थरूर राहुल मुलाकात
थरूर राहुल मुलाकात शशि थरूर ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। पार्टी में मतभेद की अफवाहों के बीच थरूर ने कहा- सब ठीक, एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। क्या है उनका अगला कदम?

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) इन दिनों एक बार फिर आंतरिक कलह के दौर से गुजर रही है। खासकर केरल में पार्टी के दिग्गज नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर तथा पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच तनाव की खबरें जोरों पर हैं। हाल ही में कोच्चि में आयोजित एक महापंचायत कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा थरूर को कथित तौर पर नजरअंदाज करने या प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने की घटना ने अफवाहों को हवा दी है। थरूर ने इसे अपमान के रूप में लिया और इसके बाद वे कांग्रेस हाईकमान द्वारा बुलाई गई केरल विधानसभा चुनाव रणनीति की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए।
- पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात या संपर्क “गुप्त” नहीं था,
- बल्कि पार्टी हाईकमान ने दोनों के बीच मतभेद दूर करने की कोशिश की है।
- लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया पर “गुप्त मुलाकात” की अफवाहें फैल गई हैं,
- जो कांग्रेस में बढ़ती खटपट को और उजागर कर रही हैं।
- सवाल यह है कि क्या थरूर का अगला कदम पार्टी के
- लिए मास्टरस्ट्रोक साबित होगा या फिर यह कांग्रेस की कमजोरी को और बढ़ाएगा?
थरूर राहुल मुलाकात: कोच्चि घटना अपमान की शुरुआत
सब कुछ कोच्चि के उस महापंचायत कार्यक्रम से शुरू हुआ, जहां राहुल गांधी और शशि थरूर एक ही मंच पर थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, थरूर को बताया गया था कि उनके भाषण के बाद केवल राहुल गांधी ही बोलेंगे और वरिष्ठता का सम्मान बरकरार रहेगा। लेकिन मंच पर ऐसा नहीं हुआ। राहुल गांधी ने थरूर का नाम तक नहीं लिया और प्रोटोकॉल में गड़बड़ी हुई। थरूर ने इसे व्यक्तिगत अपमान माना और कार्यक्रम के दौरान असहज महसूस किया। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वे बीच में ही उठकर चले गए।
यह घटना महज एक प्रोटोकॉल की गलती नहीं थी, बल्कि थरूर के मन में लंबे समय से पनप रही नाराजगी का परिणाम थी। थरूर पार्टी में अपनी बौद्धिक छवि और स्वतंत्र राय के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर पार्टी लाइन से अलग अपनी बात रखते हैं, जैसे विदेश नीति, आर्थिक मुद्दों या यहां तक कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की ताकत पर बोलना। लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी अधिक केंद्रीकृत और युवा-केंद्रित हो गई है, जहां थरूर जैसे वरिष्ठ लेकिन स्वतंत्र नेताओं को जगह कम मिल रही है।
बैठक से अनुपस्थिति: बड़ा संकेत
- कोच्चि घटना के बाद कांग्रेस हाईकमान ने केरल विधानसभा चुनाव
- (जो 2026 में होने हैं) की तैयारियों के लिए दिल्ली में अहम बैठक बुलाई।
- मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी इसमें शामिल थे।
- लेकिन थरूर ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। पार्टी सूत्रों ने कहा
- कि थरूर कोलझिकोड में एक साहित्य महोत्सव में व्यस्त थे,
- लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उन्होंने जानबूझकर बैठक छोड़ी।
राहुल गांधी के कार्यालय ने थरूर से संपर्क किया और उनकी अनुपस्थिति का कारण पूछा। सूत्रों का कहना है कि अगर थरूर आते, तो राहुल उनसे मिलकर तनाव कम करने की कोशिश करते। थरूर का खेमा कहता है कि वे 28 जनवरी को संसद सत्र के लिए दिल्ली में होंगे और दोनों नेताओं की मुलाकात संभव है। लेकिन यह “गुप्त मुलाकात” की अफवाहों को जन्म दे रही है। क्या यह मुलाकात सुलह की होगी या टकराव की?
कांग्रेस में खटपट की वजहें
- कांग्रेस में थरूर-राहुल विवाद नया नहीं है।
- थरूर ने पहले भी पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया है,
- जैसे पुस्तक प्रमोशन या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर।
- वे कह चुके हैं कि अगर पार्टी को उनकी जरूरत नहीं,
- तो उनके पास विकल्प हैं।
- यह बयान बगावत की तरह लगता है।
- केरल कांग्रेस में भी थरूर को साइडलाइन करने की कोशिशें चल रही हैं।
- दूसरी ओर, राहुल गांधी का फोकस युवा नेतृत्व और इंडिया गठबंधन पर है।
- थरूर जैसे “पुराने” लेकिन प्रभावशाली नेताओं को समायोजित करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
- पार्टी हाईकमान ने मतभेद दूर करने की पहल की है,
- लेकिन अफवाहें थम नहीं रही हैं।
थरूर का अगला मास्टरस्ट्रोक क्या हो सकता है?
शशि थरूर राजनीतिक चतुराई और बौद्धिक छवि के लिए मशहूर हैं। उनका अगला कदम पार्टी के लिए बड़ा झटका या मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। संभावनाएं:
- पार्टी में बने रहकर सुधार की मांग — थरूर पार्टी छोड़ने से इनकार करते हैं, लेकिन आंतरिक लोकतंत्र और सम्मान की मांग कर सकते हैं। यह कांग्रेस को मजबूत बनाने वाला कदम हो सकता है।
- स्वतंत्र रुख अपनाना — वे केरल में अपनी अलग ताकत बना सकते हैं, जैसे स्थानीय मुद्दों पर बोलना या साहित्य/बौद्धिक मंचों से प्रभाव बढ़ाना।
- अन्य विकल्प तलाशना — हालांकि उन्होंने पार्टी बदलने से इनकार किया है, लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो कोई नया राजनीतिक प्रयोग संभव है।
- सुलह और बड़ा रोल — अगर राहुल से मुलाकात होती है और सुलह हो जाती है, तो थरूर केरल चुनाव में पार्टी का चेहरा बन सकते हैं, जो मास्टरस्ट्रोक होगा।
निष्कर्ष: कांग्रेस के लिए चुनौती
- कांग्रेस के लिए यह समय परीक्षा का है।
- केरल जैसे महत्वपूर्ण राज्य में आंतरिक कलह चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है।
- थरूर जैसे नेता पार्टी की बौद्धिक ताकत हैं,
- लेकिन अगर उन्हें साइडलाइन किया गया तो पार्टी कमजोर होगी।
- राहुल गांधी को नेतृत्व कौशल दिखाना होगा कि वे मतभेदों को एकजुट कर सकें।
अंत में, थरूर का अगला मास्टरस्ट्रोक शायद पार्टी छोड़ना नहीं, बल्कि पार्टी को मजबूत बनाने की मांग करना होगा। लेकिन अगर अफवाहें सच साबित हुईं और टकराव बढ़ा, तो कांग्रेस की एकता पर बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा। राजनीति में समय तेजी से बदलता है — देखना होगा कि थरूर का अगला कदम क्या होता है!
