योगी अपराध बयान
योगी अपराध बयान CM योगी आदित्यनाथ ने एनकाउंटर पर सवाल उठाने वालों को ललकारा, कहा पुलिस गोली न मारे तो क्या खुद गोली खाए? अपराधियों को उसी भाषा में जवाब देने की नीति दोहराई, अखिलेश पर भी निशाना।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक धमाकेदार बयान हाल ही में काफी चर्चा में रहा है: “पुलिस गोली न चले तो क्या खुद गोली खाए?” यह वाक्य अपराधियों को सीधी ललकार है और योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का प्रतीक बन चुका है। यह बयान अपराध और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री की कठोर नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। योगी आदित्यनाथ ने बार-बार कहा है कि अपराधी अगर पुलिस पर गोली चलाएंगे, तो पुलिस आत्मरक्षा में जवाब देगी। अगर पुलिस ने गोली नहीं चलाई, तो क्या अपराधी पुलिस को गोली मारकर भाग जाएंगे? दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकतीं।
योगी अपराध बयान: योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
2017 में सत्ता संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी। पहले के दौर में माफिया, गैंगस्टर और अपराधी खुलेआम राज्य में दहशत फैलाते थे। एन्काउंटर, क्रॉस-फायरिंग और पुलिस एक्शन की वजह से अपराधियों में खौफ पैदा हुआ। मुख्यमंत्री ने कई बार सार्वजनिक मंचों से अपराधियों को चेतावनी दी है कि या तो सरेंडर करो, या फिर कानून के दायरे में आओ, वरना पुलिस का जवाब कड़ा होगा।
- इस बयान का संदर्भ अक्सर पुलिस एन्काउंटर या क्राइम कंट्रोल के दौरान आता है।
- योगी कहते हैं कि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है।
- अगर कोई अपराधी हथियारबंद होकर पुलिस पर हमला करता है,
- तो पुलिस के पास आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।
- “अगर अपराधी गोली चलाने की आजादी रखता है,
- तो पुलिस के पास भी जवाब देने की आजादी होनी चाहिए।”
- यह विचारधारा राज्य में अपराध दर को कम करने में काफी हद तक सफल रही है।
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हत्या, लूट, बलात्कार और गैंगस्टर एक्टिविटी में उल्लेखनीय कमी आई है।
अपराधियों पर कड़ा संदेश
योगी आदित्यनाथ का यह बयान अपराधियों को मनोवैज्ञानिक दबाव देने का भी माध्यम है। वे अक्सर कहते हैं – “जुर्म करोगे तो गोली खाओगे।” ऑपरेशन लंगड़ा जैसे अभियानों में पुलिस ने गैंगस्टरों के पैरों में गोली मारकर उन्हें अक्षम किया, ताकि वे दोबारा अपराध न कर सकें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि फर्जी एन्काउंटर नहीं होंगे, लेकिन अगर अपराधी पुलिस पर हमला करेगा, तो जवाबी कार्रवाई निश्चित है।
- यह नीति विवादास्पद भी रही है।
- कुछ लोग इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हैं,
- जबकि समर्थक इसे आवश्यक बताते हैं
- क्योंकि पहले अपराधी पुलिस को डराते थे।
- योगी सरकार का मानना है कि कानून का राज तभी स्थापित होगा जब अपराधी को लगे कि उसका कोई डर नहीं है।
जनता की सुरक्षा और पुलिस का मनोबल
इस बयान से पुलिस का मनोबल भी बढ़ा है। पहले पुलिसकर्मी अपराधियों से डरते थे क्योंकि राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई रुक जाती थी। अब पुलिस को खुली छूट है कि वे कानून के दायरे में रहकर अपराध से लड़ें। योगी ने कई बार कहा है कि पुलिस अगर गोली नहीं चलाएगी, तो अपराधी पुलिस को गोली मारकर भाग जाएगा। यह सवाल जनता से भी जुड़ा है – क्या हम चाहते हैं कि अपराधी खुले घूमें और पुलिस चुप रहे?
निष्कर्ष
- योगी आदित्यनाथ का “पुलिस गोली न चले तो क्या खुद गोली खाए?”
- वाला बयान सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि पूरी नीति का सार है।
- यह अपराधियों को चेतावनी है, पुलिस को प्रोत्साहन है
- और जनता को भरोसा है कि राज्य में कानून का राज चलेगा।
- उत्तर प्रदेश में अपराध पर लगाम लगाने के लिए यह कठोर रुख जरूरी था,
- और परिणाम सामने हैं – अपराध दर में कमी,
- निवेश में वृद्धि और जनता में सुरक्षा की भावना।
योगी आदित्यनाथ की यह छवि है – एक ऐसा नेता जो अपराध से समझौता नहीं करता। अपराधी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून सबके लिए बराबर है। यह बयान न सिर्फ धमाकेदार है, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर का प्रतीक भी है।
