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।”
कुछ प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं:
क्या डील में भारतीय किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित है?
US इंडिया ट्रेड डील:अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में आसानी से प्रवेश मिलने पर भारतीय किसान प्रभावित हो सकते हैं। थरूर ने पूछा कि क्या बाजार पहुंच (market access) पर कोई शर्तें हैं जो भारतीय कृषि को नुकसान पहुंचा सकती हैं?
आयात पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- भारत का कुल आयात बिल लगभग 700 अरब डॉलर का है।
- थरूर ने व्यंग्यात्मक तरीके से पूछा, “क्या हम अन्य देशों से व्यापार बंद कर देंगे?
- क्या यह डील भारत को अमेरिका पर निर्भर बना देगी?”
ट्रंप और मोदी के ट्वीट्स ही क्यों?
- थरूर ने कहा कि “हमारे पास केवल श्री ट्रंप का ट्वीट और श्री मोदी का ट्वीट है।
- क्या यह पर्याप्त है? सरकार को संसद को विश्वास में लेकर पूरी डील की जानकारी देनी चाहिए।”
अन्य देशों से व्यापार पर असर?
- अगर डील में रूस से तेल खरीद रोकने जैसी शर्त है,
- तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय व्यापार नीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- थरूर ने स्पष्ट किया कि वे डील के खिलाफ नहीं हैं,
- बल्कि वे चाहते हैं कि सरकार पारदर्शी तरीके से जवाब दे।
- उन्होंने कहा कि उच्च टैरिफ से बेहतर कम टैरिफ है,
- लेकिन बिना शर्तों के समझे जश्न मनाना जल्दबाजी होगी।
मोदी सरकार की स्थिति और राजनीतिक संदर्भ
मोदी सरकार ने इस डील को भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की मजबूती के रूप में पेश किया है। लेकिन विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इसे “अस्पष्ट” और “गोपनीय” बता रही है। राहुल गांधी ने भी इसे “पीएम कम्प्रोमाइज्ड” करार दिया है। थरूर का रुख थोड़ा संतुलित है – वे सरकार की तारीफ भी करते रहे हैं विदेश नीति पर, लेकिन यहां उन्होंने सवाल उठाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की याद दिलाई है।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत जैसे विकासशील देश के लिए व्यापार समझौते रोजगार, निर्यात और आत्मनिर्भरता से जुड़े होते हैं। अगर डील में भारतीय हितों की अनदेखी हुई तो लंबे समय में नुकसान हो सकता है।
निष्कर्ष
शशि थरूर के सवाल इसलिए प्रासंगिक हैं क्योंकि वे लोकतंत्र की बुनियाद – पारदर्शिता और जवाबदेही – पर जोर देते हैं। भारत-अमेरिका ट्रेड डील निश्चित रूप से एक अवसर है, लेकिन इसे बिना जांचे-परखे जश्न में बदलना जोखिम भरा हो सकता है। सरकार को चाहिए कि वह संसद में पूरी डील रखे, उसके फायदे-नुकसान बताए और जनता के सवालों का जवाब दे।
अंत में, थरूर का बयान सही मायनों में चिंतनशील है: “हम तो जश्न मनाना चाहते हैं लेकिन…” – यह “लेकिन” भारतीय हितों की रक्षा का प्रतीक है। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही स्पष्टता लाएगी और सच्चा जश्न मनाने का मौका मिलेगा।
