राफेल डील
राफेल डील भारत ने 114 नए राफेल फाइटर जेट और 6 P-8I मारिटाइम एयरक्राफ्ट की खरीद को मंजूरी दी। DAC की इस मेगा डील की कुल कीमत ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है। जानिए पूरी डिटेल्स और रक्षा मजबूती पर असर।

भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक दिन! 12 फरवरी 2026 को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं में से एक को मंजूरी दे दी है। इस मेगा डील के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान और भारतीय नौसेना के लिए 6 P-8I पोसीडॉन समुद्री निगरानी विमान खरीदे जाएंगे। इस पूरे सौदे की अनुमानित लागत 3.25 लाख करोड़ रुपये है, जो भारत के रक्षा इतिहास में एक नया रिकॉर्ड कायम करेगा।
DAC की बैठक और मंजूरी का महत्व
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई DAC की बैठक में यह फैसला लिया गया।
- DAC रक्षा खरीद से जुड़े बड़े प्रस्तावों को मंजूरी देने वाली सर्वोच्च संस्था है।
- इस मंजूरी के बाद अब यह प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा,
- जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में अंतिम स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
- कई सूत्रों के अनुसार, यह डील फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की
- भारत यात्रा से पहले या उसके दौरान फाइनल हो सकती है,
- जो भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को और मजबूत करेगी।
राफेल डील की पूरी डिटेल्स
#राफेल, जो दासो एविएशन कंपनी का मल्टी-रोल फाइटर जेट है, पहले से ही भारतीय वायुसेना में अपनी ताकत साबित कर चुका है। 2016 में भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदे थे, जो अब ऑपरेशनल हैं। नई डील में 114 अतिरिक्त राफेल शामिल हैं।
- कुल राफेल बेड़ा: मौजूदा 36 + 26 (नौसेना के लिए राफेल-मरीन, पहले से मंजूर) + 114 = कुल 176 राफेल!
- डिलीवरी मॉडल: 18 विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में फ्रांस से सीधे आएंगे,
- जबकि बाकी (लगभग 96) भारत में ही मेक इन इंडिया के तहत निर्मित होंगे।
- यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम है।
- वेरिएंट: ये विमान F4 और F5 स्टैंडर्ड के होंगे, जो पहले से ज्यादा एडवांस्ड होंगे – बेहतर इंजन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, और हथियार क्षमता के साथ।
- स्क्वाड्रन मजबूती: भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं,
- जबकि जरूरत 42 की है। 114 राफेल से 6-7 नए स्क्वाड्रन जुड़ेंगे,
- जो हवाई ताकत में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे।
राफेल की खासियतें – मेटियोर (150 किमी+ रेंज वाली BVR मिसाइल), SCALP क्रूज मिसाइल, AESA रडार, और सुपरक्रूज क्षमता – इसे दुश्मनों के लिए खतरनाक बनाती हैं। हाल के ऑपरेशंस में इसने अपनी ताकत दिखाई है।
P-8I पोसीडॉन: नौसेना की आंखें और कान
इस डील का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा है 6 अतिरिक्त P-8I Poseidon विमान, जो बोइंग कंपनी के हैं और अमेरिका से खरीदे जाएंगे। भारतीय नौसेना के पास पहले से 12 P-8I हैं, जिन्हें “नीपच्यून” नाम दिया गया है।
ये विमान मैरिटाइम सर्विलांस, एंटी-सबमरीन वारफेयर, और इंटेलिजेंस के लिए विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्लेटफॉर्म में से एक हैं। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों और पाकिस्तान की नौसैनिक चुनौतियों के बीच ये 6 नए विमान नौसेना की निगरानी क्षमता को दोगुना कर देंगे। ये सोनार, रडार, और टॉरपीडो से लैस होते हैं, जो दुश्मन पनडुब्बियों को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।
रणनीतिक महत्व और प्रभाव
- यह डील न केवल रक्षा ताकत बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन को भी प्रभावित करेगी।
- चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में यह खबर बेचैनी पैदा कर रही है।
- हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक भारत की सुरक्षा अब और मजबूत हो जाएगी।
- साथ ही, बड़े पैमाने पर मेक इन इंडिया से रोजगार, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बूस्ट मिलेगा।
निष्कर्ष
₹3.25 लाख करोड़ की यह मेगा डील भारत को वैश्विक रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न सिर्फ आधुनिक हथियारों का संग्रह है, बल्कि आत्मविश्वास, रणनीतिक स्वायत्तता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक भी है। आने वाले समय में जब ये विमान भारतीय आकाश और समुद्र में उड़ान भरेंगे, तो भारत की सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी।
