जयशंकर खालिदा जनाजा
जयशंकर खालिदा जनाजा पीएम मोदी की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर बांग्लादेश पहुंचे जहां उन्होंने खालिदा के जनाजे में शिरकत की। भावनात्मक माहौल में भारत-बांग्लादेश संबंधों का मानवीय पक्ष झलका।

भारत और बांग्लादेश के बीच हमेशा से भावनाओं, संस्कृति और इतिहास का गहरा रिश्ता रहा है। यही रिश्ता तब एक बार फिर दिखाई दिया जब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय पार्टी (BNP) की नेता खालिदा जिया के निधन के बाद उनके जनाजे में भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश लेकर पहुंचे। इस अवसर पर वातावरण बेहद भावनात्मक था — राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत और सदभावना की झलक हर चेहरों पर नजर आ रही थी।
जयशंकर खालिदा जनाजा: भारत-बांग्लादेश रिश्तों में एक भावनात्मक पल
भारत ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और तब से लेकर आज तक द्विपक्षीय संबंध कई उतार-चढ़ावों से गुजरे हैं। खालिदा जिया, जो कई दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति की प्रमुख चेहरा रहीं, अक्सर भारत के प्रति अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती थीं। इसके बावजूद, जब उनके निधन की खबर आई, भारत सरकार की तरफ से तुरंत शोक संदेश भेजा गया।
प्रधानमंत्री मोदी के पत्र में खालिदा जिया के योगदान और दक्षिण एशिया की राजनीति में उनके प्रभाव को सम्मानपूर्वक याद किया गया। उन्होंने लिखा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, उनका नेतृत्व और बांग्लादेश के विकास के प्रति समर्पण सराहनीय था। जयशंकर ने यह शोक पत्र व्यक्तिगत रूप से ढाका पहुंचकर उनके परिवार को सौंपा।
ढाका में उमड़ा जनसैलाब
- ढाका की सड़कों पर उस दिन का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था।
- हजारों की संख्या में लोग अपने नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
- विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि—
- सबने मिलकर इस क्षण की गंभीरता को साझा किया।
भारत से पहुंचे जयशंकर जब जनाजे में शामिल हुए, तो वहां मौजूद लोगों ने उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया। यह क्षण केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय रिश्तों का प्रतीक भी था। जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे तारीक रहमान और अन्य परिजनों से भेंट की तथा प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संवेदना प्रकट की।
जयशंकर की भावुक प्रतिक्रिया
- विदेश मंत्री जयशंकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि
- “आज का दिन बांग्लादेश ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया के लिए दुखद है।
- खालिदा जी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व से बांग्लादेश के लोकतंत्र को आकार देने में भूमिका निभाई।
- राजनीतिक सीमाएँ इस समय गौण हैं —
- आज हम एक नेता और एक इंसान के खोने पर शोक मना रहे हैं।”
जयशंकर खालिदा जनाजा: यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत-बांग्लादेश के संबंध अब केवल नीति या राजनीतिक समीकरणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपसी सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव भी इन रिश्तों की नींव बन चुके हैं।
खालिदा जिया का राजनीतिक सफर
- खालिदा जिया का जीवन बांग्लादेश की राजनीति में संघर्ष और नेतृत्व का प्रतीक रहा।
- 1991 में जब वह पहली बार प्रधानमंत्री बनीं, तब देश एक नये लोकतांत्रिक दौर में प्रवेश कर रहा था।
- उनके शासनकाल में कई आर्थिक और सामाजिक सुधार हुए,
- हालांकि भारत के साथ रिश्ते कई बार तनावपूर्ण भी रहे।
लेकिन उनके निधन के उपरांत जिस प्रकार भारत ने सम्मान और संवेदना का संदेश भेजा, वह यह दर्शाता है कि राजनीति में मतभेदों के बावजूद इंसानियत की डोर कभी नहीं टूटती।
मोदी-जया कूटनीति की झलक
- प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम भारत की विदेश नीति में “नेबरहुड फर्स्ट” की भावना को सशक्त करता है।
- हाल के वर्षों में भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सीमा प्रबंधन,
- और सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
- इस भावनात्मक मौके पर मोदी द्वारा भेजा गया शोक संदेश एक बार फिर यह दिखाता है,
- कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को केवल रणनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी देखता है।
निष्कर्ष
- खालिदा जिया के जनाजे में भारत की सक्रिय उपस्थिति,
- जयशंकर का व्यक्तिगत रूप से शामिल होना,
- और मोदी का लिखा शोक पत्र — ये सब मिलकर दक्षिण एशियाई राजनीति में एक नया संदेश भेजते हैं।
- यह कि “राजनीति अस्थायी है, लेकिन भावनात्मक संबंध स्थायी।”
इस मौके ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई संवेदनशीलता की झलक दी है। दोनों देशों के लोग इस दृश्य को शायद लंबे समय तक याद रखेंगे, जब एक नेता के अंतिम सफर में कूटनीति ने करुणा का रूप ले लिया था।
