Karnataka CM Speculation
Karnataka CM Speculation कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली पहुंचे और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस बैठक ने राज्य की सियासत को और गरमा दिया, राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गईं।

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर आग लग गई है। 9 मार्च 2026 को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार दिल्ली पहुंच गए। उनके साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी थे। दोनों नेता कलाबुरगी से स्पेशल फ्लाइट से रविवार शाम दिल्ली रवाना हुए। इस यात्रा ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। सत्ता संभालने के बाद से चल रही सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की जंग अब दिल्ली के दरबार तक पहुंच गई है। क्या यह CM पद बदलाव की आखिरी तैयारी है? या फिर सिर्फ रूटीन मीटिंग? सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
Karnataka CM Speculation: क्या हुआ कलाबुरगी में?
रविवार को कलाबुरगी जिले के चित्तापुर में खरगे और शिवकुमार ने संयुक्त रूप से 1069 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। एक मंच पर दोनों नेता दिखे। प्रोजेक्ट्स में सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं शामिल थीं। लेकिन कार्यक्रम खत्म होते ही दोनों दिल्ली के लिए रवाना हो गए। शिवकुमार का टूर प्रोग्राम साफ बताता है कि वे सोमवार सुबह बेंगलुरु लौटेंगे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे दिल्ली में एक दिन और रुक सकते हैं।
CM पद की पुरानी जंग क्यों गरमाई?
- कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल की थी।
- उस वक्त सिद्धारमैया को CM और डीके शिवकुमार को डिप्टी CM बनाया गया।
- दोनों नेताओं के बीच आधा-आधा कार्यकाल का अनकहा समझौता माना जाता था।
- यानी सिद्धारमैया ढाई साल CM रहेंगे, फिर शिवकुमार की बारी।
- अब सरकार का ढाई साल पूरा होने वाला है।
- बजट सत्र चल रहा है, जो 27 मार्च को खत्म होगा।
सिद्धारमैया ने शनिवार को साफ कहा – “अगर हाईकमान चाहे तो मैं दो बजट और पेश कर सकता हूं।” उन्होंने रिकॉर्ड 17वां बजट पेश किया है। वहीं शिवकुमार के वफादार विधायक दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। कुछ विधायकों ने खरगे को चिट्ठी लिखकर शिवकुमार को CM बनाने की मांग की है।
दिल्ली दौरे का मतलब क्या?
- शिवकुमार दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मिलेंगे।
- सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी,
- सोनिया गांधी और खरगे के साथ विस्तृत चर्चा होगी।
- पिछले कई महीनों से शिवकुमार कई बार दिल्ली जा चुके हैं।
- हर बार CM बदलाव की अटकलें तेज हो जाती हैं।
- इस बार बजट सत्र के बीच यह यात्रा खास इसलिए है क्योंकि सिद्धारमैया ने हाईकमान से स्पष्टता मांगी है।
डीके शिवकुमार ने पहले कहा था – “पार्टी ने नेताओं से मुंह बंद रखने को कहा है।” लेकिन अब उन्होंने कहा, “समय सब सवालों का जवाब देगा।” उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे दिल्ली लॉबिंग के लिए न आएं, लेकिन फिर भी कई विधायक रवाना होने को तैयार हैं।
दोनों गुटों की स्थिति
- सिद्धारमैया गुट: CM का दावा मजबूत। वे कहते हैं कि सरकार स्थिर है, विकास हो रहा है। 136 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है।
- डीके शिवकुमार गुट: शिवकुमार को वीरेंद्र पाटिल की तरह “लौह पुरुष” माना जाता है। वे संगठन में मजबूत हैं। दक्षिण कर्नाटक और वोकलिंग समुदाय उनका समर्थन करता है।
कांग्रेस हाईकमान इस बार जल्द फैसला ले सकता है। खरगे ने पहले कहा था कि फैसला सामूहिक रूप से लिया जाएगा।
BJP का तंज
- विपक्षी भाजपा इस पूरे मामले का मजा ले रही है।
- भाजपा प्रवक्ता कह रहे हैं – “कांग्रेस में सत्ता की लड़ाई चल रही है,
- विकास रुक गया है।” राज्यपाल के साथ भी विवाद हो चुका है।
- विपक्ष आरोप लगा रहा है कि कांग्रेस सरकार अस्थिर है।
क्या होगा आगे?
Karnataka CM Speculation: बजट सत्र 27 मार्च को खत्म होगा। उसके बाद शिवकुमार डिनर रखने वाले हैं, जिसमें सभी मंत्रियों, विधायकों और MLC को बुलाया गया है। अगर हाईकमान शिवकुमार को CM बनाता है तो कर्नाटक में बड़ा फेरबदल होगा। कैबिनेट रिशफल भी संभव है। अगर सिद्धारमैया बने रहते हैं तो भी तनाव जारी रहेगा।
- कर्नाटक कांग्रेस के इतिहास में यह पहली बार नहीं है
- जब CM पद को लेकर घमासान हुआ हो।
- 2019 में भी इसी तरह की जंग देखी गई थी।
- लेकिन इस बार चुनाव 2028 के हैं,
- इसलिए हाईकमान जल्द सुलझाना चाहता है।
निष्कर्ष
- 9 मार्च 2026 का दिन कर्नाटक की सियासत में याद रहेगा।
- डीके शिवकुमार के दिल्ली दौरे ने CM पद की अटकलों को नई उड़ान दे दी है।
- खरगे के साथ यात्रा ने इसे और महत्वपूर्ण बना दिया।
- अब सबकी नजरें 16-17 मार्च के आसपास होने वाली हाईकमान मीटिंग पर हैं।
- क्या सिद्धारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या शिवकुमार की बारी आएगी? क्या कांग्रेस एकजुट रह पाएगी या फूट दिखेगी?
कर्नाटक की जनता विकास चाहती है, न कि सत्ता की लड़ाई। लेकिन फिलहाल सियासी गरमी चरम पर है। समय ही बताएगा कि दिल्ली का यह दौरा सिर्फ मीटिंग था या फिर CM कुर्सी का फैसला।
