China Iran Support
China Iran Support अमेरिकी हमले के बाद ईरान को चीन का खुला समर्थन मिल गया है। चीन ने ईरान की मदद के लिए बड़ा ऐलान करते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस फैसले से मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक कूटनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

मार्च 2026 की शुरुआत में मध्य पूर्व का हालात तेजी से बिगड़ गया। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिन्हें ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई उच्च अधिकारी मारे गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मिसाइल और ड्रोन हमलों से अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाया। इस संकट में चीन ने खुलकर ईरान का साथ दिया और अमेरिका-इजरायल को सैन्य कार्रवाई रोकने की कड़ी अपील की। चीन ने न केवल कूटनीतिक समर्थन दिया, बल्कि ईरान को विभिन्न स्तरों पर सहायता का ऐलान भी किया, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया।
अमेरिका-इजरायल के हमलों की पृष्ठभूमि
फरवरी 2026 के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों हमले किए। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और संभवतः शासन परिवर्तन लाना था। ईरान ने जवाब में सैकड़ों मिसाइलें और हजारों ड्रोन छोड़े, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता फैल गई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरा मंडराने लगा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा संभालता है। इन घटनाओं ने दुनिया को एक बड़े युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया।
China Iran Support: विदेश मंत्री वांग यी का बयान
- अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद चीन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
- चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर बात की और ईरान के संप्रभुता,
- सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया।
- उन्होंने अमेरिका और इजरायल से सैन्य अभियान तुरंत
- रोकने की मांग की तथा युद्ध को मध्य पूर्व में फैलने से रोकने की अपील की।
- चीन ने कहा कि वह ईरान के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी रखता है
- और तेहरान के वैध अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ा है।
Chine ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के साथ मिलकर आपात बैठक बुलाई और हमलों की निंदा की। बीजिंग ने स्पष्ट किया कि बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अस्वीकार्य है और बातचीत ही समाधान है। एक चीनी नागरिक की मौत के बाद चीन ने ईरान से अपने नागरिकों को निकालने की प्रक्रिया तेज की, लेकिन साथ ही ईरान के प्रति अपना समर्थन कम नहीं किया।
चीन की मदद: जहाज, तकनीक और अन्य सहायता
- चीन ने सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रखा।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने ईरान की ओर जहाज रवाना किए,
- जिनमें मिसाइल निर्माण से जुड़े सामग्री, ईंधन और अन्य रसायन हो सकते हैं।
- कुछ स्रोतों में दावा किया गया कि ये जहाज हथियारों और उन्नत तकनीक से लदे थे।
- ईरान को चीनी BeiDou नेविगेशन सिस्टम का सहारा मिला,
- जो GPS का विकल्प है और युद्ध में सटीक हमलों के लिए उपयोगी साबित हुआ।
- खुफिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि चीन ईरान को सैटेलाइट डेटा और उन्नत रडार सिस्टम
- जैसे YLC-8B प्रदान कर रहा है, जो पश्चिमी लड़ाकू विमानों का पता लगा सकता है।
ये कदम ईरान की मिसाइल क्षमता को मजबूत करने में सहायक साबित हो रहे हैं। चीन की ये मदद अप्रत्यक्ष है, लेकिन यह युद्ध की दिशा बदलने वाली हो सकती है।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
- चीन का यह रुख अमेरिका के लिए चुनौती है।
- बीजिंग ईरान के साथ आर्थिक संबंध मजबूत रखना चाहता है,
- क्योंकि ईरान उसका प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता है।
- युद्ध से तेल की कीमतें बढ़ने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का खतरा
- वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, जो चीन के हित में नहीं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि चीन प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है,
- लेकिन कूटनीतिक और तकनीकी मदद से ईरान को मजबूत कर
- अमेरिका को लंबे युद्ध में उलझा सकता है।
- यह रणनीति रूस-यूक्रेन युद्ध में भी दिखी थी।
ट्रंप प्रशासन ने चीन को चेतावनी दी है, लेकिन बीजिंग ने कहा है कि वह शांति चाहता है और अमेरिका-चीन संबंधों को अलग रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में शिखर वार्ता इस तनाव को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
China Iran Support अमेरिकी हमलों के बाद चीन का ईरान के पक्ष में उतरना वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव है। यह दिखाता है कि बहुध्रुवीय दुनिया में चीन अब खुलकर अपने सहयोगियों का साथ दे रहा है। यदि युद्ध लंबा खिंचा तो चीन की मदद ईरान को टिकने में सहायक होगी, लेकिन इससे विश्व युद्ध का खतरा भी बढ़ सकता है।
शांति की बहाली के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना होगा। अन्यथा, मध्य पूर्व की आग एशिया और दुनिया तक फैल सकती है। चीन का बड़ा ऐलान सिर्फ समर्थन नहीं, बल्कि नई विश्व व्यवस्था की झलक है।
