इंडोनेशिया डिफेंस डील
इंडोनेशिया डिफेंस डील इंडोनेशिया एक तरफ भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीद रहा है, दूसरी तरफ पाकिस्तान के JF-17 जेट पर बात कर रहा है। इस दोहरी रक्षा नीति के पीछे क्षेत्रीय संतुलन की रणनीति क्या है? पूरी खबर पढ़ें।
हाल के दिनों में दक्षिण-पूर्व एशिया की रक्षा खबरों में इंडोनेशिया का नाम बार-बार सुर्खियों में है। एक तरफ भारत की दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की डील लगभग फाइनल होने की खबरें, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट की खरीद पर गहन बातचीत। यह दोहरी रणनीति सिर्फ हथियार खरीद नहीं है, बल्कि इसमें छिपा है एक बड़ा भू-राजनीतिक खेल। इंडोनेशिया न सिर्फ अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है, बल्कि भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच संतुलन बनाकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को मजबूत कर रहा है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
ब्रह्मोस डील: भारत का बढ़ता रक्षा निर्यात

भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की डील लंबे समय से चर्चा में है। दिसंबर 2025 में खबरें आईं कि दोनों देश करीब 450 मिलियन डॉलर की इस डील को अंतिम रूप देने के करीब हैं। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है, जो 290 किलोमीटर तक की रेंज में समुद्री और जमीन दोनों लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है। यह कोस्टल डिफेंस सिस्टम के लिए खासतौर पर प्रभावी है।
फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर की डील के बाद इंडोनेशिया दूसरा ASEAN देश होगा जो ब्रह्मोस खरीदेगा। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नवंबर 2025 में पुष्टि की कि इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस के लिए बोली लगाई है। डील में सिर्फ रूस की औपचारिक मंजूरी बाकी है, क्योंकि ब्रह्मोस भारत-रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है।
- इंडोनेशिया के लिए यह मिसाइल साउथ चाइना सी में
- अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है,
- जहां चीन के साथ विवाद चल रहा है।
- ब्रह्मोस जैसी एंटी-शिप मिसाइल चीन के नौसैनिक विस्तार को रोकने में मदद करेगी।
- भारत के लिए यह डील रक्षा निर्यात में बड़ी सफलता है
- और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी स्थिति मजबूत करेगी।
JF-17 थंडर: पाकिस्तान-चीन का संयुक्त दांव
- दूसरी तरफ की कहानी और भी दिलचस्प है।
- जनवरी 2026 में खबरें आईं कि इंडोनेशिया पाकिस्तान के साथ
- JF-17 थंडर फाइटर जेट की बड़ी डील पर बात कर रहा है।
- सूत्रों के मुताबिक, 40 से ज्यादा जेट्स और ड्रोन्स की खरीद पर चर्चा चल रही है।
- इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री की पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख से इस्लामाबाद में मुलाकात हुई, जिसमें यही मुद्दा मुख्य था।
JF-17 पाकिस्तान और चीन का संयुक्त उत्पादन है। यह मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो कम लागत में अच्छी क्षमता प्रदान करता है। पाकिस्तान इसे अजरबैजान, नाइजीरिया जैसे देशों को बेच चुका है। अब इंडोनेशिया इसका बड़ा खरीदार बन सकता है।
- इंडोनेशिया अपनी पुरानी F-16 फ्लीट को अपग्रेड कर रहा है।
- पिछले कुछ सालों में उसने फ्रांस से 42 राफेल,
- तुर्की से KAAN फिफ्थ जेनरेशन जेट्स और चीन से J-10 की भी खरीद की है।
- JF-17 इसमें एक सस्ता और प्रभावी विकल्प है।

इंडोनेशिया डिफेंस डील: दोहरी डील में छिपा बड़ा खेल
अब असली सवाल: एक ही देश भारत से ब्रह्मोस और पाकिस्तान से JF-17 क्यों ले रहा है? यह कोई संयोग नहीं, बल्कि इंडोनेशिया की सोची-समझी रणनीति है। इंडोनेशिया की विदेश नीति “फ्री एंड एक्टिव” पर आधारित है, यानी वह किसी गुट में बंधना नहीं चाहता। वह सभी बड़ी शक्तियों के साथ संतुलन बनाकर रखता है।
- चीन कार्ड → साउथ चाइना सी में चीन के साथ तनाव के बावजूद इंडोनेशिया चीन से हथियार लेता है। JF-17 में चीनी तकनीक है, इसलिए यह डील चीन को खुश रखने का तरीका हो सकता है।
- भारत को बैलेंस → ब्रह्मोस डील से भारत मजबूत हो रहा है, जो चीन के लिए खतरा है। JF-17 लेकर इंडोनेशिया भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को बैलेंस कर रहा है।
- मुस्लिम सॉलिडैरिटी → इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। पाकिस्तान के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत हैं। यह डील उन रिश्तों को रक्षा सहयोग में बदल रही है।
- आर्थिक फायदा → JF-17 सस्ता है, जबकि ब्रह्मोस प्रीमियम तकनीक। दोनों से इंडोनेशिया सबसे अच्छा कॉम्बिनेशन ले रहा है।
यह स्थिति भारत-पाकिस्तान की अप्रत्यक्ष आर्म्स रेस को दक्षिण-पूर्व एशिया तक ले जा रही है। भारत के लिए चिंता की बात है कि पाकिस्तान-चीन का जेट इंडोनेशियाई वायुसेना में जगह बना रहा है। वहीं पाकिस्तान के लिए यह बड़ा निर्यात अवसर है।

भविष्य की तस्वीर
- इंडोनेशिया की यह दोहरी डील क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को बदल सकती है।
- अगर दोनों डीलें पूरी हुईं, तो इंडोनेशिया के पास
- ब्रह्मोस से समुद्री रक्षा मजबूत होगी और JF-17 से हवाई ताकत बढ़ेगी।
- यह चीन को साउथ चाइना सी में सोचने पर मजबूर करेगा,
- लेकिन साथ ही पाकिस्तान-चीन गठजोड़ को भी बढ़ावा मिलेगा।
- भारत के लिए सबक यह है कि रक्षा निर्यात को और तेज करना होगा।
- फिलीपींस, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया बड़ी सफलता हो सकती है,
- लेकिन पाकिस्तानी जेट की डील इसकी चमक कम कर सकती है।
अंत में, इंडोनेशिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह क्षेत्र का स्मार्ट प्लेयर है। वह किसी एक पक्ष का नहीं बन रहा, बल्कि सभी से फायदा उठाकर अपनी सुरक्षा और स्वतंत्रता मजबूत कर रहा है। यह दोहरी डील सिर्फ हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भू-राजनीतिक शतरंज का एक चालाक चाल है।
