ग्रीन कार्ड डकैती
ग्रीन कार्ड डकैती अमेरिका में चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए एक व्यक्ति ने खुद के साथ लूट की झूठी साजिश रच डाली। जांच में सच सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।

अमेरिका की इमिग्रेशन व्यवस्था में एक बार फिर बड़ा घोटाला सामने आया है, जो चौंकाने वाला और सोचने पर मजबूर करने वाला है। हाल ही में अमेरिकी संघीय अभियोजकों और एफबीआई ने 11 भारतीय नागरिकों पर वीजा धोखाधड़ी (visa fraud) और साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन लोगों ने ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए एक अनोखी और खतरनाक योजना बनाई—खुद ही कन्वीनियंस स्टोरों (सुविधा दुकानों) में फर्जी सशस्त्र लूट (staged armed robberies) की साजिश रची, ताकि स्टोर के कर्मचारी खुद को अपराध का शिकार बताकर विशेष U-वीजा प्राप्त कर सकें और बाद में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकें।
यह मामला मार्च 2023 से शुरू हुआ और मुख्य रूप से मैसाचुसेट्स राज्य में सामने आया, हालांकि अन्य राज्यों में भी ऐसी घटनाएं हुईं। आरोपियों में ज्यादातर पटेल सरनेम वाले भारतीय थे, जैसे जीतेंद्रकुमार पटेल, महेशकुमार पटेल, संजयकुमार पटेल, रमेशभाई पटेल आदि। ये सभी अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे थे और इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।
ग्रीन कार्ड डकैती : U-वीजा क्या है और क्यों इतना आकर्षक?
- अमेरिका में U nonimmigrant status या U-वीजा एक विशेष वीजा है,
- जो उन लोगों को दिया जाता है जो किसी गंभीर अपराध
- (जैसे घरेलू हिंसा, यौन शोषण, मानव तस्करी या हिंसक अपराध) के शिकार हुए हों
- और जांच में पुलिस या सरकारी एजेंसियों की मदद कर रहे हों।
- यह वीजा पीड़ित को अमेरिका में कानूनी रूप से रहने,
- काम करने का अधिकार देता है।
- सबसे महत्वपूर्ण बात—इसके जरिए 5 से 10 साल बाद ग्रीन कार्ड
- (स्थायी निवास) के लिए आवेदन किया जा सकता है,
- जो आगे चलकर नागरिकता का रास्ता खोलता है।
ग्रीन कार्ड डकैती: अमेरिकी कानून में हिंसक अपराध के शिकार लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि यह वीजा मूल रूप से सच्चे पीड़ितों की मदद के लिए बनाया गया था। लेकिन आरोपियों ने इसी अच्छे इरादे वाले कानून का दुरुपयोग किया।
साजिश कैसे रची गई?
योजना बेहद सोची-समझी थी। आरोपी स्टोर मालिकों से संपर्क करते थे और उन्हें पैसे देकर सहयोग लेते थे। फिर एक व्यक्ति “लुटेरा” बनकर स्टोर में जाता, नकली हथियार (apparent firearm) दिखाकर कर्मचारियों को धमकाता, कैश रजिस्टर से कुछ पैसे लेता और भाग जाता। पूरी घटना स्टोर के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड होती। लूट के 5-10 मिनट बाद “पीड़ित” कर्मचारी पुलिस को फोन करते और शिकायत दर्ज कराते।
- इसके बाद वे U-वीजा के लिए आवेदन करते,
- जिसमें दावा करते कि वे हिंसक अपराध के शिकार हुए हैं।
- आरोपी मास्टरमाइंड (जैसे रामभाई पटेल) को “पीड़ित”
- बनने के लिए हजारों डॉलर (कुछ मामलों में 10,000 से 20,000 डॉलर) चुकाते थे।
- स्टोर मालिकों को भी 1,500-2,000 डॉलर दिए जाते थे।
- इस तरह कम से कम 6 से ज्यादा स्टोरों में ऐसी फर्जी लूटें करवाई गईं।
एफबीआई की जांच और गिरफ्तारियां
- एफबीआई को कई लूटों में समानता दिखी—एक ही पैटर्न,
- एक ही तरह की धमकी, सीसीटीवी फुटेज और फोन रिकॉर्ड्स से जांच शुरू हुई।
- एक सहयोगी गवाह (cooperating witness) ने पूरी साजिश का खुलासा किया।
- मार्च 2026 में 11 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की गई।
- कुछ को बोस्टन की फेडरल कोर्ट में पेश किया गया,
- जबकि अन्य मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहायो से गिरफ्तार हुए।
- एक आरोपी को पहले ही भारत डिपोर्ट कर दिया गया था।
अगर दोषी साबित हुए तो इन पर 5 साल तक की जेल, 3 साल की निगरानी और 2,50,000 डॉलर तक जुर्माना हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
- यह मामला अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है।
- U-वीजा अच्छे उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं।
- भारतीय समुदाय में यह खबर शर्मिंदगी का कारण बनी है,
- क्योंकि ज्यादातर आरोपी भारतीय मूल के हैं।
- इससे सच्चे पीड़ितों के लिए वीजा प्रक्रिया और कठिन हो सकती है।
अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय मेहनत से, कानूनी रास्ते से ग्रीन कार्ड हासिल करते हैं। ऐसे घोटाले पूरे समुदाय की छवि खराब करते हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि कानून का दुरुपयोग कितना खतरनाक हो सकता है।
अंत में, यह साजिश न सिर्फ कानूनी अपराध थी, बल्कि सच्चे अपराध पीड़ितों के साथ अन्याय भी। उम्मीद है कि अमेरिकी अधिकारी ऐसे मामलों पर सख्ती बरतेंगे और सिस्टम को मजबूत बनाएंगे।
