ईरान–इजरायल बढ़ता तनाव
ईरान–इजरायल बढ़ता तनाव खामेनेई की मौत की खबरों के बीच ईरान का खाड़ी क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन तेज, इजरायल में धमाकों से बढ़ा तनाव। पश्चिम एशिया में हालात नाजुक, वैश्विक बाजार और सुरक्षा समीकरणों पर असर की आशंका।

पश्चिम एशिया में युद्ध की आग भड़क गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में 28 फरवरी 2026 को तेहरान में खामेनेई सहित कई शीर्ष कमांडर मारे गए। इस ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (अमेरिका) और ‘रोरिंग लायन’ (इजराइल) ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। खामेनेई की मौत की खबर ने ईरान में शोक की लहर दौड़ा दी, लेकिन साथ ही बदले की आग भी भड़का दी। ईरान ने इसे “ऐतिहासिक अपराध” बताते हुए तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। रविवार (1 मार्च 2026) को ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और इजराइल पर मिसाइलों-ड्रोनों की बौछार कर दी, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया।
ईरान–इजरायल बढ़ता तनाव: खामेनेई की मौत
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे। उन्होंने 36 साल तक देश की नीतियों पर कड़ा नियंत्रण रखा। अमेरिका-इजराइल के हमलों में तेहरान में उनके आवास और कार्यालय को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया ने मौत की पुष्टि की। साथ ही IRGC प्रमुख मोहम्मद पाकपुर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए।
- ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया और सात दिनों का सार्वजनिक अवकाश रखा।
- कुछ जगहों पर लोगों ने खुशी जताई, लेकिन अधिकांश में शोक और गुस्सा है।
- ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने टीवी पर कहा,
- “आपने हमारी लाल रेखा पार की है, अब कीमत चुकानी होगी।”
- राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बदला “धर्म का कर्तव्य” बताया।
ईरान का खाड़ी में शक्ति प्रदर्शन
खामेनेई की मौत के कुछ घंटों बाद ईरान ने “ऑपरेशन ऑनेस्ट प्रॉमिस फोर” शुरू किया। ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से खाड़ी के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। प्रभावित देशों में शामिल हैं:
- संयुक्त अरब अमीरात (अबू धाबी, दुबई, जेबेल अली पोर्ट)
- कतर
- बहरीन
- कुवैत
- सऊदी अरब
दुबई एयरपोर्ट पर मलबा गिरने से आग लगी, अबू धाबी में भारतीय घायल हुए। कतर में धुआं उठता दिखा। अमेरिकी सेना ने कहा कि इन हमलों में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और पांच घायल हुए – यह संघर्ष में अमेरिका की पहली मौतें हैं। ईरान ने इसे “सबसे भारी हमला” बताया। खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस पर हमले से साबित हुआ कि ईरान अपनी ताकत दिखाने में सक्षम है, भले ही उसके नेता मारे गए हों।
इजराइल में धमाके
ईरान के हमलों का सबसे बड़ा असर इजराइल पर पड़ा। तेहरान से दागी गईं दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन इजराइल पहुंचे। इजराइल की आयरन डोम और अन्य डिफेंस सिस्टम ने कई को रोक लिया, लेकिन कुछ जगहों पर सीधा असर हुआ:
- यरूशलम में मिसाइल गिरने से छह घायल।
- बेत शेमेश में एक सिनागॉग और शेल्टर पर हमला – नौ लोग मारे गए, 28 घायल।
- तेल अवीव, हाइफा और गैलीली में सायरन बजे, धमाके सुनाई दिए।
- कुल मिलाकर इजराइल में 11 मौतें और सैकड़ों घायल।
इजराइली सेना ने कहा कि हमले “तेहरान के दिल” पर जारी हैं। इजराइल ने इमरजेंसी घोषित की और रिजर्व सैनिकों को तैनात किया।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
- यह संघर्ष अब क्षेत्रीय युद्ध में बदल चुका है।
- पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास पर हमला, कई मौतें।
- भारत में फ्लाइट्स कैंसल, खाड़ी में फंसे भारतीय।
- पीएम मोदी ने CCS बैठक बुलाई।
- ट्रंप ने कहा, “हम और हमला करेंगे, बदला लेंगे।”
- ईरान में नया सुप्रीम लीडर चुनने की प्रक्रिया शुरू।
- क्लेरिक्स ने “जिहाद” का फतवा जारी किया।
- दुनिया डर रही है कि यह विश्व युद्ध की ओर न बढ़े।
निष्कर्ष
खामेनेई की मौत ने ईरान को कमजोर नहीं किया, बल्कि बदले की भावना से भर दिया। खाड़ी में शक्ति प्रदर्शन और इजराइल में धमाकों ने तनाव को नई ऊंचाई दी। लाखों लोग प्रभावित, अर्थव्यवस्था डगमगा रही। उम्मीद है कि कूटनीति कामयाब होगी, वरना मिडिल ईस्ट में और खून बहेगा। शांति की जरूरत कभी इतनी नहीं थी।
