Going Dark Technique
Going Dark Technique Going Dark’ एक समुद्री रणनीति है जिसमें जहाज़ अपनी AIS ट्रैकिंग प्रणाली बंद कर देता है ताकि उसकी लोकेशन ट्रैक न हो सके। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते ईरान तनाव के बीच कई जहाज़ इस तरीके का इस्तेमाल कर चुपके से गुजरने की कोशिश कर रहे हैं।

‘गोइंग डार्क’ या ‘Going Dark’ समुद्री दुनिया की एक ऐसी ट्रिक है, जिसमें जहाज़ जानबूझकर खुद को रडार और ट्रैकिंग सिस्टम से “गायब” जैसा बना लेते हैं, ताकि दुश्मन या हमलावर देश उन्हें आसानी से ट्रैक न कर सके। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील और युद्ध प्रभावित इलाकों में ये तरीका हाल के दिनों में खूब चर्चा में है, क्योंकि यहीं से गुजरते हुए एक भारत‑आगामी टैंकर ने एआईएस बंद करके सुरक्षित निकलने में कामयाबी पाई।
‘Going Dark Technique’ क्या होता है?
- समुद्री भाषा में ‘गोइंग डार्क’ का मतलब है जहाज़ का अपना
- ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) और ट्रांसपोंडर बंद कर देना।
- सामान्य तौर पर AIS लगातार जहाज़ की पहचान, लोकेशन,
- दिशा और स्पीड का डेटा समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल,
- दूसरे जहाज़ों और मॉनिटरिंग एजेंसियों तक भेजता रहता है।
- अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार शांति के समय AIS को ऑन रखना अनिवार्य होता है,
- ताकि टकराव से बचा जा सके और जहाज़ों की मॉनिटरिंग ठीक से हो।
लेकिन जब जहाज़ किसी हाई‑रिस्क ज़ोन, जैसे कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, से गुजर रहा हो और आसपास मिसाइल हमले, ड्रोन स्ट्राइक या जीपीएस जैमिंग जैसी गतिविधियां चल रही हों, तब कई बार जहाज़ अस्थायी रूप से AIS बंद कर देते हैं। यही स्टेप “गोइंग डार्क” कहलाता है, जिससे जहाज़ अचानक से ट्रैकिंग वेबसाइटों और मॉनिटरिंग सिस्टम से गायब दिखने लगता है।
होर्मुज से चुपके निकलने में कैसे मदद मिली?
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है,
- जहां से दुनिया के तेल टैंकरों का बड़ा हिस्सा गुजरता है,
- लेकिन अभी यहां ईरान,
- इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव और हमलों की वजह से हालात बेहद संवेदनशील हैं।
- रिपोर्टों के अनुसार, भारत आने वाला एक क्रूड
- ऑयल टैंकर सऊदी अरब के रास तनूरा पोर्ट से लोड होकर निकला,
- फिर होर्मुज के अंदर पहुंचने के बाद अचानक उसका अंतिम AIS सिग्नल रिकॉर्ड हुआ और
- वह ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया।
- यह संकेत था कि जहाज़ ने खतरनाक हिस्से से गुजरते समय अपना AIS ऑफ कर दिया था,
- यानी उसने “गोइंग डार्क” मोड अपना लिया।
उद्योग स्रोतों का कहना है कि होर्मुज जैसे संकरे और खतरे वाले जलमार्ग से निकलने के दौरान दो‑दो भारत‑आगामी टैंकरों ने इसी तरह AIS और ट्रांसपोंडर बंद किए, ताकि उन पर मिसाइल या ड्रोन से टारगेटेड स्ट्राइक का जोखिम कम हो सके। जैसे ही ये जहाज़ हाई‑रिस्क ज़ोन से बाहर निकले, इन्होंने फिर से अपना AIS ऑन कर दिया और अगले दिन ये जहाज़ ट्रैकिंग सिस्टम पर दोबारा दिखाई देने लगे तथा सुरक्षित रूप से भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच गए।
Going Dark Technique: ऐसा करना नियमों के खिलाफ है या नहीं?
शांतिपूर्ण समय और सामान्य समुद्री रूट पर AIS को बंद करना इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन के नियमों के खिलाफ माना जाता है, क्योंकि इससे नेविगेशन की सेफ्टी पर सवाल उठते हैं और टकराव का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन जब बात युद्ध, कंफ्लिक्ट जोन या पायरेसी‑प्रोन क्षेत्रों की हो, तो कई देश और शिपिंग कंपनियां सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से AIS बंद करने की इजाजत देते हैं, ताकि जहाज़ दुश्मन की नज़र से बचकर निकल सके।
फिर भी, यह एक दोधारी तलवार जैसा कदम है, क्योंकि दुश्मन से छिपने के साथ‑साथ आसपास के दूसरे जहाज़ भी आपकी सटीक लोकेशन नहीं देख पाते, जिससे टकराव या दुर्घटना का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए ‘गोइंग डार्क’ को सिर्फ एक्सट्रीम सिचुएशन में, छोटे समय के लिए और बेहद प्लानिंग के साथ अपनाया जाता है।
डिजिटल ब्लैकआउट, GPS जैमिंग और शैडो वॉयज
होर्मुज में हाल के समय में जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग की वजह से पहले ही डिजिटल ब्लैकआउट जैसा माहौल बना हुआ है, जहां सौ‑सौ से ज्यादा टैंकर लोकेशन और नेविगेशन की दिक्कतों के कारण फंस रहे हैं। ऐसी स्थिति में कई टैंकर “डार्क शिप” या “शैडो फ्लीट” की तरह काम कर रहे हैं, यानी वे आधिकारिक तौर पर ट्रैकिंग सिस्टम से गायब रहते हैं, लेकिन असल में वे राडार, विजुअल नेविगेशन, जहाज़‑से‑जहाज़ कम्युनिकेशन और अनुभवी कप्तानों के दम पर अपना रास्ता बना रहे होते हैं।
- ‘गोइंग डार्क’ इसी बड़े पैटर्न का हिस्सा है,
- जहां जहाज़ कुछ समय के लिए डिजिटल दुनिया से खुद को
- काटकर सिर्फ पारंपरिक नेविगेशन और लोकल नॉलेज के भरोसे आगे बढ़ते हैं।
- होर्मुज से चुपके निकलने वाले भारत‑आगामी टैंकर ने भी यही
- तरीका अपनाकर मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचते हुए सुरक्षित मुंबई पहुंचने में सफलता पाई।
निष्कर्ष: तकनीक बंद करके भी सुरक्षा
Going Dark Technique कुल मिलाकर, ‘गोइंग डार्क’ एक ऐसी रणनीति है जिसमें जहाज़ खुद की डिजिटल “visibility” बंद करके अपनी फिजिकल सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे युद्धग्रस्त इलाकों में यह तरीका कई बार लाइफ‑सेवर साबित होता है, लेकिन साथ‑साथ यह भी याद रखना जरूरी है कि लगातार या बेवजह ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और समुद्री सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बन सकता है।
