मोदी–नेतन्याहू अहम बैठक
मोदी–नेतन्याहू अहम बैठक UAE शेख से मुलाकात के बाद पीएम मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की अहम बातचीत से कूटनीतिक हलचल तेज। भारत में हाई-लेवल बैठक के संकेतों ने सुरक्षा, पश्चिम एशिया हालात और रणनीतिक साझेदारी पर नई चर्चा छेड़ी।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पीएम मोदी की कूटनीतिक सक्रियता ने वैश्विक ध्यान खींचा है। हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बातचीत के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से महत्वपूर्ण वार्ता की। इसके साथ ही भारत में उच्च स्तरीय बैठक (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी – CCS) होने से राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल बढ़ गई है। यह घटनाक्रम 1-2 मार्च 2026 के आसपास हुआ, जब पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान से जुड़े हमलों और प्रतिक्रियाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया था।
मोदी–नेतन्याहू अहम बैठक : पश्चिम एशिया में वर्तमान संकट की पृष्ठभूमि
#पश्चिम एशिया में तनाव का केंद्र ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव में है। हाल के दिनों में ईरान पर समन्वित हमले हुए, जिनमें इजराइल और अमेरिका की भूमिका बताई जा रही है। इसके जवाब में यूएई पर भी हमले हुए, जिसमें नागरिकों की जान गई। इस क्षेत्र में ईरान के सुप्रीम लीडर से जुड़े घटनाक्रम ने स्थिति को और भड़का दिया। ऐसे में खाड़ी देशों, इजराइल और अन्य शक्तियों के बीच गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारत, जो इस क्षेत्र में बड़ा निवेशक, ऊर्जा आयातक और भारतीय प्रवासियों का घर है, इन घटनाओं से सीधे प्रभावित होता है। लाखों भारतीय यूएई, इजराइल और अन्य देशों में काम करते हैं, इसलिए सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है।
यूएई के शेख से पीएम मोदी की बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से फोन पर लंबी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और मारे गए लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि भारत इन कठिन समय में यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने भारतीय समुदाय की सुरक्षा और देखभाल के लिए यूएई सरकार का धन्यवाद भी दिया। यह बातचीत भारत-यूएई के मजबूत रिश्तों को दर्शाती है, जहां दोनों देश आर्थिक, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में घनिष्ठ सहयोगी हैं। यूएई भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और अब्राहम समझौते के बाद इजराइल के साथ भी उसके संबंध सामान्य हो चुके हैं।
नेतन्याहू से अहम फोन वार्ता
यूएई के शेख से बात करने के तुरंत बाद पीएम मोदी ने इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से टेलीफोनिक बात की। यह वार्ता क्षेत्रीय स्थिति पर केंद्रित थी। पीएम मोदी ने हाल की घटनाओं पर भारत की चिंता जताई और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से शत्रुता की शीघ्र समाप्ति (early cessation of hostilities) की अपील की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति बहाली के लिए विचार-विमर्श किया। यह वार्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत इजराइल का मजबूत रक्षा साझेदार है। दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति साझा करते हैं। हाल ही में फरवरी 2026 में पीएम मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान कई बड़े समझौते हुए थे, जैसे AI, कृषि, UPI का विस्तार और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में कदम। यह फोन कॉल उस यात्रा के बाद की निरंतरता दिखाती है।
भारत में हाई-लेवल बैठक और बढ़ती हलचल
- नेतन्याहू से बातचीत के बाद भारत में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की उच्च स्तरीय बैठक हुई,
- जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी ने की।
- यह बैठक दिल्ली में हुई और इसमें रक्षा मंत्री,
- गृह मंत्री, विदेश मंत्री सहित शीर्ष अधिकारी शामिल थे। बै
- ठक में पश्चिम एशिया की स्थिति की समीक्षा की गई,
- भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का आकलन किया गया और संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई।
- इस बैठक से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है क्योंकि भारत की विदेश नीति संतुलित रहती है –
- वह इजराइल का समर्थन करता है, लेकिन अरब देशों से भी मजबूत रिश्ते रखता है।
- बैठक ने यह संकेत दिया कि भारत क्षेत्रीय संघर्ष में किसी पक्ष को चुनने के बजाय शांति और नागरिक सुरक्षा पर जोर देगा।
भारत की स्थिति और भविष्य की संभावनाएं
- भारत की कूटनीति में यह दौर बहुत संवेदनशील है।
- पीएम मोदी की दोहरी बातचीत (यूएई और इजराइल दोनों से)
- भारत की संतुलित नीति को रेखांकित करती है।
- भारत न तो इजराइल-ईरान संघर्ष में सीधे शामिल होना चाहता है
- और न ही खाड़ी देशों से दूरी बनाना।
- ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों की भलाई और आर्थिक हित सर्वोपरि हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता है,
- जैसे शांति वार्ता में मध्यस्थता या मानवीय सहायता।
निष्कर्ष: शांति की अपील और मजबूत कूटनीति
पीएम मोदी की यह सक्रियता दिखाती है कि भारत वैश्विक मंच पर जिम्मेदार शक्ति के रूप में उभर रहा है। यूएई के शेख और नेतन्याहू से बातचीत, उसके बाद CCS बैठक – ये सभी कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए हैं। उम्मीद है कि सभी पक्ष शांति की दिशा में बढ़ेंगे, क्योंकि युद्ध से कोई लाभ नहीं। भारत की आवाज शांति और नागरिक सुरक्षा की है, जो वैश्विक समुदाय के लिए प्रासंगिक है।
