Umar Khalid Sharjeel Imam
Umar Khalid Sharjeel Imam राजनीतिक बहस के केंद्र बने उमर खालिद और शरजील इमाम पर आज आ सकता है बड़ा फैसला। जानिए अदालत से जमानत मिलने की कितनी संभावना है और मामला कहाँ तक पहुँचा।

सुप्रीम कोर्ट आज उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा, जो 2020 दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े UAPA मामले में पिछले 5 साल से जेल में हैं। यह सुनवाई देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसमें देश की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण सवाल उठे हैं।
Umar Khalid Sharjeel Imam: दिल्ली दंगों का काला अध्याय
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, चांद बाग जैसे इलाकों में भड़की हिंसा ने 53 लोगों की जान ले ली और 700 से अधिक घायल हुए। यह हिंसा सीएए-एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भड़की, जब चक्का जाम के नाम पर सड़कें अवरुद्ध कर दी गईं। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि यह सुनियोजित साजिश थी, जिसमें दंगे कर सरकार को अस्थिर करने और राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे के समय भारत की छवि खराब करने का इरादा था।
उमर खालिद और शरजील इमाम का आरोपित रोल
उमर खालिद, पूर्व जेएनयू छात्र, पर दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) के जरिए साजिश रचने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि उन्होंने सीलमपुर की गुप्त बैठक में महिलाओं को चाकू, पत्थर और तेजाब इकट्ठा करने के निर्देश दिए। शरजील इमाम, जेएनयू शोधार्थी, पर जामिया और अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण देने का इल्जाम है, जहां उन्होंने चक्का जाम की अपील की। दोनों पर UAPA के तहत ‘आतंकवादी कृत्य’ का चार्ज है, जिसमें सजा मृत्युदंड तक हो सकती है।
लंबी कानूनी जंग
- दोनों की गिरफ्तारी 2020 में हुई, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2022 में जमानत नामंजूर की।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2022 और फिर सितंबर 2025 में जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं,
- कहा कि उनकी भूमिका ‘गंभीर’ है।
- सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में फैसला सुरक्षित रखा,
- जहां वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी का हवाला दिया।
- पुलिस ने 389 पेज का हलफनामा दाखिल कर साजिश के ‘अकाट्य सबूत’ का दावा किया।
दोनों पक्षों की दलीलें
- अभियोजन पक्ष: दिल्ली पुलिस का कहना है कि व्हाट्सएप चैट,
- भाषण, पर्चे और 900 गवाहों के बयान साजिश साबित करते हैं।
- उन्होंने कहा, ‘जेल, न कि बेल’ UAPA मामलों का नियम है,
- और ट्रायल 2 साल में पूरा हो सकता है।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ‘रेजीम चेंज’ साजिश का जिक्र किया।
- बचाव पक्ष: उमर खालिद के वकील ने कहा कि कोई प्रत्यक्ष हिंसा का सबूत नहीं,
- और 5 साल की हिरासत असंवैधानिक है।
- शरजील के पक्ष ने भाषणों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया।
- उन्होंने ट्रायल में 30,000 पेज इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और देरी का मुद्दा उठाया।
संभावित प्रभाव और अपेक्षाएं
आज जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच फैसला सुनाएगी। जमानत मिली तो UAPA मामलों में लंबी हिरासत पर नया बहस छिड़ेगी, वरना ट्रायल तेज होगा। राजनीतिक रूप से यह CAA-NRC बहस को हवा दे सकता है। देश देख रहा है कि न्याय का तराजू कैसे झुकेगा
