भारत ईरान खतरा
भारत ईरान खतरा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि भारत के लिए होर्मुज मार्ग से गुजरना खतरनाक हो सकता है। ईरान विवाद पर उनकी चेतावनी और संभावित जोखिमों की पूरी जानकारी पढ़ें।

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तीव्र संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया के तेल और गैस व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है, इस युद्ध का केंद्र बन गया है। ईरान ने इस संकरे जलमार्ग पर नियंत्रण बढ़ाते हुए कई जहाजों की आवाजाही को प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। ऐसे में कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने एक मजबूत चेतावनी दी है कि भारत का होर्मुज जलडमरूमध्य में जबरदस्ती हस्तक्षेप करना या इसे “खुलवाने” के लिए जाना युद्ध का ऐलान माना जाएगा।
भारत ईरान खतरा: होर्मुज जलडमरूमध्य
- होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।
- दुनिया का लगभग 20-25% तेल और बड़ा हिस्सा प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरता है।
- भारत के लिए यह मार्ग और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी लगभग 60% गैस आपूर्ति
- (एलपीजी और एलएनजी) और काफी तेल इसी मार्ग से आता है।
- युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया,
- जिससे भारत में एलपीजी की कमी, कीमतों में उछाल और घरेलू उपभोक्ताओं में घबराहट देखी गई।
- कई भारतीय जहाज फंस गए, और नौसेना को ‘ऑपरेशन संकल्प’ जैसे कदम उठाने पड़े।
ईरान ने चुनिंदा देशों को राहत दी है। भारत के कुछ एलपीजी टैंकरों को अनुमति मिली, लेकिन स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरानी राजदूत ने भारत को “अच्छा दोस्त” बताते हुए सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन युद्ध की आशंका बनी रहती है।
शशि थरूर की चेतावनी
भारत ईरान खतरा : हाल ही में एक इंटरव्यू में शशि थरूर से जब पूछा गया कि क्या भारत को अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आह्वान पर होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए जाना चाहिए, तो उन्होंने साफ कहा- “भारत का होर्मुज खुलवाने जाना मतलब युद्ध का ऐलान होगा।” थरूर ने जोर दिया कि ईरान के साथ सीधा टकराव भारत के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जबरदस्ती घुसना किसी देश की दिलचस्पी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह एक्ट ऑफ वॉर होगा।
- थरूर ने भारत की मौजूदा कूटनीति का समर्थन किया।
- उन्होंने मोदी सरकार की चुप्पी को कायरता नहीं, बल्कि जिम्मेदार रणनीति बताया।
- भारत ने दोनों पक्षों (अमेरिका-इजरायल और ईरान) के साथ संतुलन बनाए रखा है।
- थरूर ने अपील की कि भारत को युद्ध रोकने में प्रोएक्टिव भूमिका निभानी चाहिए।
- उन्होंने कहा, “दुनिया पीड़ित है। होर्मुज से तेल-गैस की आपूर्ति में समस्या है।
- पूरा क्षेत्र इस संघर्ष का बंधक नहीं बनना चाहिए।”
भारत के लिए खतरे और चुनौतियां
- ऊर्जा संकट: एलपीजी-एलएनजी की कमी से रसोई गैस सिलेंडर महंगे हुए, उद्योग प्रभावित।
- आर्थिक प्रभाव: तेल कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है।
- सुरक्षा जोखिम: लाखों भारतीय गल्फ देशों में काम करते हैं। युद्ध फैलने पर वे खतरे में पड़ सकते हैं।
- कूटनीतिक संतुलन: भारत रूस से तेल खरीदता है, अमेरिका से रक्षा सौदे करता है, और ईरान से ऐतिहासिक संबंध रखता है। किसी एक पक्ष का साथ देना अन्य संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है।
थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को शांति की अपील करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लक्ष्य पूरे हो चुके हैं, अब युद्ध जारी रखना किसी के हित में नहीं। भारत की कूटनीति की सराहना हो रही है, और यूएई, फिनलैंड जैसे देश भी भारत से हस्तक्षेप चाहते हैं।
आगे क्या?
- यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है।
- भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए शांति प्रयास तेज करने चाहिए।
- थरूर की चेतावनी स्पष्ट है- होर्मुज में सैन्य हस्तक्षेप भारत के लिए घातक साबित हो सकता है।
- इसके बजाय कूटनीति, संवाद और बहुपक्षीय मंचों (जैसे संयुक्त राष्ट्र) से दबाव बनाना बेहतर विकल्प है।
भारत जैसे उभरते देश के लिए यह समय परीक्षा का है। ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक शांति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। थरूर की यह चेतावनी न केवल राजनीतिक है, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा का संकेत भी है। उम्मीद है कि सरकार और विपक्ष मिलकर इस संकट से उबरने का रास्ता निकालेंगे।
