Gavaskar Pakistan Players
Gavaskar Pakistan Players पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को विदेशी लीग में भुगतान को लेकर सख्त बयान दिया है। उनका कहना है कि उन्हें पैसा देना भारत के खिलाफ जा सकता है। जानिए उनके इस बयान के पीछे की पूरी बहस।

क्रिकेट के महान बल्लेबाज और पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने एक बार फिर अपनी साफ-सुथरी और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत राय रखी है। हाल ही में इंग्लैंड की टी20 लीग ‘द हंड्रेड’ के उद्घाटन पुरुषों के ऑक्शन में सनराइजर्स लीड्स (Sunrisers Leeds) ने पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को £190,000 (लगभग ₹2.3 करोड़) में खरीदा। इस फैसले पर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हुई और अब गावस्कर ने भी अपनी मजबूत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को पैसा देना भारत के हितों के खिलाफ है।
गावस्कर ने अपने मिड-डे कॉलम में लिखा कि जब कोई भारतीय मालिक वाली फ्रेंचाइजी पाकिस्तानी खिलाड़ी को फीस देती है, तो वह पैसा खिलाड़ी की आयकर के रूप में पाकिस्तान सरकार तक पहुंचता है। फिर वह पैसा हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद में इस्तेमाल होता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की जान लेने में योगदान देता है। उन्होंने इसे “blood money” (खून का पैसा) करार दिया और कहा कि ऐसे फैसले भारतीयों के नुकसान में सीधे तौर पर योगदान देते हैं।
Gavaskar Pakistan Players गावस्कर की बात का तर्क क्या है?
सुनील गावस्कर ने अपनी बात को बहुत तार्किक तरीके से रखा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले कुछ सालों में भारतीय फ्रेंचाइजियां जानबूझकर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन करने से परहेज कर रही हैं। इसका कारण सिर्फ भावनाएं नहीं, बल्कि वास्तविकता है। पाकिस्तान में क्रिकेटरों की कमाई पर टैक्स लगता है और राज्य का बड़ा हिस्सा सैन्य खर्च पर जाता है। हाल के वर्षों में पहलगाम आतंकी हमला जैसी घटनाओं के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। गावस्कर का सवाल जायज है—क्या कुछ करोड़ रुपये कमाने के लिए हम अपने ही सैनिकों और नागरिकों के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से फंडिंग कर रहे हैं?
उन्होंने कहा, “भारतीय इकाइयां अब पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों को लेने से भी कतरा रही हैं। यह देर से सही, लेकिन जरूरी जागरूकता है।” गावस्कर की यह टिप्पणी सिर्फ एक खिलाड़ी पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर है। वे पूछते हैं कि जब पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर सकता है, राजनीति को खेल में घोल सकता है, तो हम क्यों उनके खिलाड़ियों को आर्थिक मदद दें?
