नरवणे सुरक्षा खतरा
नरवणे सुरक्षा खतरा शिवसेना नेता संजय राउत ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की सुरक्षा पर सवाल उठाए, दावा किया कि उनकी किताब के खुलासों के बाद खतरा है और सरकार चुप है। राहुल गांधी के संसद बयान से जुड़ा विवाद गहराया।

भारतीय राजनीति में ये दिन आमतौर पर विवादों से भरे रहते हैं, लेकिन हाल ही में एक ऐसा मुद्दा सामने आया है जो राष्ट्रीय सुरक्षा, पूर्व सैन्य प्रमुख की किताब और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को एक साथ जोड़ता है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया है कि जनरल नरवणे खतरे में हैं और उनके साथ “कुछ भी हो सकता है”। राउत का कहना है कि केंद्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह चुप है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
संसद में शुरू हुआ विवाद: राहुल गांधी का हवाला और हंगामा
यह सब तब शुरू हुआ जब लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब “Four Stars of Destiny” के कुछ कथित अंशों का जिक्र किया। किताब में 2017 के डोकलाम विवाद और 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के दौरान राजनीतिक नेतृत्व की कथित अनिर्णय की स्थिति का वर्णन है। राहुल गांधी ने दावा किया कि जब चीनी सेना आगे बढ़ रही थी, तो जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य अधिकारियों से बार-बार संपर्क किया, लेकिन स्पष्ट निर्देश नहीं मिले। अंत में रक्षा मंत्री ने कहा, “जो उचित समझो, वो करो” – जो एक तरह से निर्णय लेने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा था।
- इस हवाले पर सत्ता पक्ष भड़क गया।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा सांसदों ने विरोध जताया
- कि अप्रकाशित किताब के अंश सदन में नहीं पढ़े जा सकते।
- सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
- विपक्ष का कहना था कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है,
- जबकि सरकार ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया।
संजय राउत की चिंता: “जनरल नरवणे की सुरक्षा बढ़ाई जाए”
इस पूरे प्रकरण के बाद संजय राउत ने बयान दिया कि राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाने की कोशिश की, जो जायज है। उन्होंने कहा, “जब पड़ोसी देश हमला करने के इरादे से सीमा पर आता है, तो राजनीतिक नेतृत्व को फैसला लेना चाहिए। उस समय जनरल नरवणे निर्देश मांग रहे थे, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। अब जब यह मुद्दा उठा है, तो मुझे जनरल नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उनके साथ क्या होगा, कह नहीं सकता।”
- राउत ने आगे कहा कि सरकार को उनकी सुरक्षा बढ़ानी चाहिए।
- उन्होंने सोनम वांगचुक जैसे मामलों का जिक्र कर आशंका जताई,
- कि सरकार ऐसे मुद्दों पर दबाव बनाने या चुप्पी साधने की नीति अपना सकती है।
- राउत का दावा है कि जनरल नरवणे की किताब में कई संवेदनशील बातें हैं,
- जो सरकार नहीं चाहती कि सामने आएं,
- इसलिए पूर्व आर्मी चीफ पर कोई खतरा हो सकता है।
नरवणे सुरक्षा खतरा: जनरल एमएम नरवणे कौन हैं?
- जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर्ड) भारतीय सेना के 28वें प्रमुख रहे।
- उन्होंने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक सेवा की।
- वे पुणे में जन्मे, एनडीए और आईएमए के पूर्व छात्र हैं।
- कोविड काल में सैनिकों की भलाई और पूर्वी लद्दाख में
- बुनियादी ढांचे के विकास में उनकी भूमिका सराही गई।
- उनकी किताब “Four Stars of Destiny” में अग्निपथ योजना की आलोचना भी है,
- जिसमें कहा गया कि यह सेना के लिए हैरान करने वाली थी और
- वेतन आदि में बदलाव सेना की सिफारिशों पर हुए।
- किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, क्योंकि रक्षा मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली।
राजनीतिक निहितार्थ और सवाल
- यह विवाद सिर्फ एक किताब का नहीं, बल्कि राजनीतिक आरोपों का है।
- विपक्ष सरकार पर चीन के मुद्दे पर कमजोर रुख अपनाने का आरोप लगा रहा है,
- जबकि सरकार कह रही है कि अप्रकाशित सामग्री से सदन में बहस नहीं हो सकती।
- संजय राउत जैसे विपक्षी नेताओं का दावा है कि सरकार पूर्व सैन्य अधिकारियों को भी दबाने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर विचार होना चाहिए। जनरल नरवणे जैसे सम्मानित अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है या वाकई कोई खतरा? समय बताएगा। लेकिन संजय राउत का यह दावा निश्चित रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है।
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