LPG संकट जवाब
LPG संकट जवाब LPG संकट को लेकर कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा। जानिए कोर्ट का रुख, केंद्र का जवाब और देशभर में इस संकट का असर। पूरी जानकारी विस्तार से पढ़ें।

मार्च 2026 में भारत में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की भारी किल्लत ने आम आदमी की रसोई को प्रभावित किया है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग रूट प्रभावित होने से आयात बाधित हुआ। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है, जहां सालाना लगभग 31-32 मिलियन टन की खपत होती है। इस संकट में घरों, होटलों, रेस्टोरेंट्स और छोटे उद्योगों में गैस सिलेंडर के लिए कतारें लग गईं। ब्लैक मार्केटिंग बढ़ी, जहां सिलेंडर 5000 रुपये तक बिक रहे थे। दिल्ली हाई कोर्ट के वकीलों की कैंटीन तक में मुख्य भोजन बंद हो गया। इसी बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल पूछे और जवाब मांगा। केंद्र ने आश्वासन दिया कि संकट से निपटने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
LPG संकट जवाब : संकट की वजह
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एलपीजी आयात को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।
- भारत का बड़ा हिस्सा ईरान और अन्य मध्य पूर्व देशों से एलपीजी आयात करता है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से सप्लाई चेन टूटी।
- सरकार ने पहले से ही चेतावनी दी थी, लेकिन जनता में अफवाहें फैलीं।
- पैनिक बुकिंग बढ़ी – रोजाना बुकिंग 5.57 मिलियन से बढ़कर 7.57 मिलियन हो गई।
- होटल-रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू काटा, कुछ ने दुकानें बंद कीं।
- छोटे ढाबे, हॉस्टल और अस्पताल भी प्रभावित हुए।
- विपक्ष ने संसद में हंगामा किया – राहुल गांधी,
- मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं ने सरकार पर पहले से इंतजाम न करने का आरोप लगाया।
बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका और कोर्ट के सवाल
नागपुर बेंच ऑफ बॉम्बे हाई कोर्ट में 6 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि घरेलू सप्लाई की बजाय एक्सपोर्ट को प्राथमिकता दी जा रही है। कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड जैसी कंपनियां घरेलू बाजार में पर्याप्त गैस नहीं दे रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि सरकार एक्सपोर्ट रोककर घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दे।
12 मार्च 2026 को जस्टिस अनिल किलोर और राज वाकोड़े की बेंच ने मामले को “गंभीर और अत्यंत महत्वपूर्ण” बताया। कोर्ट ने केंद्र सरकार (पेट्रोलियम मंत्रालय), विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पूछा – घरेलू संकट के बीच एक्सपोर्ट क्यों? सप्लाई कैसे सुनिश्चित होगी? जवाब सोमवार (17 मार्च) तक मांगा गया। अंतरिम आदेश में कोर्ट ने कहा कि घरेलू एलपीजी की स्टोरेज और सप्लाई सरकार की नीति के अनुसार हो।
केंद्र सरकार का जवाब
17 मार्च 2026 को केंद्र ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जवाब दाखिल किया। सरकार ने कहा कि स्थिति “एवर-इवॉल्विंग” (लगातार बदलती) है, लेकिन ईरान संकट का असर भारत पर न पड़े, इसके लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य बिंदु:
- घरेलू उत्पादन 10-31% बढ़ाया गया।
- रिफाइनरीज को अधिकतम एलपीजी उत्पादन का आदेश।
- एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट लागू कर घरेलू उपयोग को प्राथमिकता।
- PNG यूजर्स को अतिरिक्त एलपीजी कनेक्शन नहीं, पुराने सरेंडर करने होंगे।
- वैकल्पिक स्रोत – रूस, नाइजीरिया, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया से आयात।
- 3 सदस्यीय कमिटी गठित।
- 25 दिनों का इंटर-बुकिंग पीरियड लागू कर होर्डिंग रोकी।
- पैनिक बुकिंग और अफवाहों पर नकेल कसी।
कोर्ट ने सरकार के आश्वासनों पर याचिका खारिज कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैनिक फैलाने वालों पर निशाना साधा – “वे देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं।” पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को 100% सप्लाई सुनिश्चित है।
राजनीतिक हंगामा और जनता की मार
- संसद में विपक्ष ने सरकार को घेरा। खड़गे ने कहा –
- “सरकार को पहले पता था, इंतजाम क्यों नहीं?”
- निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया कि विपक्ष सुनने को तैयार नहीं।
- कई राज्यों में ब्लैक मार्केटिंग पर कार्रवाई हुई।
- दिल्ली सरकार ने कहा – सप्लाई नॉर्मल, पैनिक न करें।
निष्कर्ष
एलपीजी संकट ने दिखाया कि वैश्विक घटनाएं घरेलू रसोई को कैसे प्रभावित करती हैं। कोर्ट के सवाल और केंद्र के जवाब से साफ हुआ कि सरकार ने त्वरित कदम उठाए, लेकिन पैनिक और अफवाहों ने स्थिति बिगाड़ी। अब उत्पादन बढ़ रहा है, आयात वैकल्पिक स्रोतों से हो रहा है। आम आदमी को सलाह – पैनिक न करें, जरूरत अनुसार बुकिंग करें। यह संकट हमें ऊर्जा सुरक्षा और विविधता की जरूरत याद दिलाता है। आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन सतर्कता जरूरी।
