Delhi Election Cancel Demand
Delhi Election Cancel Demand दिल्ली चुनाव रद्द करने की मांग को लेकर AAP सांसद संजय सिंह ने संसद में नोटिस दिया, जिससे राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए और इस मुद्दे पर सियासी बहस और भी गरमा गई।

Delhi Election Cancel Demand भारतीय लोकतंत्र की नींव मानी जाती है निष्पक्ष चुनाव। लेकिन जब सत्ता पक्ष पर धांधली, फर्जी मामलों और वोट चोरी के गंभीर आरोप लगने लगें, तो सवाल उठना लाजमी है। हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने संसद में एक ऐसा नोटिस दिया है, जिसने पूरे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने दिल्ली चुनाव रद्द करने की मांग की है।
संजय सिंह का आरोप है कि बीजेपी ने केंद्र सरकार की एजेंसियों का दुरुपयोग कर AAP के नेताओं को फर्जी मामलों में फंसाया, सिटिंग मुख्यमंत्री को जेल भेजा और उसके बाद “गैर-कानूनी तरीके” से चुनाव जीता। अब कोर्ट में कई मामलों में सच्चाई सामने आने के बाद उन्होंने संसद में शून्यकाल नोटिस देकर मांग की है कि दिल्ली विधानसभा भंग की जाए और दोबारा चुनाव कराए जाएं। यह मांग सिर्फ AAP की नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सवाल पर उठी है। आइए विस्तार से समझते हैं इस पूरे प्रकरण को।
Delhi Election Cancel Demand संजय सिंह का संसद नोटिस: क्या कहा और क्यों?
9 मार्च 2026 को संसद सत्र के दौरान संजय सिंह ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दिया। नोटिस में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा – “सरकार ने फर्जी केस बनाकर AAP सरकार को बदनाम किया। केजरीवाल जी को जेल भेजा, फिर चुनाव लड़ा और जीता। अब कोर्ट में साबित हो चुका है कि केस फर्जी था। इसलिए यह चुनाव रद्द होना चाहिए। जनता को दोबारा अपना फैसला देने का मौका मिलना चाहिए।”
- संजय सिंह ने यह भी कहा कि दिल्ली में सांसदों और बीजेपी नेताओं के
- घर पर 15-15 फर्जी वोट बनाए गए। वोटर लिस्ट से लाखों नाम काटे गए,
- जबकि बोगस वोटर जोड़े गए। राहुल गांधी के वोट
- चोरी वाले खुलासे के बाद AAP ने और मजबूती से यह मांग उठाई।
- संजय सिंह ने चुनाव आयोग को खुली चुनौती दी –
- “अगर आप निष्पक्ष हो तो हमारी शिकायतों की जांच कराओ, सबूत हमारे पास हैं।”
यह नोटिस सिर्फ कागजी नहीं था। सदन में यह मुद्दा उठते ही विपक्षी दलों में हलचल मच गई। कांग्रेस, सपा, बसपा समेत कई दलों ने इसका समर्थन किया। बीजेपी ने इसे “राजनीतिक हताशा” बताया, लेकिन संजय सिंह अडिग रहे।
दिल्ली चुनाव 2025 का विवादास्पद परिणाम: क्या हुआ था?
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में AAP को करारी हार मिली। 10 साल तक दिल्ली पर राज करने वाली AAP सत्ता से बाहर हो गई। बीजेपी ने बहुमत हासिल किया। लेकिन हार के तुरंत बाद AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि यह जीत “फेयर” नहीं थी।
मुख्य आरोप ये थे:
- ED, CBI और दिल्ली पुलिस का दुरुपयोग कर केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह समेत कई नेताओं को शराब नीति मामले में जेल भेजा गया।
- चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम काटे गए
- (खासकर गरीब, अल्पसंख्यक और प्रवासी इलाकों में)।
- बीजेपी नेताओं के पते पर फर्जी वोटर बनाए गए।
- चुनाव आयोग ने बूथ वाइज डेटा अपलोड करने से इनकार कर दिया।
- राहुल गांधी ने संसद में “वोट चोरी” का बड़ा खुलासा किया,
- जिसके बाद संजय सिंह ने दिल्ली चुनाव रद्द करने की मांग तेज कर दी।
संजय सिंह ने बार-बार कहा – “जेल से बाहर आने के बाद भी हमने कड़ी टक्कर दी, लेकिन साजिश ने हमें कमजोर किया। अब सच्चाई सामने आ रही है, इसलिए चुनाव दोहराए जाएं।”
कानूनी और संवैधानिक पहलू: क्या संभव है चुनाव रद्द करना?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने का जिम्मेदार है। अगर साबित हो कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई, तो कोर्ट या राष्ट्रपति विधानसभा भंग कर नया चुनाव करा सकते हैं।
- पिछले कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव रद्द किए हैं,
- जैसे कुछ विधानसभा सीटों पर पुनर्मतदान के आदेश।
- लेकिन पूरे राज्य के चुनाव रद्द करना दुर्लभ है।
- फिर भी संजय सिंह का तर्क मजबूत है –
- अगर सिटिंग सरकार को फर्जी केस में जेल भेजकर चुनाव लड़ा गया,
- तो क्या यह जनादेश वैध है?
विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग को “घरेलू संस्था” बना लिया है। चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं कि क्यों वोटर लिस्ट डिलीशन पर कोई जवाब नहीं दिया गया? संजय सिंह ने तो यहां तक कहा कि “42 हजार वोट काटे गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
सियासत में हड़कंप: दलों की प्रतिक्रियाएं
इस मांग ने पूरे देश की सियासत गरमा दी है।
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा – “वोट चोरी लोकतंत्र की हत्या है।”
- अन्य विपक्षी दलों ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की।
- बीजेपी ने आरोप लगाया कि AAP हार स्वीकार नहीं कर पा रही।
- “10 साल के भ्रष्टाचार का हिसाब देना पड़ा,
- इसलिए अब बहाने बना रहे हैं।”
संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा – “हम हार नहीं मानेंगे। जनता के वोट चुराए गए हैं। हम सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेंगे।”
लोकतंत्र की रक्षा क्यों जरूरी?
- यह मांग सिर्फ AAP बनाम बीजेपी की लड़ाई नहीं है।
- यह सवाल है कि क्या भारत में सत्ता पक्ष अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष को कुचल सकता है?
- अगर आज दिल्ली चुनाव रद्द नहीं होता,
- तो कल दूसरे राज्यों में भी यही सिलसिला चलेगा।
चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता साबित करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट को इस याचिका पर संज्ञान लेना चाहिए। जनता को पता चलना चाहिए कि उनका वोट चोरी हुआ या नहीं। संजय सिंह का नोटिस लोकतंत्र बचाने की आवाज है।
निष्कर्ष
- दिल्ली चुनाव रद्द करने की मांग आज सिर्फ एक नोटिस नहीं,
- बल्कि लोकतंत्र की पुकार है। संजय सिंह ने साहस दिखाया है।
- अब संसद, चुनाव आयोग और कोर्ट पर निर्भर है कि वे इस मांग को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
अगर फर्जी केस और वोट चोरी साबित होते हैं, तो दोबारा चुनाव जरूरी है। क्योंकि असली जनादेश वही है, जो बिना डर और साजिश के मिले। लोकतंत्र तब मजबूत होगा, जब हर वोट की कीमत होगी।
