ईरान हमले तनाव
ईरान हमले तनाव ईरान पर संभावित हमले की आहट के बीच ब्रिटेन ने अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी चर्चा में है, जिससे वैश्विक राजनीति में तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है।

पश्चिम एशिया में तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान पर हमलों की आहट तेज हो गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर ईरान के मिसाइल हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। ऐसे में ब्रिटेन ने बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। लेकिन इस फैसले के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी कम नहीं हुई है, जो अब अंतरराष्ट्रीय चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
ईरान हमले तनाव : ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष
- मार्च 2026 की शुरुआत से ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान के मिसाइल ठिकानों,
- नौसेना और अन्य सैन्य सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए हैं।
- ईरान ने जवाबी कार्रवाई में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले किए,
- जहां दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है।
- ईरान ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए,
- जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ गई। ईरान ने डिएगो गार्सिया
- जैसे अमेरिकी-ब्रिटिश ठिकानों पर भी मिसाइल दागीं, हालांकि वे लक्ष्य से चूक गईं।
ट्रंप प्रशासन ने ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट करने का संकल्प लिया है। ट्रंप ने कहा है कि यह युद्ध जल्द खत्म होगा, लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई से स्थिति और जटिल हो गई है। नाटो सहयोगी देशों में भी मतभेद हैं, कई यूरोपीय देश आक्रामक हमलों से दूरी बनाए हुए हैं।
ब्रिटेन का फैसला
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने शुरू में अमेरिका की मांग ठुकरा दी थी। ट्रंप ने ब्रिटेन से RAF फेयरफोर्ड (इंग्लैंड) और डिएगो गार्सिया (हिंद महासागर) जैसे ठिकानों का इस्तेमाल मांगा था, ताकि बी-2 और बी-1 बॉम्बर से हमले किए जा सकें। स्टार्मर ने पहले इनकार किया, जिससे ट्रंप नाराज हो गए।
- लेकिन 1-2 मार्च 2026 के आसपास स्थिति बदल गई।
- स्टार्मर ने घोषणा की कि ब्रिटेन अमेरिका को अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति देगा,
- लेकिन केवल ‘रक्षात्मक उद्देश्य’ के लिए।
- इसका मतलब है कि ईरान के उन मिसाइल साइटों पर हमले,
- जो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बना रही हैं।
- ब्रिटिश सरकार ने इसे ‘क्षेत्रीय सामूहिक आत्मरक्षा’ बताया,
- ताकि ब्रिटिश नागरिकों और हितों की रक्षा हो सके।
स्टार्मर ने संसद में कहा कि ईरान की लापरवाही बढ़ रही है, मिसाइलें क्षेत्र में निर्दोषों को मार रही हैं। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि वह आक्रामक हमलों में सीधे शामिल नहीं होगा, केवल रक्षात्मक कार्रवाई में सहयोग देगा।
ट्रंप की नाराजगी
- ट्रंप ने ब्रिटेन के शुरुआती इनकार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
- उन्होंने कीर स्टार्मर को ‘विंस्टन चर्चिल नहीं’ कहा और ब्रिटेन को ‘असहयोगी’ बताया।
- ट्रंप ने कहा कि शुरुआती इनकार से अमेरिकी विमानों को अतिरिक्त घंटे उड़ान भरनी पड़ी, जिससे समय बर्बाद हुआ।
20 मार्च 2026 को ट्रंप ने कहा, “यह बहुत देर से आया फैसला है। ब्रिटेन को पहले करना चाहिए था।” उन्होंने ब्रिटेन को ‘रॉल्स-रॉयस ऑफ एलाइज’ कहा, लेकिन अब निराशा जताई। ट्रंप ने चागोस द्वीप समूह (डिएगो गार्सिया) को मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले को ‘मूर्खता’ बताया। ट्रंप की यह नाराजगी अमेरिका-ब्रिटेन ‘विशेष संबंध’ पर सवाल उठा रही है।
ट्रंप ने नाटो सहयोगियों को भी ‘कायर’ कहा, क्योंकि कई देश होर्मुज में युद्धपोत भेजने से इनकार कर रहे हैं।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य की आशंका
- ब्रिटेन की मंजूरी से अमेरिका को रणनीतिक लाभ मिला है,
- लेकिन ईरान ने इसे ‘आक्रामकता में भागीदारी’ बताया है।
- ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है।
- क्षेत्र में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ट्रंप की नाराजगी दिखाती है कि सहयोगी देशों में भी दरार है। ब्रिटेन ने संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन ट्रंप का गुस्सा कम नहीं हुआ। क्या यह ‘विशेष संबंध’ को स्थायी नुकसान पहुंचाएगा? समय बताएगा। फिलहाल, ईरान पर हमलों की आहट और तेज हो रही है, और दुनिया युद्ध के विस्तार से चिंतित है।