क्रिकेट और राजनीति का पुराना रिश्ता
- भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट हमेशा से सिर्फ खेल नहीं रहा।
- 2008 के आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ी शामिल थे,
- लेकिन 26/11 मुंबई हमलों के बाद सब बदल गया।
- उसके बाद BCCI ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज बंद कर दीं।
- एशिया कप और आईसीसी टूर्नामेंट्स में मैच होते रहे, लेकिन संबंध तनावपूर्ण बने।
- पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) अक्सर राजनीतिक दबाव में फैसले लेता है।
- हाल ही में टी20 विश्व कप 2026 में भारत के खिलाफ मैच बॉयकॉट की चर्चा हुई थी,
- जिस पर गावस्कर ने ICC से सख्त कार्रवाई की मांग की।
- वे कहते हैं कि पाकिस्तान को मौके भारत ने दिए,
- लेकिन बदले में हमेशा एकतरफा व्यवहार मिला।
- अब जब भारतीय स्वामित्व वाली टीमें विदेशी लीग्स में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खरीद रही हैं,
- तो यह विरोधाभास पैदा करता है।
Gavaskar Pakistan Players: काव्या मारन की सनराइजर्स लीड्स पर गावस्कर ने सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब पूरे देश में यह सहमति बन रही थी कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों से दूरी बनाए रखी जाए, तो फिर यह उतावलापन क्यों? क्या पैसे के सामने देश की भावनाएं और सुरक्षा कम महत्वपूर्ण हो गई हैं? यह बयान न सिर्फ सनराइजर्स लीड्स के लिए, बल्कि सभी भारतीय मालिकों के लिए चेतावनी है।
राष्ट्रभक्ति बनाम व्यावसायिक हित
- गावस्कर का बयान क्रिकेट जगत में बहस छेड़ रहा है।
- कुछ लोग कहते हैं कि खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए।
- क्रिकेट एक ग्लोबल गेम है, खिलाड़ी अपनी मर्जी से खेलते हैं।
- लेकिन गावस्कर का जवाब साफ है—जब पाकिस्तान की सरकार और सेना खेल को हथियार बनाती है,
- तब अलग रखना संभव नहीं।
भारत में लाखों युवा क्रिकेट को फॉलो करते हैं। वे देखते हैं कि उनके हीरो किस पक्ष में खड़े हैं। गावस्कर जैसे दिग्गजों का सख्त रुख युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना जगाता है। साथ ही, यह उन फ्रेंचाइजियों को भी सोचने पर मजबूर करता है जो सिर्फ मुनाफे के चक्कर में संवेदनशील मुद्दों को नजरअंदाज कर रही हैं।
- पाकिस्तानी मीडिया और कुछ पूर्व खिलाड़ी इस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
- वे इसे “भारतीय अतिवाद” बता रहे हैं,
- लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तान में आतंकवाद को
- राज्य प्रायोजित समर्थन मिलने के सबूत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मौजूद हैं।
- गावस्कर ने कोई नई बात नहीं कही, बल्कि जो सब जानते हैं, उसे शब्दों में बयां किया।
आगे क्या?
यह विवाद सिर्फ अबरार अहमद तक सीमित नहीं है। यह बड़े सवाल उठाता है—क्या भारतीय कंपनियां और फ्रेंचाइजियां पाकिस्तान से जुड़े किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करें? बॉलीवुड में पाकिस्तानी कलाकारों पर पाबंदी लगी, अब क्रिकेट में भी इसी दिशा में सोच बन रही है। गावस्कर की सलाह है कि भारतीय मालिकों को ऐसे फैसलों से बचना चाहिए, क्योंकि अंत में यह पैसा भारत के खिलाफ ही वापस आता है।
- सुनील गावस्कर हमेशा से साहसी और सच्चे रहे हैं।
- मैदान पर वे “लिटिल मास्टर” थे, जो गेंदबाजों की धुलाई करते थे।
- ऑफ द फील्ड वे राष्ट्र के हितों की रक्षा करते हैं।
- उनका यह बयान न सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों के लिए, बल्कि हर भारतीय के लिए सोचने का विषय है।
क्या सनराइजर्स लीड्स और अन्य फ्रेंचाइजियां इस चेतावनी पर अमल करेंगी? क्या ICC और BCCI इस मुद्दे पर कोई स्टैंड लेंगे? समय बताएगा। लेकिन एक बात तय है—जब गावस्कर बोलते हैं, तो पूरा देश सुनता है। और इस बार उनका संदेश बिल्कुल साफ है: पाकिस्तानी खिलाड़ियों को पैसा देना भारत के खिलाफ जाना है।
देश की सुरक्षा और भावनाएं किसी भी खेल या व्यापार से ऊपर हैं। गावस्कर ने एक बार फिर साबित किया कि सच्चा क्रिकेटर सिर्फ रन नहीं बनाता, बल्कि राष्ट्र की आवाज भी बनता है।
