हाइब्रिड आतंकी रणनीति
हाइब्रिड आतंकी रणनीति भारत में आतंकी साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें ISI द्वारा ‘हाइब्रिड आतंकियों’ के जरिए कई राज्यों को निशाना बनाने की योजना सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और संभावित खतरों को रोकने के लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है।

मार्च 2026 में भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ा खुलासा किया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI (Inter-Services Intelligence) ने देश के कई राज्यों को निशाना बनाया है। इसमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य शामिल हैं। ISI अब पारंपरिक आतंकवाद से आगे बढ़कर हाइब्रिड आतंकियों की नई रणनीति अपना रहा है। ये हाइब्रिड आतंकी सामान्य नागरिकों की तरह रहते हैं, लेकिन ISI के निर्देश पर हमले करते हैं। इस खुलासे से राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा खतरा मंडरा रहा है, और एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
हाइब्रिड आतंकी क्या हैं? नई रणनीति का खुलासा
हाइब्रिड आतंकी वे लोग हैं जो सामान्य जीवन जीते हैं – नौकरी करते हैं, पढ़ाई करते हैं, या व्यवसाय चलाते हैं – लेकिन सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड ऐप्स या ISI के हैंडलर्स के जरिए ब्रेनवॉश होकर आतंकी गतिविधियां करते हैं। ये पारंपरिक आतंकियों से अलग हैं क्योंकि इन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है। ISI की नई रणनीति में तीन मुख्य नेटवर्क शामिल हैं:
- टेरर नेटवर्क: सीधे हमलों के लिए।
- गैंगस्टर नेटवर्क: अपराधियों को आतंकी कामों में जोड़ना।
- इंटरनेट मीडिया नेटवर्क: सोशल मीडिया से युवाओं को कट्टरपंथी बनाना।
हाल ही में गाजियाबाद से छह आतंकियों की गिरफ्तारी हुई, जो ISI द्वारा ब्रेनवॉश किए गए थे। ये युवा सोशल मीडिया के जरिए जुड़े थे और दिल्ली-एनसीआर में रेकी कर रहे थे। इसी तरह, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से आठ संदिग्धों को पकड़ा गया, जो फर्जी आधार कार्ड से काम कर रहे थे और IED हमलों की साजिश रच रहे थे। ये लोग गारमेंट फैक्टरियों में काम करते थे और “फ्री कश्मीर” पोस्टर्स दिल्ली मेट्रो में लगाने की कोशिश कर रहे थे।
हाइब्रिड आतंकी रणनीति : ISI के निशाने पर कौन-कौन से राज्य?
खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ISI का नेटवर्क कम से कम 12 राज्यों तक फैला हुआ है। मुख्य रूप से:
- दिल्ली-एनसीआर: सोलर कैमरों से रेकी, मेट्रो स्टेशनों पर प्रोपगैंडा।
- उत्तर प्रदेश: युवाओं को ब्रेनवॉश कर स्लीपर सेल बनाना।
- हरियाणा और पंजाब: गैंगस्टरों के जरिए लिंक, आरडीएक्स जैसी सामग्री की आवाजाही।
- तमिलनाडु: इंडस्ट्रियल एरिया में घुसपैठ, IED प्लांटिंग प्लान।
- पश्चिम बंगाल: बांग्लादेश से लिंक, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नेटवर्क का इस्तेमाल।
- जम्मू-कश्मीर: ड्रोन और पारंपरिक हमलों के साथ हाइब्रिड मॉड्यूल।
ISI अब विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों (खासकर मेडिसिन और इंजीनियरिंग) को भी टारगेट कर रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले छात्रों को “व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल” में शामिल करने की कोशिश हो रही है। बांग्लादेश के मेडिकल कॉलेजों से भी रिक्रूटमेंट हो रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और कार्रवाई
भारत सरकार ने फरवरी 2026 में PRAHAAR नाम से पहली राष्ट्रीय काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी जारी की, जो सीमा पार आतंकवाद, ड्रोन हमलों, साइबर थ्रेट्स और हाइब्रिड युद्ध पर फोकस करती है। इस पॉलिसी के तहत:
- इंटेलिजेंस शेयरिंग बढ़ाई गई।
- बॉर्डर पर सतर्कता बढ़ाई गई।
- सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तेज की गई।
- स्लीपर सेल्स को तोड़ने के लिए जॉइंट ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
- हाल के महीनों में कई मॉड्यूल भंग किए गए हैं,
- जैसे तिरुपुर (तमिलनाडु) में ISI-बांग्लादेश लिंक वाला ग्रुप और दिल्ली के पास रिसिन-बेस्ड प्लॉट।
- एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर हैं, खासकर बड़े शहरों और संवेदनशील स्थानों पर।
वैश्विक संदर्भ और भारत के लिए खतरा
- ISI की यह रणनीति हाइब्रिड वॉरफेयर का हिस्सा है,
- जिसमें आतंकवाद के साथ डिसइंफॉर्मेशन,
- साइबर अटैक और आर्थिक साजिशें शामिल हैं।
- पाकिस्तान अब LeT, JeM के साथ ISKP जैसी ग्रुप्स से भी गठजोड़ कर रहा है।
- यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है,
- क्योंकि हाइब्रिड आतंकी लोकल सपोर्ट से काम करते हैं और बड़े हमलों की योजना बनाते हैं।
निष्कर्ष
यह खुलासा दिखाता है कि आतंकवाद अब पुराने तरीकों से नहीं, बल्कि छिपे हुए और स्मार्ट तरीकों से आ रहा है। ISI युवाओं को ब्रेनवॉश कर, फर्जी पहचान देकर और लोकल नेटवर्क बनाकर भारत को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन आम नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा – संदिग्ध गतिविधियां रिपोर्ट करें, सोशल मीडिया पर प्रोपगैंडा से बचें।
देश की एकता और मजबूत इंटेलिजेंस से ही ऐसे खतरों को रोका जा सकता है। स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए अपडेट्स पर नजर रखें और सुरक्षित रहें।
